blogid : 17555 postid : 1380059

ब्लॉगर और अपरिचित लेखको के रचना को “कचरा साहित्य” के नाम से पहचाना जाता है

Posted On: 16 Jan, 2018 Others में

विचार मंथनShare your thought with all to make change in the World

Rinki Raut

26 Posts

111 Comments

साहित्य बहुत व्यापक और विस्तृत शब्द है, एक विशाल समुंदर के समान जिसकी गेहराई और छोर नापना कठिन हैI वो हर इन्सान जो लिखने में रूचि या कहे लिखने की हिम्मत रखता है,वो हिंदी साहित्य मे अपना छोटा सा योगदान देना चाहता है या हिस्सा बनना चाहता हैI कुछ दिनों पहले साहित्य की गरिमा को धूमिल करने वाला एक नया शब्द से मेरा परिचय हुआ “ कचरा साहित्य “ ये वो शब्द है जिसे शब्दकोश में ढूँढना बेवकूफी होगी इस शब्द का मतलब जानने के लिए गूगल बाबा के शरण में जाना होगा I तब भी शायद ही कचरा साहित्य का ठीक मतलब मिल पाए I
इसे ऐसे समझा जा सकता है, वो तमाम शौकिया या कहे मजबूर लेखक बिलकुल मेरे और आपके तरह जिनके पास ऐसा कोई प्लेटफार्म/स्थान उपलब्ध नहीं है, जहाँ वो अपनी लिखी हुई रचना कविता,कहानी,लेख और विचार को समाज से साझा कर सके, क्यूंकि हम जैसे लोग भारत के गली-कुचो में रहते हैI हम जैसे लोग ऐसे परिवार से आते है जिनका साहित्क पृष्ठभूमि नहीं होता हैI हम जैसे लोगो को उत्कृष्ट साहित्यकार हेय की दृष्टी से देखते है और हमारे द्वारा लिखे जाए काम को “कचरा साहित्य” के नाम से पुकारते हैI

जब पहली बार इस शब्द को सुना तो मन अन्दर से विचलित हो गया ये सोचकर की कैसे कोई किसी के लेखन को कचरे जैसा रद्दी समझ सकता है, पर बात इतनी छोटी नहीं है देश के हिंदी के महान लेखक जिनकी पहुँच अख़बार,प्रकाशन और सीमांत वर्ग के साथ है उनके लिए सफल लेखक बनना आसान होता है, बनस्पत हम जैसे ब्लॉगर,सोशल मीडिया के दुसरे मंच पर लिखने वाले लोगो के मुकाबले I
आपने भाई-भतीजाबाद के बारे में सुना होगा इस विषय पर फिल्म इंडस्ट्री में जोर-शोर से चर्चा होती रही है, भाई-भतीजाबाद सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री मे ही नही राजनीती, छोटे बड़े ऑफिस,इंडस्ट्री आदि जहाँ भी ये चल जाए देखने को मिल जाता हैI कभी-कभी लेखक वर्ग में भी भाई-भतीजाबाद पाया जाता है, हर उस लेखक को सहराना और प्रोत्साहन मिल जाता हैI
जो किसी नमी व्यक्ति या परिवार से तालुक रखते हैI हम जैसे लोग ब्लॉग,अखबार,पत्रिका और प्रकाशन ऑफिस के चक्की में अपना सर घुसाए परेशान होते रहते हैI
मैं इन महान साहित्कारो से बस इतनी गुज़ारिश करना चाहती हूँ की साहित्य के आगे कचरा जैसा शब्द लगकर उसका अपमान न करे आप चाहे मुझे बेकार, घटिया दर्जे का कहा सकते हैI मगर साहित्य से हिंदी लेखको के बीच पनप रहे भेदभाव की बू नहीं आनी चाहिए I देश में वैसे भी हिंदी पाठक बहुत कम है, जिन पाठको को पढने का शौक है वो भी अधिकतर अंग्रेजी से हिंदी में अनुवादित किताब पढ़ना पसंद करते है I में इन महान साहित्कारो से पूछना चाहती हूँ आज के मौजूदा समय में एक भी सफल हिंदी लेखक का नाम बता देI ये समय नहीं एक-दुसरे की आलोचना करने का ये समय है हिंदी साहित्य को उसके पाठको तक पहुचाने का I

रिंकी
https://rinkiraut13.blogspot.in/

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग