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प्रशंसनीय है भड़ास निकालने की मुखर प्रवृत्ति- Hindi Blog Tips

Posted On: 28 Jun, 2011 Others में

राजनीतिक सरगर्मियॉabout political thoughts,stability, ups and downs, scandals

Ram Pandey Editor Jagran Prakashan Limited

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हिंदी ब्लॉगरों की उभरती जमात संवाद के तमाम मूलभूत तथ्यों को सिरे से नकारती नजर आती है. इंटरनेट के व्यापक चलन ने हालांकि पाठकों और प्रयोगकर्ताओं की संख्या में खासा इजाफा किया है किंतु एक कमी जो चुभने वाली है वह यह है कि अभी शैशवावस्था से कुछ कदम आगे बढ़ी ब्लॉगिंग की विधा में समग्र चिंतन का अभाव दिखाई देता है. लोग नेट पर परस्पर संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं ये तो उत्साहवर्धक है लेकिन इसके साथ मानकीकरण को खारिज करके बोलचाल की शैली को महत्व दिया जा रहा है, जो कहीं ना कहीं चिंताजनक जरूर है.


हॉ, इन सबके बीच एक नयी धारा भी चलन में आयी है जिसका स्वागत किया जाना चाहिए. ये धारा है नौसिखिया वर्ग का उत्साहवर्धन और भड़ास निकालने की मुखर प्रवृत्ति. इससे अभिव्यक्ति के मूल सिद्धांत को बल मिलता दिख रहा है साथ ही ब्लॉगिंग अपने आप में ही एक नई चिंतन धारा के रूप में निरंतर आगे बढ़ रही है. इन सबके बीच सबसे मजेदार बात ये देखने को मिल रही है कि अब लोग केवल लिखने के लिए नहीं लिख रहे बल्कि लोगों को पता है कि इसके द्वारा वे अपनी बात दुनियां तक सरलता से पहुंचा सकते हैं. पहले जहॉ व्यक्तियों के पास अपनी बात कह सकने के लिए अधिक समय होता था, सामाजिक संबंधों का ताना बाना काफी बड़ा होता था और लोगों की रुचि भी परस्पर संपर्क में अधिक होती थी, वहॉ मन की टीस को व्यक्त करने का अवसर ज्यादा होता था. बदलते समय की जटिलताओं ने व्यक्तिगत सामाजिक संबंधों को बिखरा दिया और जीवन में एक अंतराल सृजित कर दिया. ऐसे में इस बात की आवश्यकता महसूस होने लगी कि बाहर रह कर भी दुनियां से संपर्क कायम किया जा सके. ब्लॉगिंग या सोशल साइट्स का जन्म इसी कमी को भरने के लिए हुआ जो धीरे-धीरे जरूरत बनते जा रहे हैं.


इस दरमियान कुछ जरूरी बातें है जिन्हें सभी ब्लॉगरों को अपनाना चाहिए:


1. संवाद की सहज शैली

2. संपर्क के दायरे को विस्तृत करना

3. मर्यादित और संयमित भाषा का प्रयोग

4. मुखर अभिव्यक्ति

5. प्रतिक्रिया यानि टिप्पणियों के रूप में सार्थक बहस या सुझाव देना

6. अनावश्यक वाग्जाल से परहेज

7. आत्म प्रशंसा से सख्त परहेज

8. मिशनरी गतिविधियों का निषेध

9. घृणा फैलाने वाले वक्तव्यों का निषेध

10. समीक्षात्मक नजरिया

11. निंदा की बजाय आलोचना की दृष्टि का विकास

12. तथ्यात्मक के साथ-साथ विषयनिष्ठ लेखन


मेरे ख्याल से हिंदी ब्लॉग संसार की उन्नति के लिए पृष्ठभूमि मजबूत रूप से मौजूद है. लेकिन इसका सार्वभौमिक रूप से तभी विकास हो सकता है जबकि एक-एक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी महसूस करे. अभी सबसे बड़ी कमी विश्लेषण की नजर आती है और ये हिंदी ब्लॉगिंग की वृद्धि  में सबसे बड़ी बाधा भी बन रहा है. बौद्धिक लोगों को आगे आ कर समीक्षा और विश्लेषण की प्रवृत्तियों का लेखन में समावेश करना होगा ताकि निकट भविष्य में हिंदी ब्लॉग जगत अपने को शीर्ष पर स्थापित कर सके.


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