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वार्तालाप- तीसरी किस्त

Posted On: 18 Dec, 2011 Others में

अंगारMy thoughts may be like 'अंगार'

राजेंद्र भारद्वाज

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1564 Comments

गतांक से आगे…..

छोटे मियां : इंजन की सीटी में म्हारो मन डोले..
बड़े मियां : क्या हाल हैं…..
छोटे मियां : आपके प्यार से निहाल हैं…खूब मैराथन लगवाई आपने…
बड़े मियां : किसकी?
छोटे मियां : अंगार चंद की. खूब हंसा मैं………कमेन्ट किया है देख लीजियेगा.
बड़े मियां : हाँ देख लिया ……..आजकल लोग बहुत हंस रहे हैं… प्यार के महीने में…
छोटे मियां : इस बार…….. तिवारी को भी क्या लपेटा है…
बड़े मियां : वो तो उत्तराखन्ड मुरारी हैं….
छोटे मियां : 😀
बड़े मियां : थोडा कंप्यूटर हैंग कर रहा है.
छोटे मियां : पूरा कंप्यूटर नहीं बस थोडा सा ही… कमाल है…..

छोटे मियां : और विडियो भी बड़ा खतरनाक डाला है आपने.
बड़े मियां : एक साथ कई प्रोग्राम चल रहे हैं…
छोटे मियां : कुछेक को बंद कर दें.
बड़े मियां : खतरनाक क्या था वेलेंटाइन के मौके पर ही था ……अब ये चीजें खतरनाक कहाँ रह गयी हैं…
छोटे मियां : हमारे घर-परिवार में तो अब भी मानी जाती हैं……………वो दीगर है की हम माने या नहीं…..
बड़े मियां : हाँ हम तो पुराने हो गए हैं न……पर अब ज़माना बदल गया है……….काश कि हम अब पैदा होते…
छोटे मियां : ये बात तो हमेशा सोची जाती रहेगी की काश …..राजकमल भाई ने अच्छी बखिया उधेडी है JJ वालों की. मज़ा आ गया .
बड़े मियां : समय की कमी से पढ़ नहीं पाया……
छोटे मियां : वैसे एक बार winner declare हो जाए तो फिर कुछ फेर बदल करूं. ….पोस्ट तो मिटानी हैं पर उनकी टिप्पणियां नहीं.
बड़े मियां : बिलकुल…..
छोटे मियां : ब्रम्हास्त्र का प्रयोग नए ढंग से करूंगा.
बड़े मियां : ……… के…… बीप-बीप….. क्या…..
छोटे मियां : वैसे मच्छरों के लिए तो हमारी फूंक ही काफी है ,मै तो ये कह रहा था की पोस्ट मिटाने के साथ ही कमेन्ट भी मिट जाएँगी पर बचा लूँगा मैं.
बड़े मियां : पडी भी रहेंगी तो भी फर्क पड़ता है…..क्या
छोटे मियां : और उस नामुराद को मच्छर इसलिए कहा की यही एक ऐसा प्राणी है जिसे मैं बिना सोचे-समझे मोक्ष प्राप्त करवा देता हूँ. एक ही जैसी दो-दो पोस्ट में मज़ा नहीं आता.
बड़े मियां : ये तो है……
छोटे मियां : आधी कमेंट्स इधर आधी उधर बाकी मेरे पीछे …. सब गड़बड़ हो जायेगा….ज़रा एक पान जमा लूं …. डाकू पानसिंह … उठ रहा है….
बड़े मियां : सुपारी लाल भी ले लेना….
छोटे मियां : आया रे…. आया रे…. जख्मी दिलों का बदला चुकाने…
बड़े मियां : भंग का रंग जमा हो चका-चक…..
छोटे मियां : कमबख्त ……… मेरे साथ भी चालू हो गया…
बड़े मियां : आज ना छोडेगा तुम्हे दम-दमाँ दम……
छोटे मियां : अपने लेख का लिंक भेजा है…जबकि उस पर पहले ही टिपण्णी कर चुका था…..उसकी तो……ऐसी की तैसी…
बड़े मियां : इसको उंगली क्या पकडाई, सीधा गले तक पहुँच गया……
छोटे मियां : ये लिंक देख लीजियेगा आपको पसंद आयेगा………है इसलिए लिहाज़ कर रहा हूँ…वरना सर चढ़ने वालों को उतारने का खानदानी हुनर रखते हैं…
बड़े मियां : आजकल मैं तो सर पर तेल ज्यादा लगा रहा हूँ, साला टिक ही नहीं पायेगा…..इस लिंक में तो मजा आ गया यारा……
छोटे मियां : तभी तो आपको भेजा है..
छोटे मियां : मुझ पर छाने लगा है तेरा खुमार, पाने को तुझे मैं हुआ बेकरार;
बड़े मियां : तो घूँट मुझे भी पिला दे …….देख फिर होता है क्या….
छोटे मियां : छलका-छलका जाम हूँ मैं, होठों पे रख ले छलकने से पहले..
हर नशा कर ले शराबी बहकने से पहले…
बड़े मियां : छलकाएं जाम आइये आपकी आँखों के नाम…होंठों के नाम…
छोटे मियां : लोग कहते हैं मैं शराबी हूँ…..
तुमने भी शायद ये ही सोच लिया…. हाँ …आँ …आँ…..आँ….
ये लीजिये बातें करते-करते हम लोग तो बोतलों से अन्त्याक्षरी खेलने लगे….
बड़े मियां : नशे में कौन नहीं है मुझे बताओ जरा, किसे है होश मेरे सामने तो लाओ जरा………
छोटे मियां : नशा है सबपे मगर रंग नशे का है जुदा…
रोते-रोते हँसना सीखो….नहीं मज़ा नहीं आया … कुछ दारू पर ही हो तो…
हाँ….रात भर जाम से जाम टकराएगा…
जब नशा छाएगा तब मज़ा आएगा..
अब आपकी बारी..
बड़े मियां : यार हम तो खाली खाली सपने देख रहे हैं, अभी थोड़ी देर है…लगाने में….
छोटे मियां : कहा तो की रात भर जाम से….
तब तक तो सपने ही देख कर काम चलाना पड़ेगा..
बड़े मियां : हाँ……..ये तो है भाई……तो दारू की बोतल में काहे पानी भरता है…
छोटे मियां : समझा नहीं मैं…. थोडा पैदल हूँ अक्ल से..
बड़े मियां : फिर ना कहना माइकल दारू पीके दंगा करता है………प्रिंसिपल साहब का ही है….
छोटे मियां : हाँ-हाँ …. बहुत दिन हुए इसे सुने इसलिए याद नहीं आया
मदिरा जो प्यास लगाये उसे कौन ….
बड़े मियां : पहले रेडियो सीलोन से हर पहली तारीख को प्रिंसिपल साहब का ये गाना बजता था……खुश है ज़माना आज पहली तारिख है…
छोटे मियां : दिन है सुहाना आज पहली तारीख है….
अब तो रेडियो भूल ही सा गया है…. FM में बकबक करते हुए RJ बिलकुल पसंद नहीं…
वो तो अमीन सायानी थे बिनाका गीत माला सोमवार नौ बजे रात को सुनना कभी नहीं भूलता था.
बड़े मियां : बिलकुल सही कहा……हमारे रेडियो का तो लाइसेंस भी था….
छोटे मियां : वो बीते दिन याद हैं..
वो पल छीन याद हैं…
गुज़ारे तेरे संग जो..
लगा के तुझे अंग जो…
बरसों बीत गए … हमको मिले बिछड़े…
बड़े मियां : या गर्मियों की रात हो, पुरवाईयाँ चलें…..ठंडी सफ़ेद
चादरों पे जागें देर तक….
छोटे मियां : सिमटी सी शरमाई सी किस दुनिया से तुम आई हो…
कैसे समाएगा जहाँ में इतना हुस्न जो लाई हो…….
एक हंसोड़ लाइन याद आ गयी…हमारे यहाँ की स्पेशल..
तो हुजुर की खिदमत में अर्ज़ किया है…
बड़े मियां : त सुनाव ………
छोटे मियां : .रात पी शराब तो रात कट गयी,….
बड़े मियां : वाह…
छोटे मियां : .रात पी शराब तो रात कट गयी,….
बड़े मियां : वाह-२..
छोटे मियां : सुबह हुआ हिसाब तो ……….टूं…….. गई..
बड़े मियां : ओए होए…….कमाल कर दिया यार……..
छोटे मियां : जैसे की हमने कल अपना डेबिट कार्ड और घडी घर के किस कोने में रखे या सड़क पर ही छोड़ आये याद नहीं…तो आज हमारा भी वही हाल हो गया सुबह…
बड़े मियां : इसे कहते हैं समाधि की स्थिति………
छोटे मियां : हाँ मान लिया इस बात को…
बड़े मियां : हम भी इस स्थिति को कई बार प्राप्त कर चुके हैं……
छोटे मियां : आप तो पुराने तपस्वी हैं इस क्षेत्र के… और हम तो आपके चेले भी नहीं बन सकते…
बड़े मियां : शादी की नयी-२ घड़ी ऐसे ही खोयी थी….
छोटे मियां : ये भी कल ही कूरियर से आई थी और कल ही….. हमारी आपकी ज़िन्दगी कितनी एक जैसी है..
बड़े मियां : सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया, दिल ने अगर चराग जलाए तो क्या किया…..
छोटे मियां : यहाँ तो खुद ही जले जा रहे हैं… और समाधी की इस स्थिति से कुछ ज्ञान भी प्राप्त हो गया…कि बेटा दुबारा ऐसा किया तो…..
बड़े मियां : इसीलिये कहता हूँ समय से घर चले जाया करो….
छोटे मियां : आज से ही इसका पालन सुनिश्चित करता हूँ…
बड़े मियां : जैसे कि मैं अब जाने वाला हूँ…
छोटे मियां : ये …….. जंक्शन वाले ब्लौगर लोगों के कॉन्टेस्ट के पोस्ट को आज फीचर कर रहे हैं….
बड़े मियां :….. बीप-बीप ….
छोटे मियां : टेम्प्रेचर हो तो भाई अन्गारचंद जैसा….
बड़े मियां : अब भाई परेशान होगा तो आग तो सुलगेगी ना..
छोटे मियां : माखन सिंह ……..
लाया विक्की बाबू….
बड़े मियां : क्या मतलब….
मैं तो चला जिधर चले मेरे घर का रास्ता….
छोटे मियां : शराबी का डायलौग है… अमिताभ का एक खास चाकर सिर्फ दारू की ट्रे लिए इसी इंतजार में खड़ा रहता है कि कब विक्की बाबु कहें … और मज़ा ये भी कि वो ‘आया विक्की बाबू’ न कहके ‘लाया विक्की बाबू’ ही कहता है..
बड़े मियां : हाँ याद आ गया ….भाई मूंछे हो तो नत्थू लाल जैसी…
छोटे मियां : वही कहा था मैंने कि टेम्प्रेचर हो तो अन्गारचंद जैसा…
बड़े मियां : ओह….आस-पास के कागज़ जल उठे हैं…….
छोटे मियां : जल्दी दारू … मेरा मतलब है पानी फेंक कर बुझायें..
बड़े मियां : ये आग तो सिर्फ प्यार से ही बुझती है…..और कमबख्त यहाँ ऑफिस में कोई……..नहीं है…
छोटे मियां : हम तो रक्तदान भी कर दें तो लोग नशे में हो जाएँ..
पीकर जाते हैं तो मच्छर भी काट कर झूमने लगते हैं…
फिर बार-२ हमें ही खोजते हैं काटने के लिए…
बड़े मियां : हाँ उनका भी हक बनता है…..
छोटे मियां : मैं भी अब फरार होने की तैयारी कर लेता हूँ..आपको भी देर हो रही होगी…
बड़े मियां : हाँ तो फिर ओके तो ओके तो ओके……
छोटे मियां : अच्छा बाय-बाय भईया….
बड़े मियां : बाय-बाय …..

(…..जारी है…….)

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