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देश को विरासत में मिली है असहिष्णुता ?

Posted On: 25 Nov, 2015 Others में

मेरा भारत महानAn initiative to keep the truth in front of everyone

Riyaz Abbas Abidi

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आज पुरे भारत में मोदी सरकार की शान में जो आलोचना के स्वर उठा रहें हैं उन लोगों से मैं ज्यादा कुछ नही कहना चाहता पर थोडा बहुत अवश्य कहना चाहता हूँ !

आये दिन जिस असहिष्णुता का मुद्दा जिस प्रकार से मोदी सरकार को बदनाम करने के उदेश्य से बनाया जा रहा है वो बिलकुल भी उचित नही है दरअसल मोदी सरकार तो इस  असहिष्णुता की दीमक को समाप्त करने के लिए आई है जिस के लिए हमारे देश के प्रधानमंत्री वे अंतर्राष्ट्रीय बहुचर्चित राजनेता नरेंद्र मोदी इस दिशा में कार्यरत हैं ।

वे हर समाज को एक साथ लेकर चलने की बात पर कायम है, एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के आधार पर अगर हम नज़र डालें तो मालूम होता है कि देश में पिछले साल के मुकाबले इस साल सांप्रदायिक वारदात कम हुईं हैं रिपोर्ट में कहा गया है  कि इस साल अक्टूबर तक ऐसी घटनाएं 561 हुई हैं। जबकि 2013 में यूपीए गवर्नमेंट में सांप्रदायिक वारदात का ये आंकड़ा 694 था।

और  यदि हम कांग्रेस के शासन काल पर नज़र डालें तो पता चलता है के देश में असहिष्णुता कांग्रेस की देन है मोदी सरकार तो उसको ख़तम करने की दिशा में काम कर रही है असहिष्णुता मोदी सरकार को कांग्रेस की तरफ से विरासत में मिली थी इस को मिटाने में कुछ तो समय लगे गा ही !

पुरे भारत के सभी देशवासी जानते हैं के कांग्रेस के शासनकाल में असहिष्णुता का माहोल रहता है यहाँ किसी सांप्रदायिक घटना नाम लेना अवश्य नही है यदि मैं यहाँ सांप्रदायिक घटनाओ का जिकर करने बैठ गया तो १०००० पन्नो की एक किताब बन जायगी !

कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ अत्याचार तो या मुज़फ्फरनगर में हुए अत्याचार की बात हो या घोधरा रेल कांड हो या गुजरात दंगों की हो या आज की बहुचर्चित दादरी हत्या कांड हो या और अन्य इन जैसी वारदाते हो वो सब आतंकवाद की category में आती हैं! और ऐसी घटनाओ की निंदा हर व्यक्ति को करनी चाहिए! परन्तु इस असहिष्णुता का दोष केवल मोदी सरकार पर डालना अन्याय है!

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असहिष्णुता तो प्राचीनकाल से है तो फिर मोदी सरकार ही दोषी कैसे ?

यदि देखा जाये तो असहिष्णुता तो हमारे देश को विरासत में मिली है वो कैसे तो कुछ उदहारण दे रहा हूँ! असहिष्णुता का माहोल कभी छोटी जाति वाले को धार्मिक स्थल में प्रवेश करने पर पाबंदी लगा देने से ख़राब होता है और तो और कभी छोटी जाति वाले के हाथों से बने खाने का अपमान किया जाता है!

असहिष्णुता तो जब भी थी जब शाहजहाँ ने ताजमहल बनाने वाले के हाथ काट दिए थे, असहिष्णुता तो जब भी थी जब पति के मरने के बाद पत्नी को सती कर दिया जाता था, असहिष्णुता तो जब भी थी जब राजा मोहन राय ने पत्नी को सती न होने देने के लिए आवाज़ उठाई और लोगों ने उन पर अत्याचार किये,असहिष्णुता तो जब भी थी जब सर सय्यद अहमद खान ने मुसलमानों को शिक्षा से जोड़ने के लिए आवाज़ उठाई तो और उनके गले में जूतों का हार पहना दिया गया! सब से बड़ी असहिष्णुता तो अंग्रेजों के समय में थी जिसका फायदा नहरू गाँधी और मोहम्मद अली जिन्हा ने उठाया! सत्य तो यह है के यदि नहरू गाँधी और मोहम्मद अली जिन्हा भारत में न जन्मे होते तो आज भारत में असहिष्णुता का माहोल न  होता!  मेरी सोच तो यही कहती है की  इतना होने के बाद भी सत्य यह भी है के आज पुरे संसार में सब से शांत देश भारत ही है आज पूरी दुनिया आतंकवाद की आग में झुलस रहा है पर अल्लाह करम से मेरा भारत दुनिया का स्वर्ग बना हुआ है!

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