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हत्यारे हमेशा दोज़क की आग में जले गें!

Posted On: 19 Sep, 2016 Others में

मेरा भारत महानAn initiative to keep the truth in front of everyone

Riyaz Abbas Abidi

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न मालूम लोग क्यों अल्लाह के प्रकोप वह अभिशाप से नहीं डरते हैं कुछ अत्याचारी लोग सोचते हैं कि जितना हम लोगों पर हम ज़ुल्म करेंगे उतने ही शक्तिशाली माने जायगें ।

BloodyKnifeVectorक्योंकि वे यह जानने की कोशिश नहीं करते कि हर मनुष्य को इस दुनिया से परमात्मा/अल्लाह के  सामने (बारगाह में) वापस जाना है, लेकिन हम मनुष्य (इन्सान) अपनी झुठी शक्ति और धन के अहंकार और अभिमान के नशे में इतने अन्धे हो जाते हैं कि उसको न परमात्मा/अल्लाह याद आता है और न उसकी (परमात्मा/अल्लाह) की महिमा ।

हज़रत इमाम अली (अ स) फरमाते हैं

किसी मनुष्य के लिए उचित नहीं है कि वे दो बातों पर भरोसा करे। एक स्वास्थ्य और अन्य दोलत.क्यो की अभी आप किसी को स्वस्थ देख रहे थे, वह देखते ही देखते बीमार पड़ जाता है और अभी आप किसी को धनी समझ रहे थे कि वह फकीर व जरूरतमंद हो जाता है।

हज़रत इमाम अली (अ स) के फरमान से हमें शिक्षा हासिल करनी चाहिए की यदि कोई इन्सान अपनी शक्ति और धन पर कभी अहंकार और अभिमान न करेगा तो कभी किसी पर अत्याचार भी नहीं करेगा ।

कई लोग अहंकार और अभिमान के साथ ईर्ष्या की बीमारी के शिकार हो जाते हैं और ईर्ष्या की इस बीमारी की वजह से हर तरह का अत्याचार करने पर आमादा हो जाते हैं यहाँ तक के लोग ईर्ष्या , अहंकार और अभिमान के रोग के चलते निर्दोष लोगों की हत्या कर देते हैं । और ऐसा पाप कर के  समझते हैं कि हम बहुत शक्तिशाली हो गए हैं, और लोग हमारी शैतानी ताकत को देखकर हमारे  सामने अपने को झुका देंगे ।

और अक्सर देखा भी ऐसा ही जाता है कि अगर कोई ज़ालिम किसी व्यक्ति पर ज़ुल्म करे किसी की हत्या करे तो लोग अत्याचारी के अत्याचार के डर की वजह से अपनी आवाज बुलंद नहीं करते हैं। और अत्याचारी के अत्याचार के डर की वजह से समाज में रहने वाले लोग उसकी इज़्ज़त व प्रतिष्ठा करने के लिए मजबूर हो जाते हैं ।

जबकि एक तानाशाही के सामने अपनी आवाज बुलंद न करना भी एक अन्याय ही है और कही न कही ऐसा करके ज़ुल्म के सामने समाज भी अपना सिर झुका देता है, पर अफसोस अत्याचारी (ज़ालिम) फिरौन, नमरूद, यज़ीद,हिटलर, आदि जैसे अत्याचारियों और उनके साथियों पर नजर नहीं डालते की आज उन्हें कोई पूछने वाला तक नहीं है।

पवित्र कुरान में इरशाद हो रहा है और जो भी किसी आस्तिक (मोमिन) व्यक्ति की जान बूझकर हत्या कर देगा उसकी सज़ा नरक है, और उसको उसी में हमेशा रहना है, और उस पर अल्लाह का प्रकोप भी है, और परमात्मा/अल्लाह लानत भी करता है, और वह (अल्लाह) ने उसके लिए बहुत बड़ी सजा भी मुहैया कर रखी है । (पवित्र कुरान 4:93 )

परमात्मा / अल्लाह के कथन से पता चलता है जब कोई व्यक्ति किसी मनुष्य की जान बूझकर हत्या कर देगा तो उसकी सजा नरक है और हमेशा नरक में ही रहेगा और परमात्मा/अल्लाह कातिलों पर लानत भी करता है। तो आखिर हम इंसान क्यों क्रूर और हत्यारों (कातिलों) को अपनी सभाओं (बज़्म) में बैठने की अनुमति देते हैं?

सवाल यह भी है कि आखिर क्रूर और हत्यारों (कातिलों) को हम कैसे अपना दोस्त व हमदर्द मान  सकते हैं और कैसे उन्हें इन्सान कहने की कल्पना कर सकते हैं?

अब सवाल यह है की जब अल्लाह जालिमों और कातिलों के लिए नरक में स्थान दिया है तो आखिर उस व्यक्ति के लिए किया दिया है जिसको कतल कर दिया गया ।

तो याद रहे खुदा वंदे आलम ऐसे लोगों के लिए पवित्र कुरान में इरशाद फ़रमाया रहा है

और जो लोग ख़ुदा की राह में शहीद हो जाते हैं उन्हें मृत न कहो बल्कि वे जीवित हैं लेकिन तुम्हें उनकी जीवन की चेतना नहीं है। (पवित्र कुरान 2: 154)

मनुष्य को समझने की आवश्यकता है की वे यदि यहाँ किसी पर अत्याचार करे और दुनिया में उसको सज़ा न भी मिले तो जो सब से बड़ा न्याय करने वाला (अल्लाह) वो वहाँ सज़ा अवश्य देगा और अत्याचरियो को आग में डाल देगा । सारे घमंड सब कब्र में जाते ही मिट्टी में मिल जाये गें ।

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