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ग़ज़ल : दर्द जब दिल का दुबाला हो गया

Posted On: 15 May, 2020 Others में

Saarthi BaidyanathGhazal, Poetry & Thoughts.

Saarthi Baidyanath

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दर्द जब दिल का दुबाला हो गया
चेहरा-चेहरा इक रिसाला हो गया
……………………………………….
रात भर पढ़ते रहे हम चाँद को
आसमां इक पाठशाला हो गया
……………………………………….
लोरियाँ माँ ने सुनाई और फिर
मेरे सपनों में उजाला हो गया
……………………………………….
जब अना कुचली गई तो ये हुआ
आँख रोई दिल में छाला हो गया
……………………………………….
है मुहब्बत आबे-जमजम की तरह
पी लिया जिसने वो आला हो गया

#saarthibaidyanath

 

 

 

 

नोट : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं।

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