blogid : 14076 postid : 694057

एक कविता गणतंत्र दिवस पर ......

Posted On: 25 Jan, 2014 Others में

कुछ मेरे भी मन की बातें ....मै कौन हूँ ,ये ना जानो , अभी ठहरो तो जरा , मेरे ही शब्द कभी मेरा पता देंगे तुम्हे "

swar

9 Posts

10 Comments

आप सभी को गणतंत्र दिवस पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं, जो भी है जैसा भी है देश तो अपना ही है ना, और भारत जैसा भी है भ्रष्ट, अपराधयुक्त, अविकसित, दूषित पर्यावरण युक्त आदि आदि बनाया तो हमने ही है ना … कुछ ना कर सकते हो तो कम से कम एक दो राष्ट्रीय पर्वों पर तो इसकी इज्जत को, इसके सम्मान को बचा लें |…. एक कविता लिखता हूँ , भाव से पढियेगा ….

छब्बीस जनवरी की तिथि ने दिया था वो मान |
भारत को मिल गया था, भारत का संविधान ||

वर्षों की गुलामी को सह, आजादी मिली थी
मानो घने कोहरे के बाद धुप खिली थी
गम के अँधेरे मिट गये, खुशियाँ बनी मेहमान
भारत को मिल गया था, भारत का संविधान |

आजादी तो मिली परन्तु एक दोष था
क़ानून विदेशी को ले, जनता में रोष था
अम्बेडकर नेतृत्व में जुट गए सब विद्वान- तब
भारत को मिल गया था भारत का संविधान |

आओ मनाये मिलकर गणतंत्र दिवस पर्व
एकत्र बिना भेदभाव हो समाज सर्व
ये लक्ष्य संविधान का, सब होवें एक समान
भारत को मिल गया था, भारत का संविधान ||

सचिन कुमार दीक्षित ‘स्वर’
facebook.com/skswar

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग