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एक व्यंग्य सोने पर

Posted On: 21 Oct, 2013 Others में

कुछ मेरे भी मन की बातें ....मै कौन हूँ ,ये ना जानो , अभी ठहरो तो जरा , मेरे ही शब्द कभी मेरा पता देंगे तुम्हे "

swar

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सोने पर सपना दिखा कहीं गड़ा है सोना |
बात मान सब जुट गए छाना कोना कोना ||
छाना कोना कोना मिली ना एक चवन्नी |
और सपने से संत श्री ने काटी कन्नी ||
बोले कि है यत्र तत्र सर्वत्र ही सोना |
बस लोटन की जगह होय और होय बिछौना ||

सचिन कुमार दीक्षित ‘स्वर’

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