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किसी को आरक्षण चाहिए किसी को आजादी, ये कैसा देशप्रेम है?

Posted On: 24 Feb, 2016 Others में

सद्गुरुजीआदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

sadguruji

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किसी को आरक्षण चाहिए किसी को आजादी, ये कैसा देशप्रेम है?

क्या लोग थे वो दीवाने,
क्या लोग थे वो अभिमानी
जो शहीद हुए हैं उनकी,
ज़रा याद करो कुरबानी
जय हिंद, जय हिंद,
जय हिंद की सेना….

कवि प्रदीप के लिखे हुए देशभक्ति से परिपूर्ण एक हिन्दी गीत “ऐ मेरे वतन के लोगों” की कुछ पंक्तियाँ हैं ये. देश की सरहदों और नागरिकों की रक्षा करनेवाली हिन्द की सेना को नमन. अटूट देशप्रेम का स्वाभिमान मन में रखने वालों और देश की रक्षाके लिए अपनी जान न्यौछावर करनेवाले सभी देशप्रेमी दीवानों को नमन. वैसे तो ये देशभक्ति गीत 1962 में चीनी आक्रमण के समय मारे गए भारतीय सैनिकों को समर्पित था, लेकिन ये गीत आज भी पूर्णतः प्रासंगिक है. पिछले कई दशकों से जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से आने वाले आतंकवादियों से आये दिन मुठभेड़ें हो रही हैं, जिसमें हमारे देश के बहुत से बहादुर सैनिक बॉर्डर और नागरिकों की रक्षा करते हुए शहीद हुए हैं. अभी हाल ही में बीस फरवरी की शाम को जम्मू-कश्मीर के पंपोर में आतंकवादियों के साथ शुरू हुई मुठभेड़ लगभग 48 घंटे तक चली और उसमे सेना के दो कैप्टेन सहित पांच सुरक्षाकर्मी शहीद हुए. हमारे वीर सैनिकों ने 120 नागरिकों को सुरक्षित निकाल उनकी जान बचाई. हालांकि इस मुठभेड़ में एक भारतीय नागरिक की भी मौत हो गई, लेकिन अच्छी बात यह रही कि भारत में तबाही मचाने के इरादे से घुसने वाले और जम्मू-कश्मीर में पंपोर के एक सरकारी भवन में छिपकर भारतीय सैनिकों से मुठभेड़ करने वाले तीनों हथियारबंद विदेशी मूल के आतंकवादी मारे गए.
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देश के अंदरुनी हालात पर यदि गंभीरता से गौर करें तो वह बेहद चिंताजनक है. हरियाणा में जाट आरक्षण के लिए पिछले पांच दिनों से जारी हिंसक आंदोलन केंद्र व राज्य सरकार द्वारा इस मुद्दे पर समुचित कार्यवाही करने का आश्वासन मिलने के बाद अब तकरीबन थमने लगा है. कई दिनों तक लाखों यात्रियों की बस और रेलवे स्टेशनों पर हुई भारी फजीहत के बाद फ़िलहाल अब सेना और पुलिस के अथक प्रयास की बदौलत बस और रेल यातायात सेवा बहाल हो गई है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक़ इस आंदोलन के दौरान हिंसक झड़पों में मरने वालों की संख्या 16 तक पहुँच गई है. आंदोलनकारियों द्वारा किये गए हिंसक उपद्रव से सरकारी और आम नागरिकों की सम्पत्ति को कितना नुकसान पहुंचा है, कितने वाहनों को फूंका गया है, कितनी सड़कें खोदी गई हैं, कितने रेलवे स्टेशनों को बर्बाद किया गया है, रेलवे को कितने राजस्व की हानि हुई है और कितने व्यापारियों को कितना घाटा हुआ है, इसका सही सही आंकलन होने में अभी कुछ दिन का वक्त लगेगा. ये नुकसान निश्चित रूप से कई हजार करोड़ में होगा. उधर राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारत विरोधी नारा लगाने वाले और देशद्रोह के आरोपी जिन पांच छात्रों को पुलिस खोज रही है, वो सभी छात्र यूनिवर्सिटी कैंपस में देखें गए हैं.
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इन आरोपी छात्रों का कहना है कि वे आत्म समर्पण नहीं करेंगे और पुलिस उन्हें गिरफ्तार करे. सभी देशवासी यही चाहते हैं कि इन देशद्रोहियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर जेल पहुंचाया जाये, किन्तु पुलिस इन्हे गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही है और किस बात का इन्तजार कर रही है, ये समझ से परे है. मजेदार बात ये है कि भारत विरोधी और कश्मीर की आजादी के पक्ष में नारा लगाने वाले ये छात्र अब जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय को राष्ट्र-विरोधियों का गढ़ करार देने के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं. राष्ट्रविरोधी कार्यक्रम आयोजित करके भी वो साबित करना चाहते हैं कि जेएनयू राष्ट्रविरोधियों का गढ़ नहीं है. हैरत की बात ये है कि राष्ट्रहित से जुड़े इस मुद्दे पर विपक्ष राष्ट्रविरोधियों के साथ खड़ा है. कांग्रेस के अनुसार तो राष्ट्रविरोधियों पर कार्यवाही करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मतभेदों की स्वतंत्रता पर एक सुनियोजित हमला है, जो मोदी सरकार कर रहीं है. दरअसल कांग्रेस को ये डर सता रहा है कि देशभक्ति और राष्ट्रवाद पर इस देश में यूँ ही बहस चलती रहीं और राष्ट्रद्रोहियों पर मोदी सरकार द्वारा कठोर कार्यवाही की गई तो उन्हें घाटा होगा. वो और भी गर्त में जायेंगे. जेएनयू विवाद पर कांग्रेस की बयानबाजी से स्पष्ट है कि कांग्रेस को देश से ज्यादा लगाव जेएनयू के नाम से है, जो उसके नेता जवाहर लाल नेहरू के नाम पर रखा गया है.
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उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया है कि कुछ असंतुष्ट नेता, एनजीओ और कालाबाजारी करने वाले सरकार को अस्थिर करने और उन्हें बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं, लेकिन वे ऐसी साजिशों के सामने नहीं झुकेंगे. प्रधानमंत्री ने कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा है कि कुछ लोग इस बात को अभी तक पचा नहीं पाए हैं कि एक ‘चायवाला’ देश का प्रधानमंत्री बन गया और इसलिए उन्हें गिराने के लिए हर समय साजिश करते रहते हैं. प्रधानमंत्री जी यदि इस सत्य का अहसास आप करते हैं तो अपनी तटस्थ और उदारवादी रहने वाली नीति छोड़िये. राष्ट्रविरोधियों के खिलाफ अब आप पूरी तरह से आक्रामक मुद्रा में आ जाइये. इसी में आपका, भाजपा का और देश का हित है. अंत में जम्मू-कश्मीर के पंपोर में आतंकवादियों से मुठभेड़ करने में शहीद हुए कैप्टन पवन कुमार का अंतिम सन्देश, जो देश के उन स्वार्थी और लालची लोगों की घातक मनोवृति पर की गई एक बहुत करारी चोट है, जिन्हे देशहित से ज्यादा आरक्षण, आजादी और अपने हित की चिंता है. फेसबुक पर भेजे अपने आखिरी पोस्ट में कैप्टन पवन कुमार ने लिखा था, “किसी को रिजर्वेशन चाहिए तो किसी को आजादी. हमें कुछ नहीं चाहिए भाई.” हरियाणा के जींद के रहने वाले कैप्टन पवन कुमार एक जाट थे और उसी जेएनयू के स्नातक थे, जिसके कुछ छात्रों पर देशविरोधी नारे लगाने के गंभीर आरोप हैं. देशभक्ति की एक अनूठी मिसाल पेश करने वाले शहीद कैप्टन पवन कुमार को कोटि कोटि नमन. राष्ट्र को अब यही करना चाहिए, जो इस देशभक्ति से परिपूर्ण गीत में वर्णित है.
वक़्त की आवाज़ के हम साथ चलते जाएंगे
हर क़दम पर ज़िन्दगी का रुख बदलते जाएंगे
गर वतन में भी मिलेगा कोई गद्दारे वतन
अपनी ताकत से हम उसका सर कुचलते जाएंगे
एक धोखा खा चुके हैं और खा सकते नहीं
अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं…

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आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
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