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पटना-इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन हादसे का जिम्मेदार कौन है? जागरण जंक्शन फोरम

Posted On: 22 Nov, 2016 Others में

सद्गुरुजीआदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

sadguruji

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कितना दर्द है दिल में
दिखाया नहीं जाता,
उफ़! बर्बादी का किस्सा
सुनाया नहीं जाता!
देखना तक दुश्वार हुआ
अपने अजीजों को,
क्योंकि बार बार कफ़न
उठाया नहीं जाता!!

कानपुर में पुखरायां के पास पटना-इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन के भीषण हादसे के बाद बिलकुल यही स्थिति थी, जो किसी शायर ने इन पंक्तियों में बयान की है. घटना स्थल के आसपास हर तरफ रौंगटे खड़ा कर देने वाला और न देखा जा सकने वाला बेहद ख़ौफ़नाक मंजर था. हर ओर लोंगों की चीख-पुकारें सुनाई दे रही थीं. नहीं मिल रहे परिजन के जीवित या मृत होने के बेहद तकलीफदेह संशय में कहीं अपने लापता बेटे का पर्स हाथ में लेकर कोई बेसुध पिता बैठा था, तो कहीं कोई लड़की हादसे में हाथ की हड्डी टूटने का दर्द भूलकर अपने पिता को तलाश कर रही थीं, तो कहीं बेचैन लोंगो के झुण्ड प्रशासनिक अधिकारियों से अपने परिजनों के बारे में जानकारी पाने के लिए गुहार लगा रहे थे. अस्पताल से मरहम पट्टी कराकर लौटी बदहवास सी एक लड़की जीवित बचे यात्रियों और टूटी फूटी बोगियों से निकलती लाशों में अपने पिता को तलाश रही थीं. सुखद वैवाहिक जीवन जी रहीं और ऐसे ही जीवन का ख्वाब मन में संजोने वाली न जाने कितनी जिंदगियां इस हादसे में तबाह हो गईं. इस दर्दनाक हादसे ने मासूमों को भी नहीं बक्शा.
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पटना-इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन में यात्रा कर रहे एक यात्री के अनुसार इस भयावह हादसे में दो साल की एक मासूम हंसती-खेलती बच्ची के कटकर दो टुकड़े हो गए. इस भीषण हादसे ने किसी से उसके माता, पिता, भाई, बहन को छीना तो किसी से उसके पति या पत्नी को. अब सवाल यह उठता है कि अब तक 146 से भी अधिक जिंदगियां छीन चुके इस हादसे या हत्याओं का जिम्मेदार कौन है? रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं और उन्होंने कहा है कि ज़िम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी. ये हादसा क्यों हुआ? इस सवाल का जवाब तो अब रेलवे की जांच के बाद ही मालूम होगा, किन्तु इसके कारणों की चर्चा मीडिया में कई दिनों से हो रही है. कोई रेलवे ट्रैक में फ्रैक्चर तो कोई रेलवे ट्रैक पर दिनोंदिन बढ़ते लोड को दर्घटना का कारण बता रहा है. मीडिया में छपी एक खबर के अनुसार इंदौर-पटना एक्सप्रेस के ड्राइवर ने अपनी रिपोर्ट में लर्चिंग यानी रेलवे ट्रैक के नीचे गड्ढे के कारण अचानक झटका लगने को हादसे की वजह बताया है. यदि यह सही है तो उस जगह पर पहले भी ट्रेन चालकों को लर्चिंग महसूस होती रही होगी.

रेलवे प्रशासन से इसकी शिकायत उन्होंने पहले कभी की या नहीं की, इसकी भी जांच होनी चाहिए. एक बात और ध्यान देने वाली है कि हादसे के वक्त पटना-इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन 110 किलोमीटर प्रति घंटे कि रफ़्तार से दौड़ रही थी. ट्रेन की इस बहुत तेज रफ़्तार में अचानक एमरजेंसी ब्रेक लगाने से रेल ट्रैक के टूटने के कारण भी ऐसी दुर्घटना हो सकती हैं. दुर्घटना वाले ट्रैक पर कुछ ही देर पहले ओवर लोडेड गुड्स ट्रेन कम स्पीड में गुजरी थीं. हो सकता है कि सामान ढोने वाली ओवर लोडेड ट्रेनों के कारण पटरी पर क्रैक बनने शुरू हो गए हों, जो तेज रफ़्तार से भाग रही पटना-इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन की दुर्घटना के कारण बन गये हों. एक तरफ जहाँ कई लोग पटरियों के सिकुड़ने से डिब्बों के उतरने की बात कह रहे हैं जो तार्किक नहीं लगती है, क्योंकि अभी इतनी ठंड नहीं पड़ रही है कि पटरियां सिकुड़ने लगे. वैसे भी इसकी सम्भावना नहीं लगती क्योंकि अधिकतर जगहों पर अब ठंडियों में सिकुड़ने वाली फिश प्लेटों की जगह नई टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है. वहीँ दूसरी तरफ पटना-इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन की एस-1 बोगी में सफर कर रहे एक यात्री के बयान पर गौर करें.

उस यात्री के अनुसार एस-1 बोगी में काफी समय से तेज झटका लग रहा था. उन्होंने झांसी स्टेशन पर शिकायत भी दर्ज कराई, किन्तु स्टेशन मास्टर और गार्ड ने इस पर ध्यान नहीं दिया. यदि दुर्घटना के कारणों पर गौर किया जाए तो यात्री की बात सही लगती है. ट्रेन की पीछे की बोगियां एस-1 और एस-2 की बोगी पर जा चढ़ीं थीं और सबसे ज्यादा नुकसान भी एस-1 और एस-2 की बोगी को ही हुआ था. सबसे ज्यादा यात्री इन्ही बोगियों के मरे. इन बोगियों में जरूर कोई मैकेनिकल फॉल्ट यानि तकनीकी गड़बड़ी थी. अब तो अफ़सोस इसी बात का है कि यदि यात्री की शिकायत सुनकर तत्काल बोगी की मरम्मत कर दी गई होती तो शायद दुर्घटना को रोका जा सकता था. यहाँ एक सवाल और उठता है कि यदि हादसे की वजह रेलवे कोच में गड़बड़ी थी तो उसे पूरी तरह से फ़िट होने का प्रमाण पत्र कैसे मिल गया? किसी भी ट्रेन को चलाने से पहले और गंतव्य तक चलाने के बाद उसका प्राइमरी इंस्पेक्शन होता है. इसे ब्रेक पावर सर्टिफिकेट देना भी कहा जाता है. इस हादसे के बाद अब तो यह संदेह उत्पन्न हो रहा है कि हादसे वाली ट्रेन की चलाने से पहले इंदौर में ठीक तरह से उसकी जांच की गई या फिर जांच के नाम पर घोर लापरवाही बरतते हुए जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति भर कर दी गई.
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पीएम मोदी इस देश में एक तरफ जहाँ बुलेट ट्रेन शुरू करने की तैयारियों में जोर शोर से लगे हैं, वहीँ दूसरी तरफ नियमित अंतराल पर हो रही ट्रेन दुर्घटनाएं आम जनता की चिंता का सबब बन चुकी हैं. ट्रेन में यात्रा करना अब बेहद जोखिम भरा सफर होता जा रहा है. रेल मंत्रालय को चाहिए कि वो रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपकरणों को और बेहतर करे. संकेतक प्रणाली को सही करे, जो गर्मियों में रेल कर्मियों की लापरवाही के कारण और सर्दियों में कोहरे के कारण अक्सर फेल हो जाती है. अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए रेलवे अब माल ढुलाई पर विशेष ध्यान दे रही है, लेकिन ओवर लोडेड गुड्स ट्रेनों के गुजरने से रेल पटरियों की हो रही बुरी हालात में सुधार लाने पर ठीक ढंग से ध्यान नहीं दे रही है, जबकि ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए रेल पटरियों की खराब स्थिति में त्वरित रूप से सुधार लाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए. अंत में पटना-इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन के भीषण हादसे में मरने वाले लोंगों को अपनी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि देते हुए ईश्वर से उनको शान्ति और सद्गति देने की प्रार्थना करता हूँ. मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त करता हूँ और सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की शुभ कामना करता हूँ. गीतकार योगेश ने जिंदगी और मौत के बारे में बिलकुल सही कहा है-

कभी देखो मन नहीं जागे,
पीछे-पीछे सपनों के भागे!
एक दिन सपनों का राही,
जाये सपनो के आगे कहाँ?
जिन्होंने सजाये यहाँ मेले,
सुख-दुःख संग-संग झेले!
वही चुनकर कभी खामोशी,
यूँ चले जाएँ अकेले कहाँ?

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आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106
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