दिल्ली नगर निगम के चुनाव में लगातार तीसरी बार विजय हासिल करने पर भाजपा को बधाई. आप और कांग्रेस जैसे उसके विरोधियों को अचरज हो रहा है कि भाजपा दिल्ली महानगर की तीनों निगमों की सत्ता पर लगातार तीसरी बार काबिज होने में कैसे सफल हो गई है, जबकि उसने पिछले 10 वर्षों में दिल्ली के लिए कुछ भी काम नहीं किया है. हार से बौखलाए दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, “ईवीएम से बिना छेड़छाड़ किये इस तरह की प्रचंड जीत संभव नहीं है.” एमसीडी को दुनिया की सबसे भ्रष्ट संस्था बताने वाले आदमी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष ने एक इंटरव्यू में कहा, “यह 100 प्रतिशत ईवीएम की कारस्तानी है.” आप पार्टी के एक अन्य नेता गोपाल राय ने कहा कि ‘ये ईवीएम लहर है, मोदी लहर नहीं.’ मतदान के कुछ रोज पहले एक इंटरव्यू में केजरीवाल ने कहा था, “ईवीएम में गड़बड़ी नहीं हुई तो हमें 272 में 200 से ज़्यादा सीटें मिलेंगी.” लेकिन मतदान के बाद कुछ न्यूज चैनलों के एक्जिट पोल में जब भाजपा को 200 से ऊपर सींटें मिलने की भविष्यवाणी की गई तो केजरीवाल गुस्से से आग बबूला हो गए. चुनाव परिणाम आने के एक दिन पहले सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमे उन्होंने कहा, “अब अगर हम बुधवार को हारते हैं… नतीजे वैसे ही रहते हैं जैसे कि बीती रात बताए गए हैं, तो हम ईंट से ईंट बजा देंगे… आम आदमी पार्टी आंदोलन की उपज है, इसलिए पार्टी वापस अपनी जड़ों की ओर लौटने से हिचकिचाएगी नहीं.”

ऐसी अहंकारपूर्ण, अपरिपक्व और अमर्यादित टिप्पणियां ही पिछले कुछ माह से आप पार्टी के निरंतर हो रहे पतन का मूल कारण बन गई हैं. गोवा में वो बुरी तरह से हारी, पंजाब में कुछ ख़ास नहीं कर पाई और अब अपने गढ़ दिल्ली में भी दो वर्ष पहले मिली अपार जन समर्थन वाली अपनी मूल जमापूंजी को ही गंवाती दिख रही है. दिल्ली नगर निगम के चुनाव से पहले आप पार्टी के सारे नेता सीना तान के कह रहे थे कि ‘यह चुनाव अरविन्द केजरीवाल के दो साल के कामकाज पर जनमत संग्रह है.’ चुनाव में मिली करारी हार के बाद वही नेता मुंह छुपाते फिर रहे हैं और अब कह रहे हैं कि इस परिणाम को जनता का हमारी पार्टी को दिया गया जनमत संग्रह नहीं कह सकते हैं.’ वो बहाने भी बना रहे हैं कि ‘शीला दीक्षित भी एमसीडी में 2 बार हारीं लेकिन चुनाव में जीतती रहीं.’ लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को जनता द्वारा जनमत संग्रह के द्वारा कभी भी बर्खास्त करने का अधिकार देने की पुरजोर वकालत करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कभी ‘राईट टू रिकॉल’ का शगूफा छोड़ते थे. दिल्ली के तीनों निगमों में बुरी तरह से चुनाव हारने बाद अब इस मुद्दे पर अरविन्द केजरीवाल की बोलती बंद हो गई है. अब वो और उनकी पार्टी के दूसरे नेता बोल रहे हैं तो सिर्फ ईवीएम के खिलाफ. सोशल मीडिया पर मसखरी हो रही है कि बेचारी ईवीएम ने भी अपनी बेइज़्ज़ती का बदला ले ही लिया. आप पार्टी द्वारा चुनाव आयोग, ईवीएम और भारतीय लोकतंत्र को बार बार चुनौती देना ही उसकी बुरी पराजय का मूल कारण बना है.

आम आदमी पार्टी की सरकार ने पिछले दो साल में दिल्ली में शिक्षा, बिजली, पानी और चिकित्सा आदि जैसे क्षेत्रों में बेशक अच्छा कार्य किया है, किन्तु दूसरे राज्यों में जल्द से जल्द पैर पसारने की महत्वाकांक्षा ही उसे ले डूबी है. केजरीवाल और उनके मंत्री पिछले कई माह से दिल्ली की तरफ ध्यान न देकर कभी गोवा तो कभी पंजाब भागते रहे. दिल्ली की जनता को ये पसंद नहीं आया. उसका गुस्सा तभी नजर आ गया था, जब नगर निगम चुनाव से कुछ हफ्ते पहले हुए दिल्ली की रजौरी विधानसभा सीट के उपचुनाव में आम आदमी पार्टी की इतनी बुरी पराजय हुई थी कि उसके प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई थी. उसकी वजह थी कि भ्रष्ट व्यवस्था को बदलने के लिये राजनीति में प्रवेश करने वाले आप पार्टी के नेता जब उसी भ्रष्ट व्यवस्था का खुद ही पालनहार बनने लगे तो जनता ने उन्हें नकार दिया. जनता को कभी आप पार्टी के जो नेता भ्रष्ट व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करने वाले क्रांतिकरी नजर आते थे, आज वही अराजक और भ्रष्टाचारी नजर आ रहे हैं. आप पार्टी के दिनोंदिन बढ़ते पतन की यह एक सबसे बड़ी वजह है. पिछले एक दशक से दिल्ली के कई क्षेत्रों में फैली गंदगी और तीनों निगमों में ब्याप्त भ्रष्टाचार और लूट की बात किसी से छिपी हुई नहीं है, सारे दिल्लीवासी इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं. दिल्ली नगर निगम के बारे में कभी हाइकोर्ट ने भी बहुत कटु टिप्पणी की थी कि एमसीडी दुनिया की सबसे भ्रष्ट संस्था है.

यह जानने के वावजूद भी दिल्ली की जनता द्वारा तीनों निगमों की बागडोर फिर भाजपा के हाथों में सौपना ‘मोदी मैजिक’ ही कहा जाएगा. यह दिल्ली में केजरीवाल का जादू कम होने और ‘मोदी लहर’ देशभर मे बरकरार रहने का सूचक भी है. चुनाव से कुछ माह पहले नगर निगम कर्मियों ने वक़्त पर वेतन ना मिलने के कारण न सिर्फ काम करना बंद कर दिया था, बल्कि गुस्से के मारे उल्टे सारा कूड़ा करकट उठाकर सड़कों पर फेंक दिया था. सोशल मीडिया में इसी बात को लेकर मनोज नाम के एक सज्जन ने बीजेपी के चुनाव जीतने पर क्या खूब व्यंग्य कसा है, ”कूड़ा भाजपा ने किया और झाड़ू आप पर चल गई.” अब पीएम मोदी को खुद दिल्ली के विकास और नगर निगम में व्याप्त लूट व् भ्रष्टाचार ख़त्म करने की और ध्यान देना होगा, क्योंकि अब उनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर लग चुकी है और दिन पर दिन नजदीक आते 2019 के लोकसभा चुनाव का भी उन्हें सामना करना है. दिल्ली को सुन्दर-साफसुथरा बनाने तथा सभी मूलभूत सुविधाओं को आम जनता तक पहुंचाने में केंद्र सरकार, राज्य सरकार व दिल्ली नगर निगम तीनों एक साथ लगें. ये इस वक्त की जरुरत है और इसी में सबका हित भी है. ये अच्छी बात है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उलजुलूल बोलने वाले अपने स्वभाव के विपरीत खुद को बदलते हुए कहा है कि “मैं भाजपा को तीनों निगमों में जीत की बधाई देता हूं. मेरी सरकार एमसीडी के साथ मिलकर दिल्ली की बेहतरी के लिए काम करेगी.” ऐसा करने में ही अब उनकी भलाई भी निहित है. जयहिंद.

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106.
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