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मोदी जी आम जनता के लिए अभी भी आशा की किरण हैं

Posted On: 17 Aug, 2015 Others में

सद्गुरुजीआदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

sadguruji

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मोदी जी आम जनता के लिए अभी भी आशा की किरण
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क्रीम कलर का कुर्ता, सफेद पायजामा, क्रीम कलर की सिल्क-कॉटन मिक्स जैकेट और सिर पर साफा पहने हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ६९वे स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दूसरी बार लाल किले की प्राचीर से देश से रू-ब-रू हुए। आतंकियों के खौफ से बेपरवाह पीएम ने बुलेटप्रूफ शीशे के बिना ८६ मिनट १० सेकंड तक स्पीच देकर नेहरू जी के १९४७ में दिए गए ७२ मिनट के सबसे लंबे स्पीच का रिकॉर्ड तोड़ दिया। प्रधानमंत्री जी बहुत फिट और कॉन्फिडेंट (आश्वस्त) दिखे। प्रधानमंत्री जी की अच्छी फिटनेस का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि बुढ़ापे में भी वो सीढ़ी चढ़कर ही तिरंगा फहराने लाल किले की प्राचीर तक गए। जबकि उनके पहले के अधिकतर पीएम लाल किले की प्राचीर तक पहुँचने के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल करते थे। मोदी जी ने पूरे भाषण के दौरान अपनी हथेली लोगों की तरफ कर अनेको बार खोला। बॉडी लैंग्वेज एक्सपर्टस के अनुसार ये उनके पूरी तरह से कॉन्फिडेंट होने का संकेत है और इस बात का सूचक भी है कि उनके मन में जो कुछ था, वही उनकी जुबां पर भी थी। ये एक विशेष बात थी, जो बहुतों ने महसूस की होगी।
लाल किले की प्राचीर से मोदी जी के ८६ मिनट १० सेकंड तक दिए गए विस्तृत एवं रिकार्ड तोड़ भाषण की बात करें तो राजनितिक विशेषज्ञों के अनुसार वो बेहद असरदार रही। पिछले साल की तरहं ही इस बार भी लोगों को उनसे बहुत ज्यादा उम्मीदें थीं। परन्तु इस बार पीएम ने नई योजनाओं के एलान कम किए और पिछले साल की गई योजनाओं और वादों की घोषणा पर ही देर तक चर्चा करते रहे। आश्चर्य की बात ये रही कि मोदी जी अपने भाषण में नागा संधि और बंगलादेश संधि के सफल क्रियान्वयन की की कोई चर्चा ही नहीं किये, जो उनकी सरकार की पिछले एक वर्ष के दौरान प्राप्त हुई बहुत बड़ी उपलब्धियां है। वो कई योजनाओं के सफल क्रियान्वयन पर अपनी सरकार की पीठ ठोकते रहे और पिछले साल किये गए कई वादों पर अबतक कोई अमल न कर पाने पर सफाई देते रहे। मोदी जी ने इस बार जो चार बड़े एलान किये, उसमे स्टार्ट अप इंडिया-स्टैंड अप इंडिया की शुरुआत करना, कृषि मंत्रालय का नाम बदलकर कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय करना, एक हजार दिनों में १८५०० गांवों तक बिजली पहुंचाने का एलान करना और २०२२ तक दलित, आदिवासी, महिलाएं और युवाओं के हाथ मजबूत करने का संकल्प लेना आदि मुख्य रहे।
प्रधानमंत्री जी ने लाल किले से स्टार्ट अप इंडिया-स्टैंड अप इंडिया नामक योजना की शुरुआत करने की घोषणा की है, जिसके तहत दलित, आदिवासी और महिलाओं को अपना स्वरोजगार शुरू करने में बैंकों द्वारा मदद दी जाएगी। देश के कई अर्थशास्त्रियों का विचार हैं कि योजना तो अच्छी है, परन्तु यह बैंकों का बोझ बढ़ाने वाली योजना है। पब्लिक वेलफेयर स्‍कीम्‍स चलाने में सरकारी बैंकों की रूचि कम हो रही है, क्योंकि उसमे प्रॉफिट कम है और दिक्क्तें भी ज्यादा हैं। प्रधानमंत्री जी की अन्य घोषणाओं जैसे, १००० दिनों में सभी घरों में बिजली पहुंचाने और छोटी-मोटी नौकरियों में इंटरव्यू खत्म करने को भी अर्थशास्त्री व्यवहारिक नहीं मानते हैं। मोदी जी के भाषण पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ जो भी राय दें, परन्तु ये सच है कि मोदी जी की लंबी स्पीच को देशवासियों ने ध्यान से सुना और उनका भाषण काफी पसंद भी किया गया। निसंदेह वो अभी भी आम जनता के लिए आशा की किरण बने हुए हैं और उनके सपनो को पूरा करने का भरोसा दिलाने वाले सुपरमैन भी हैं। किन्तु यह भी सत्य है कि १५ अगस्त को बहुत से लोग प्रधानमंत्री जी से निराश भी हुए हैं।
देश के २५ लाख से ज्यादा रिटायर्ड फौजी ‘वन रैंक-वन पेंशन’ योजना को लागू करने के एलान की उम्मीद पाले हुए थे, वो बेहद निराश हुए। ‘वन रैंक-वन पेंशन’ योजना को लागू करने के मुद्दे पर मोदी जी रिटायर्ड सैनिकों को पिछले साल की तरह इस बार भी सिर्फ दिलासा ही दिए। मेरे विचार से ये बहुत दुखद है कि पूर्व सैनिकों को इसके लिए जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है। ‘वन रैंक-वन पेंशन’ योजना को अब तक लागू न कर पाना मोदी सरकार की एक बहुत बड़ी लापरवाही और असफलता मानी जाएगी। देश की सरहद की हिफाजत करने वाले और देश की रक्षा के लिए अपनी जान गंवाने वाले सैनिकों को क्या यह छोटी सी ख़ुशी भी हम नहीं दे सकते हैं। इसे लागू करने से हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत मामूली बोझ पडेगा, जिसे किसी अन्य मद से एडजस्ट किया जा सकता है। रक्षामंत्री जी के द्वारा बार बार इसे लागू करने का आश्वासन दिए जाने के वावजूद भी इस मुद्दे को वित्तीय रूप से अब तक हल न कर पाने के लिए वित्तमंत्री अरुण जेटली जी नकारा और अयोग्य ही साबित हुए हैं।
लाल किले से पाकिस्तान और आतंकवादियों के खिलाफ मोदी जी का कुछ न बोलना भी लोंगो को बहुत अखरा है, खासकर सैनिकों को। घाटी में आये दिन होने वाले आतंकवादी हमलों में हमारे देश के जवान-अफसर और आम नागरिक शहीद हो रहे हैं, फिर भी आप चुप्पी साधे हुए हैं? हम क्यों अपना इतना नुकसान सहकर विश्व के सामने अच्छा बनने की कोशिश कर रहे हैं? यदि इस मुद्दे पर चुप ही रह के कुछ करना है तो पाकिस्तान को और उसके द्वारा भेजे जाने वाले आतंकियों को ऐसा सबक सिखाओ कि ये लोग बार बार हिन्दुस्तान पर हमला करना छोड़ दें और आईएस जैसे आतंकवादी संगठन की हमारे देश में कदम रखने की हिम्मत न पड़े। अंत में एक यादगार लम्हे का जिक्र करूंगा। आजादी की ६८वीं सालगिरह पर शनिवार को लाल किले से स्पीच देने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एक बार फिर प्रोटोकॉल तोड़ कर बच्‍चों से मुलाकात किये। बच्चों से घिरे हँसते मुस्कुराते हुए मोदी जी बहुत अच्छे लगे। बच्‍चों में उनके करीब जाने की ऐसी होड़ लगी कि मोदी जी का बैलेंस बिगड़ गया और वो लड़खड़ाते हुए अपनी कार से जा टकराये। यहाँ पर उनकी सुरक्षा व्यवस्था में कमी साफ़ नजर आई। जय हिन्द। जय भारत। वन्दे मातरम्।
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प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- २२११०६)
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