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स्वस्थ रखने के लिए अमृत- एलोविरा, आंवला और नोनी

Posted On: 17 Jul, 2014 Others में

सद्गुरुजीआदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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स्वस्थ रखने के लिए अमृत-एलोविरा,आंवला और नोनी

एलोविरा के बारे में जानकारी=भारत में प्राचीनकल से ही एलोविरा का उपयोग अौषधि के रूप में हो रहा है. भारत में इसे ग्वारपाठा या घृतकुमारी के नाम से जाना जाता है. हमारे देश में इसकी लगभग २०० प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमे से पांच ही अौषधि के रूप में प्रयोग की जाती हैं, जबकि पुरे विश्व में एलोविरा की ५०० प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमे से सिर्फ ३५ प्रजातिया ही मनुष्य के उपयोग के लिए लाभप्रद पाई गईंं हैं. सबसे ज्यादा गुणकारी प्रजाति का नाम बारना डेंसीस है. कांटेदार पत्तियों वाले इस पौधे में रोग निवारण की इतनी अदभुद क्षमता है कि इसे संजीवनी बूटी कहा गया है.

आजकल इस अौषधि का प्रयोग बवासीर, डायबिटीज, गर्भाशय के रोग, पेट की खराबी, जोड़ों का दर्द, त्वचा की खराबी, मुंहासे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी त्वचा, झुर्रियों, चेहरे के दाग-धब्बों, आंखों के काले घेरों, फटी एड़‍ियों के लिए, खून की कमी को दूर करने के लिए तथा शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए बड़ी सफलतापूर्वक किया जा रहा है. एलोविरा में १८ धातु, १५ एमीनो एसिड और १२ विटामिन मौजूद होते हैं. प्राकृतिक रूप से कुछ ठंडी तासीर वाले और बेहद पौष्टिक एलोविरा की काँटेदार पत्तियों को छीलकर एवं काटकर इसका रस निकाला जाता है.

इसे सुबह खाली पेट शीशे के गिलास में ३० एमएल की मात्रा में १२० एमएल हल्के गर्म पानी में मिलाकर लेने से शरीर के सभी रोग तो दूर होते ही है, इसके साथ ही दिन-भर शरीर में शक्ति व चुस्ती-स्फूर्ति बनी रहती है. एलोविरा में एंटी बैक्टेरिया और एंटी फंगल गुण के कारण जलने पर, अंग कहीं से कटने पर या शरीर की अंदरूनी चोटों पर प्रयोग करने से घाव को जल्दी भरता है. इसका गूदा या जैल बालों की जड़ों में लगाने से बाल काले, घने-लम्बे और मजबूत हो जाते हैं. इसे फटी एड़ियों पर, घमौरी, फुंसियों या रूखी-सूखी त्वचा पर लगाने से बहुत जल्दी फायदा करता है. मच्छरों से बचाव के लिए भी लोग एलोविरा जैल हाथ-पैरों पर लगाकर सोते हैं. बहुत से लोग बालों को झड़ने से रोकने के लिए और बाल काले घने करने के लिए एलोविरा जैल बालों में लगाते हैं. एलोविरा जैल चेहरे पर लगाकर बहुत से लोग सेविंग भी करते हैं. एलोविरा जेल लगाने से खुजली दूर होती है. चेहरे पर प्रयोग करने से उम्र बढ़ने के साथ साथ या तनाव के कारण आँखों के नीचे बनने वाले काले घेरों को भी ये दूर कर देता है.

महिलाओं को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि मासिक धर्म के समय, गर्भवती हो जाने पर और बच्चे को अपना दूध पिलाने की अवधि तक एलोविरा जूस का सेवन नहीं करना चाहिए. इन सब स्थितियों में एलोविरा का जूस पीना महिलाओं के लिए नुकसानदेह माना गया है. बहुत से लोग अपने घर में गमले में लगाकर इसका प्रयोग कर रहे हैं. ऐसा कर सकते हैं, परन्तु मेरे विचार से किसी अच्छी कम्पनी का एलोविरा जूस और एलोविरा जेल जैल लेकर प्रयोग करना पूर्णत: सुरक्षित और ज्यादा फायदेमंद है. आजकल बाजार में एक तरफ जहाँ पीने के लिए अच्छी से अच्छी कम्पनियों का एलोविरा जूस उपलब्ध है, वहीँ दूसरी तरफ सौन्दर्य निखार के लिए एलोविरा जैल हर्बल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट के रूप में बाजार में बॉडी लोशन, हेयर जैल, स्किन जैल, शैंपू, साबुन, फेशियल फोम, और ब्यूटी क्रीम आदि के रूप में उपलब्ध है.

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आंवला के बारे में जानकारी=हिन्दू मान्यताओं के अनुसार आंवला का फल ही नहीं बल्कि पेड़ भी पूज्यनीय है. भगवान विष्णु का पसंदीदा फल आंवला माना जाता है, इसीलिए ऐसी मान्यता है कि इसकी छांव में बैठकर बनाने खाने से अनेक रोग दूर हो जाते हैं. कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को महिलाएं आंवले के पेड़ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर पुत्र रत्न प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती हैं. इस दिन को आंवला नवमी या अक्षय नवमी भी कहा जाता जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था. आंवले के अदभुद अौषधीय गुणोँ के कारण ही कहा गया है कि आंवले के वृक्ष में समस्त देवी-देवताओं का निवास होता है.

आंवले के आयुर्वेदिक महत्व को दर्शाने के लिए कहा जाता है कि इसके फल और पेड़ की पूजा करने से व्यक्ति के समस्त पापों और रोंगो का नाश होता है. आंवला को संस्कृत में आमलकी कहा जाता है. आंवला में बिटामिन सी प्रचुर मात्र में उपलब्ध होती है. आंवला के १०० ग्राम रस में ९२१ मि.ग्रा. और गूदे में ७२० मि.ग्रा. विटामिन सी पाया जाता है. यह बहुत ठंडी तासीर वाला है, परन्तु इसमें मौजूद विटामिन सी किसी भी ऋतु में और सुखाने या उबालने पर भी नष्ट नहीं होता है. ये सदाबहार फल आयुर्वेद में त्रिफला यानि हरड़-बहेड़ा और आंवला के रूप में ठीक उसी तरह से मशहूर है जैसे देवताओं में त्रिदेव यानि ब्रह्मा-विष्णु-महेश आदि प्रसिद्द हैं. सभी ऋतुओं में आंवले का प्रयोग रस, चटनी, मुरब्बा, अचार, चूर्ण, अवलेह आदि के रूप में किया जा सकता है. आंवले का सेवन कैसे भी करें, वो फलदायी है. किन्तु जो लोग सर्दी जुकाम से हमेशा पीड़ित रहते हैं, उन्हें आंवले के जूस का सेवन अल्पमात्रा में और गर्म पानी में मिलाकर करना चाहिए.

आंवला रस का प्रयोग एलोविरा के साथ किया जाता हो तो इसका प्रभाव और गुण और बढ़ जाता है. रोजाना सुबह खाली पेट १५ एमएल एलोविरा रस और १५ एमएल आंवला रस १२० एमएल हल्के गर्म पानी में मिलाकर लेने से रोजाना पेट साफ रहता है कब्ज नहीं होती है और एसीडिटी जड़ से खत्म हो जाती है. जिन्हे सर्दी जुखाम की समस्या हमेशा रहती हो वो सिर्फ ५ एमएल आंवले के रस का प्रयोग २० एमएल गर्म पानी में मिलाकर करें. आंवला का सेवन प्रतिदिन करने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ती ही है, इसके साथ ही किडनी, त्वचा और बालों को भी बहुत लाभ पहुँचता है. नेत्र ज्योति बढ़ाने के साथ-साथ आंवला दाह, पाण्डु, रक्तपित्त, अरुचि, त्रिदोष, दमा, खांसी, श्वास रोग, कब्ज, क्षय, छाती के रोग, हृदय रोग, मूत्र विकार आदि अनेक रोगों को नष्ट करने की चमत्कारी अौषधीय शक्ति से भरपूर है.

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नोनी फल के बारे में जानकारी=अपने अदभुद अौषधीय गुणों के लिए प्रसिद्द नोनी एक पौधे का फल है, जो इस समय सारी दुनिया में शरीर के लगभग सभी रोगों का नाश करने के लिए एक बहुत चमत्कारी फल माना जा रहा है. कुछ गर्म तासीर वाले इस फल में दस तरह के विटामिन, खनिज पदार्थ, प्रोटीन, फोलिक एसिड सहित १६० पोषक तत्व हैं. मानव स्वास्थ्य के लिए प्रकृति के इस अनमोल देन की खेती तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, गुजरात, अंडमान निकोबार, मध्यप्रदेश आदि नौ राज्यों के समुद्र तटीय इलाकों में कई सालोँ से बहुत सफलतापूर्वक की जा रही है. बहुत ज्यादा मांग के कारण नोनी की खेती कर रहे किसानो को काफी फायदा हुआ है.

नोनी फल मधुमेह, अस्थमा, गठिया, दिल के मरीजों सहित कई बीमारियों के इलाज में ‘संजीवनी बूटी’ साबित हुई है. नोनी में मौजूद पोषक तत्व उच्च रक्तचाप, हृदय, मधुमेह, गठिया, सर्दी जुकाम सहित अनेक बीमारियों में औषधि के रूप में काम आ रहे है. यह फल एंटी ऑक्सिडेंट है यानि की शरीर के विष को बाहर निकालता है. नोनी फल पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि इस फल का सेवन यदि जूस या गोली के रूप में नियमित रूप से किया जाए तो कैंसर नहीं होगा. अब तो नोनी फल से कैंसर व लाइलाज एड्स जैसी खतरनाक बीमारियों का भी सफलतापूर्वक इलाज हो रहा है. नोनी जूस का सेवन शीशे के गिलास में ५ से १५ एमएल की मात्रा में लेकर उसमे २० से ६० एमएल हल्का गर्म पानी मिलाकर भोजन से आधा घंटा पूर्व सुबह-शाम करना चाहिए.

नोनी के बारे में एक मेरा निंजी अनुभव है कि यदि पेट में बहुत ज्यादा गैस बन रही हो तो १५ एमएल नोनी ६० एमएल गर्म पानी में मिलाकर कहीं भी बैठकर चाय की तरह घूंट घूंट करके धीरे धीरे पियें. आपको पांच दस मिनट में ही गैस से आराम मिल जाएगा. जीवन में हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पानी, चाय, कॉफ़ी अथवा एलोविरा, आंवला, नोनी या अन्य कोई भी जूस कभी भूल से भी खड़े होकर और एक घूंट में मत पीजिये. जमीन पर अथवा कुर्सी पर बैठकर जो कुछ भी आप चबाकर खाते हैं या घूंट घूँटकर धीरे धीरे पीतें हैं, वो चमत्कारिक रूप से शरीर को बहुत अधिक फायदा करता है.

एक नए रिसर्च के मुताबिक इंदौर, मुंबई, बेंगलुर, हैदराबाद, चेन्नई सहित कई मेट्रो शहरों में बहुत से एड्स और कैंसर से पीड़ित मरीजों को नियमित रूप से नोनी जूस पिलाने पर आश्चर्यजनक रूप,से फायदा दिखाई दिया. जो मरीज मृत्यु के करीब थे, उन सबके स्वास्थ्य में सुधार हुआ और उनकी आयु भी बढ़ गई. वैज्ञानिकों को पूरी उम्मीद है कि नोनी फल के सहारे निकट भविष्य में जल्दी ही एक ऐसी अौषधि तैयार कर ली जाएगी, जो एड्स व कैंसर जैसी खतरनाक बिमारियों को पूरी तरह से ठीक कर सकेगी. सारी दुनिया में नोनी फल पर हो रहे रिसर्च को ध्यान में रखकर ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने अपने कृषि स्नातक पाठ्यक्रम में पिछले कई साल से नोनी को शामिल कर लिया है.

इस पोस्ट में एलोविरा, आंवला और नोनी के अौषधीय गुणों से परिचय कराने के उद्देश्य से इनके बारे में संक्षिप्त रूप से आवश्यक जानकारी दी गई है, परन्तु पाठकों से विनम्र निवेदन है कि हर एक मनुष्य के शरीर में कफ, वात, पित्त और रोग व निरोग आदि की स्थिति भिन्न भिन्न होती है, अतः इनका सेवन करने से पहले किसी अच्छे वैद्य या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें. एक बात का और विशेष ध्यान रखें कि स्टील का गिलास रासायनिक रिएक्शन के कारण एलोविरा, आंवला और नोनी के प्राकृतिक ओषधीय गुणों में कमी लाता है, इसलिए एलोविरा, आंवला और नोनी का जूस पीने के लिए हमेशा शीशे के गिलास का ही प्रयोग करें.
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आलेख और प्रस्तुति=सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी,प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम,ग्राम-घमहापुर,पोस्ट-कन्द्वा,जिला-वाराणसी.पिन-२२११०६.
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