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रे मन तू क्यों उदास है.....

Posted On: 29 May, 2012 Others में

ReEvaluation“आँख जब खुले तभी सबेरा होता है कोई रौशनी की उम्र नहीं पूछता दूर जब अँधेरा होता है”

sadhna srivastava

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रे मन, तू क्यों उदास है
क्यों ये टूटी हुई आस है…
उम्मीद न रख तू किसी और से
सब कुछ तो तेरे पास है…
रे मन तू क्यों उदास है!!

किसी में सामर्थ्य नहीं
जो तुझे कुछ दे सके…
हर इंसान तो इंसान मात्र है..
फिर भी तू उदास है!!

बंद कर तू अपनी
इच्छाओं का पिटारा
इस जीवन में सब कुछ
सिर्फ एक आभास है….
रे मन तू क्यों उदास है!!

न रुकता यहाँ सुख
न दुःख का निवास है
ये वक़्त भी बदल जायेगा….
बस आत्मविश्वास ही तेरे पास है….
रे मन तू क्यों उदास है!!!!

alone

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