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College Bunk.....

Posted On: 27 Apr, 2012 Others में

ReEvaluation“आँख जब खुले तभी सबेरा होता है कोई रौशनी की उम्र नहीं पूछता दूर जब अँधेरा होता है”

sadhna srivastava

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कितने अच्छे थे कॉलेज के दिन…. शायद बीता हुआ वक़्त हमेशा अच्छा लगता है! मुझे आज भी याद है अपना वो mass bunk जो पूरे 1st year के students ने किया था लेकिन बाद में……….. !!

हमारा ragging period बस खत्म ही हुआ था की हमारे sessional exams होने लगे! मैं हमेशा से introvert थी! ज्यादा लोगो में घुलना मिलना पसंद नहीं था या ये कहूं की संकोच करती थी! अभी तक किसी से दोस्ती नहीं हुई थी बस कॉलेज से हॉस्टल और हॉस्टल से कॉलेज….यही तक मेरी ज़िन्दगी सीमित थी! हम लोगो का mechanical का टेस्ट होना था! Asusual मैं अपनी सारी तैयारी करके सोने जा रही थी…. तभी मेरे पास एक लड़की आई… बोली उस रूम में चलो कुछ बात करनी है…. (मैं अपनी एक senior के साथ रहती थी तो उनके सामने बंक की बात लीक नहीं कर सकते थे 🙂 मुझे उस वक़्त तक कुछ नहीं पता था ! ) मैं गयी दूसरे कमरे में… कुछ लड़कियां बैठी थी वहां…. उनमे से एक ने कहा साधना हम लोग कल का टेस्ट बंक करने का प्लान कर रहे हैं…. उसने पूरा प्लान समझाया मुझे… मैंने कहा ठीक है पिताजी से पूछ कर बताती हूँ…. मैंने अपने घर में फ़ोन किया सारी कहानी पिताजी को बताई….. उन्होंने कहा ठीक है….. बस सबके साथ रहना !! अब टेस्ट वाले दिन पूरा 1st इयर सुबह ही तैयार हो गया girl ‘s हॉस्टल और boy ‘s हॉस्टल दोनों में…. लड़कियां तो main gate से ही निकली लेकिन लड़के कॉलेज की biulding कूद कर गए! अब इतने सारे बच्चो को एक साथ कॉलेज के बाहर जाता देख कर किसी को भी शक हो जाता! खुली हवा में सभी आज़ाद परिंदों की तरह महसूस कर रहे थे और उत्साह तो इतना था की काफी दूर तक सब पैदल ही चले गए!! finally हमे एक बस मिली…. हम सब atta market पहुंचे…. अब सुबह 8 बजे तो कोई आने वाला नहीं वहा हमारा स्वागत करने के लिए….. सारे malls बंद थे…. सारे restaurants बंद थे…. कोई नज़र नहीं आ रहा था वहा…. हम सारे Mc donald ‘s के सामने खड़े हो गए…..करीब 9 :30 बजे Mc donald ‘s खुला लेकिन अभी हमे अन्दर जाने की इजाज़त नहीं थी…. उसकी सफाई हो रही थी…. इतनी भीड़ देख कर उसका मेनेजर थोडा घबरा गया और हम सबको वहां से जाने को बोलने लगा…. हम सब करीब 250 थे…… 🙂

फिर हम लोगो ने कोई दूसरी शरण तलाशनी शुरू की…. इस वक़्त तक काफी atta market खुल चुका था…. सब अपनी अपनी पसंद के हिसाब से सेट हो चुके थे…. कोई मूवी हॉल चला गया कोई कुछ खाने पीने चला गया… तो कोई shopping करने लगा…. पूरा दिन इसी तरह मस्ती करते हुए गुजार दिया! अब 6 बजे से पहले कॉलेज वापस पहुंचना था क्योंकि लडकिया सिर्फ 6 बजे तक ही बाहर रह सकती थी…. (अब कॉलेज के रूल्स याद आये थे 🙂 ) सारे वापस आये….. जैसे जैसे कॉलेज पास आ रहा था घबराहट बढ़ रही थी… अब क्या होगा… भगवान् ही बचाए अब तो…. लेकिन भगवान् क्यों बचाएगा गलती की है तो सजा तो भुगतनी ही पड़ेगी….. 🙂 कॉलेज gate पे सबको रोक लिया गया…. अब तो दिल जोर जोर से धड़क रहा था….. (उस वक़्त ये भूल गयी थी की मम्मी पापा के permission के बाद गयी थी… ) कॉलेज के director sir आये…. कुछ नहीं बोले…. सबको अन्दर जाने दिया गया…. लड़कियों को उनके हॉस्टल के बाहर और लडको को उनके हॉस्टल के बाहर रोक दिया गया…. हॉस्टल वार्डेन, कॉलेज director , chairman सर…कई teachers .. कौन नहीं था वहा…. एक ने पूछा किसके कहने पे किया तुम सब ने ये…. सारे चुप….. chairman सर मुझे जानते थे पहले से…. बुलाया अपने पास… पूछते हैं…. साधना बताइए आप…. मैंने कहा सर पता नहीं…. (Obviously i was not going to take anyone ‘s name 🙂 )… फिर उस लड़की से पूछा जिसने पूरा प्लान मुझे बताया था…. वो वाराणसी की है…. उससे कहते हैं की बनारस के लोग तो नेता नगरी में बहुत आगे रहते हैं…. आपका काम है ये..? उससे बहुत innocently कहा ‘नहीं sir ‘…. मुझे थोड़ी हसी आई…. फिर कई बार पूछा उन्होंने पर किसी ने कुछ नहीं बताया…. हम लोगो को डांट डपट कर …. थोड़ी धमकी देकर वापस हॉस्टल जाने दिया गया….. लेकिन लडको को रात भर बाहर ही रखा गया!! वो भी एक यादगार दिन बन गया और वो लड़की… बनारस वाली…. मेरी सबसे अच्छी दोस्त…. 🙂

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