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My Father .....

Posted On: 9 Apr, 2012 Others में

ReEvaluation“आँख जब खुले तभी सबेरा होता है कोई रौशनी की उम्र नहीं पूछता दूर जब अँधेरा होता है”

sadhna srivastava

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Dedicated to my Father…

मेरी ज़िन्दगी का वो पहला दिन,
जब मेरा जनम हुआ,
जब आपने मुझे गोद में लेकर मेरा माथा चूमा.
लेकिन मै रोने लगी, क्योंकि आपकी मूछे मुझे चुभ गयी,
धीरे धीरे मै बड़ी होने लगी!

आपका सिर्फ एक थप्पड़ मुझे याद है,
लेकिन उसके बाद आपका वो प्यार भी याद है,
भैया और राजू की लड़ाई में मुझसे गवाही लेना,
मुझे सबसे ज्यादा अच्छा लगता है,
कभी माँ की तरह परेशानियाँ पूछना,
भैया की तरह मार्गदर्शन करना,
राजू की तरह परेशान करना,
एक दोस्त की तरह बैठकर बाते करना.
और पिता की तरह जिम्मेदारियां निभाना…

मेरी छोटी सी सफलता पर आपका बहुत खुश होना,
हर रिजल्ट से पहले आपका उत्साह बढ़ाना,
और असफल होने पर भी उसको सफलता के नजरिये से दिखाना,
मुझे बहुत अच्छा लगता है!
कॉलेज आने पर आपका ट्रेन के साथ साथ चलना,
देर तक हाथ हिलाना,
मुझे बहुत अच्छा लगता है,इसीलिए मै सबसे ज्यादा भाग्यशाली हूँ,
क्योंकि आप मेरे पिता हैं……

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