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प्यार में क्या चाहती है स्त्री

Posted On: 16 Aug, 2012 Others में

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wishप्यार एक ऐसा खूबसूरत एहसास है, जो हर इंसान के दिल के किसी न किसी कोने में बसा होता है। इस एहसास के जागते ही कायनात में जैसे चारों ओर हजारों फूल खिल उठते हैं जिंदगी को जीने का नया बहाना मिल जाता है। स्त्री के जीवन में प्यार बहुत मायने रखता है। प्यार उसकी सांसों में फूलों की खुशबू की तरह रचा-बसा होता है, जिसे वह ताउम्र भूल नहीं पाती।


शायद जब इस संसार की रचना हुई होगी और धरती पर पहली बार आदम और हौवा ने धरती पर कदम रखा होगा, तभी से औरत ने आदमी के साथ मिलकर जिंदगी़ मुश्किलों से लडते हुए साथ मिलकर रहने की शुरुआत की होगी और वहीं से उसके जीवन में पहली बार प्यार का पहला अंकुर फूटा होगा। प्रेम एक ऐसी अबूझ पहेली है, जिसके रहस्य को जानने की कोशिश में जाने कितने प्रेमी दार्शनिक, कवि और कलाकार बन गए। एक बार प्रेम में डूबने के बाद व्यक्ति दोबारा उससे बाहर नहीं निकल पाता। स्त्रियों का प्रेम पुरुषों के लिए हमेशा से एक रहस्य रहा है। कोई स्त्री प्यार में क्या चाहती है, यह जान पाना किसी भी पुरुष के लिए बहुत मुश्किल और कई बार तो असंभव भी हो जाता है।


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व्यक्तित्व की जटिलता

शायद रहस्य को ढूंढने के उधेडबुन से परेशान होकर ही किसी विद्वान पुरुष ने संस्कृत के इस श्लोक की रचना की होगी- स्त्रियश्चरित्रं पुरुषस्य भाग्यं दैवो न जानाति कुतो मनुष्य:।

पुरुषों के बीच प्रचलित यह पुराना जुमला- प्रेम के मामले में औरत के ना का मतलब हां होता है, भी पुरुषों द्वारा स्त्री के व्यक्तित्व को न समझ पाने की व्यथा को ही दर्शाता है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर स्त्रियां के मन की थाह लेना पुरुषों के लिए इतना मुश्किल क्यों है? इस संबंध में मनोवैज्ञानिक डॉ. अशुम गुप्ता कहती हैं, दरअसल स्त्री का मनोविज्ञान कुछ ऐसा होता है कि वह अपनी भावनाओं का इजहार करने के प्रति अत्यधिक सचेत होती है। इसकी सबसे बडी वजह यह है कि भारतीय समाज बचपन से ही लडकियों की परवरिश इस तरह की जाती है कि वे अपने व्यवहार की छोटी-छोटी बातों को लेकर बहुत सतर्क रहती हैं। उन्हें बचपन से कम बोलना सिखाया जाता है। इस वजह से ज्यादातर लडकियां अंतर्मुखी और शर्मीली होती हैं और प्यार के मामले में भी वे स्वयं अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के बजाय वे इस बात की उम्मीद रखती हैं कि उनका ब्वॉय फ्रेंड या प्रेमी स्वयं उसकी भावनाएं समझने की कोशिश करे।


क्या कहता है स्त्री मनोविज्ञान

आई.टी. प्रोफेशनल गीतिका कहती हैं, इस आधुनिक युग में पढी-लिखी लडकियां भी प्रेम के मामले में अपने प्रेमी से ही इस बात की उम्मीद करती हैं कि पहले उनका प्रेमी उनके सामने अपने प्यार का इजहार करे। मैं और मेरे पति तरुण पिछले पांच वर्षो से अच्छे दोस्त थे और हमारी गहरी दोस्ती बहुत पहले प्यार में तब्दील हो चुकी थी, लेकिन मैं उस घडी का इंतजार कर रही थी कि कब वह अपने प्यार का इजहार करें क्योंकि मेरे लिए अपने दिल की बात कह पाना बहुत मुश्किल हो रहा था। कभी-कभी मुझे इस बात पर खीझ भी होती थी कि तरुण मुझे इतने करीब से जानता है, फिर भी वह मेरी भावनाओं को क्यों नहीं समझ पा रहा? अंतत: पहले उसी ने मेरे सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, तब जाकर हमारी शादी हुई। आज हमारी शादी को चार वर्ष हो चुके हैं और हम आज भी इस बात को याद करके बहुत हंसते हैं कि अगर तरुण ने मुझे प्रोपोज नहीं किया होता तो शायद तरुण के लिए मेरा प्यार मेरे दिल के किसी कोने में ही दबा रह जाता।


पसंद है केयरिंग और शेयरिंग

स्त्रियों को हमेशा से ऐसे पुरुष आकर्षित करते हैं, जो स्वयं शारीरिक और मानसिक रूप से इतने मजबूत और सक्षम हों कि वे उन्हें सामाजिक, भावनात्मक और आर्थिक तीनों स्तरों पर सुरक्षा दे सकें, उनकी जरूरतों का खयाल रखें। साथ ही वे दोस्ताना व्यवहार करने वाले खुशमिजाज इंसान हों, जिनके साथ वे बेतकल्लुफ हो कर अपने दिल की बातें शेयर कर सके। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.अंजना शर्मा कहती हैं, अकसर हम जिन्हें छोटी-छोटी बातें समझकर नजरअंदाज कर देते हैं वे हमारी जिंदगी़ की खुशियों को बरकरार रखने के लिए बहुत जरूरी होती हैं। उदाहरण के लिए हम पति-पत्नी दोनों ही डॉक्टर हैं।

हालांकि हमारे बच्चे अब बडे हो गए हैं, फिर भी हमारी जिंदगी़ काफी व्यस्त होती है। पारंपरिक भारतीय समाज में हमेशा पत्नी से ही उम्मीद की जाती है कि वह अपने पति की हर छोटी-छोटी जरूरतों का खयाल रखे, जैसे-पति ने खाना खाया या नहीं, उनके कपडे प्रेस हुए या नहीं, उनके मोबाइल का बिल जमा हुआ या नहीं। ऐसे में घर और बाहर की दोहरी जिम्मेदारियां साथ-साथ निभाते हुए पत्नी थक जाती है। अकसर मेरे साथ भी ऐसा ही होता है। ऐसी स्थिति में अगर कभी मेरे पति मुझसे सिर्फ इतना ही कह देते हैं कि, तुम थक गई होगी, रहने दो यह काम मैं खुद कर लूंगा, तो उनके द्वारा कही गई इस छोटी-सी बात से ही मेरी सारी थकान दूर हो जाती है और यह एहसास किसी किसी भी औरत के लिए बहुत मायने रखता है कि मैं जिससे प्यार करती हूं, उसे भी मेरी िफकर रहती है।


चाहती है अपना कोना

प्रेम या दांपत्य संबंधों के मामले में युवा पीढी की सोच में एक नया बदलाव नजर आ रहा है। आज की शिक्षित और आत्मनिर्भर युवा स्त्री को अपनी व्यक्तिगत आजादी इतनी पसंद है कि वह उसे किसी भी कीमत पर, यहां तक कि प्यार पाने के लिए भी खोना नहीं चाहती। पिछली पीढी की स्त्री की तरह वह प्यार में अपना सर्वस्व त्यागने को तैयार नहीं है। अब उसका स्वतंत्र व्यक्तित्व है, उसकी अपनी पसंद-नापसंद, रुचियां और इच्छाएं हैं। उसे अपनी पसंद का साथी चुनने की पूरी आजादी है। ऐसी स्थिति में उसके पास विकल्पों की कमी नहीं है। उसके पास अपने आप को बदलने की कोई वैसी मजबूरी भी नहीं है, जैसी कि उसकी पिछली पीढी की स्त्रियों की हुआ करती थी कि एक बार किसी पुरुष के साथ शादी या प्रेम के बंधन में बंध जाने के बाद उसके पास अपने साथी अनुरूप खुद को ढालने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं होता था। पर आज वक्त के साथ स्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसा नहीं है आधुनिक युवती अपनी शर्तो पर प्रेम करती है और अपने प्यार की खातिर खुद को बदलने के लिए जरा भी तैयार नहीं है।

आज भी प्रेम के प्रति उसका समर्पण कम नहीं हुआ है। फर्क सिर्फ इतना है कि आज उसकी जीवन स्थितियां उसके अपने नियंत्रण में हैं, वह जिससे प्यार करती है, उसके लिए वह कुछ भी करने को तैयार है लेकिन वह अपनी निजी स्वतंत्रता को बरकरार रखना चाहती है। इसलिए उसे प्रेम या दांपत्य संबंध के मामले में भी थोडे-से पर्सनल स्पेस की जरूरत महसूस होती है। वह जिससे प्यार करती है, उसका केयरिंग होना तो उसे अच्छा लगता है.


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