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पत्रकारों का ईमान

Posted On: 3 Jan, 2012 Others में

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SALMAN AHMED, salmanahmed70@yahoo.co.in

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पत्रकारों का ईमान खरीदने के मामले में पंजाब हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ खासी बदनाम रही है. खासकर हरियाणा में पत्रकारों ने मुख्यमंत्री के स्वैच्छिक कोटे से प्लाट यूं पाए हैं कि जैसे दशहरे के मेले से छोटे बच्चे लाल पन्नी वाली ऐनकें खरीद लाये हों. चंडीगढ़ में दस दस प्लाट लेकर बेच खाने पत्रकार भी हैं.

एक किस्सा है. ‘ट्रिब्यून’ के एक विशेष संवाददाता थे. भजन लाल मुख्यमंत्री. पत्रकार ने कहा पत्नी के लिए सरकारी नौकरी चाहिए. पत्नी चालीस साल के आसपास. सरकार ने कहा, नियम इजाज़त नहीं देते. बोला तो प्लाट ही दे दो. प्लाट मिल गया. तीन महीने हुए होंगे. बोला, पत्नी के लिए नौकरी चाहिए. सरकार ने फिर मजबूरी जताई. बताया कि पब्लिक सर्विस कमीशन से कह भी दें तो भी चालीस साल की उम्र एक बाधा है. नौकरी दे पाना संभव नहीं. वो बोला कोई बात नहीं. एक प्लाट उसके लिए भी दे दो. चुप हो जाएगी. सरकार ने एक प्लाट और दे दिया. तीन महीने बाद फिर वही नौकरी का राग. सरकार ने फिर मजबूरी समझाई. लेकिन वो भाई समझे तब न!

बोला, तो प्लाट ही दे दो. सरकार ने भी सोचा कि इसने तो आदत ही दाल ली. उसने हाथ खड़े कर दिए. पत्रकार गया हरियाणा में कहीं और सरकार के खिलाफ एक बड़ी खबर ढूंढ लाया. खबर छप भी गयी. सरकार चौकन्नी हुई. फिर बात चली. फिर एक प्लाट दांव पे लगा. फिर एक प्लाट ले लिया. तीन महीने भी नहीं बीते कि पत्रकार महोदय का फिर एक हरियाणा दौरा. फिर एक बड़ी खबर. जिसने चौथा प्लाट दिलाया था मुख्यमंत्री कोटे से उसने अब नाराजगी की वजह पूछी तो बोला नाराजगी कोई नहीं. उसने कहा सच बात ये है कि उसके एक साथी ने छ: प्लाट लिए हैं. सो उसे भी उतने चाहिए. अफसर ने पूछा, न मिले तो?..तो खबर ठुकती रहेगी, उसकी जवाब था. मुख्यमंत्री ने भी फैसला कर लिया. कहलवा दिया कि अब जितना जोर लगा सके, लगा ले वो. प्लाट तो अब और नहीं मिलेगा. प्लाट ही अकेला स्रोत नहीं रहा चंडीगढ़ में पत्रकारों की अमीरी का. कुछेक ने खदानों के ठेके तक लिए अर्जी फर्जी नामों से.

सरकारी मकान, मुफ्त बस यात्रा, सरकारी विश्रामगृहों में तकरीबन मुफ्त की आवास सुविधा, बच्चों के अच्छे स्कूलों में एडमीशन वगैरह आम बात रही. मेहमान वगैरह आ जाएँ तो उन्हें नज़दीक या दूरदराज़ घुमा लाने के लिए सरकारी गाड़ियां भी. पर अब खबर ये है कि जलवे उडीसा में भी कम नहीं रहे पत्रकारों के. इंडियन एक्सप्रेस ने ऐसे पत्रकारों के नाम छापे हैं. उन्हें मिले प्लाट के साइज़ समेत. क्लिक करिए और देखिये.

“प्लाट पाने वाले पत्रकारों की सूची”

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