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बौद्धिक निर्वात छोड़ गए स्टीफेन हॉकिंग।

Posted On: 15 Mar, 2018 Uncategorized में

Sandeep Sumanसमाज,शिक्षा और राजनीति पर निष्पक्ष और बेवाक दृष्टिकोण।

Sandeep Suman

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हुयामी व्यक्तित्व वाले स्टीफेन हॉकिंग दुनिया के उन चंद वैज्ञानिकों में थे, जिन्होंने बड़ी सरलता से अपनी बात आम लोगों तक पहुचाई जिस कारण वे समाज के हर क्षेत्र के लोगो के बीच अपनी पैठ बना पाए। उन्होंने कई असाधारण शोधकार्यो को अंजाम दिया। उन्होंने आइंस्टीन के सिद्धांत के सहारे स्पेस और टाइम के बारे में यह बतलाया की दुनिया की रचना एक बड़े ‘महाविस्फोट’ का परिणाम है, जिसे ‘बिगबैंग’ कहते है। जब वैज्ञानिक समुदाय ‘बिग बैंग’ परिघटना के स्थान को लेकर स्पष्ट और तर्कपूर्ण जवाब देने में असमर्थ हो रहे थे तब स्टीफेन हाकिंग ने ही आसान तरीके से दुनिया को समझाया कि की बिग बैंग केवल एक पदार्थ या ऊर्जा विस्फोट नहीं था, वल्कि उस दौर से ही समय और उसके आयामो की शुरुवात हुई, जिसका नाम दिया-सिगुलेरिटी। उन्हीने बताया कि विस्फोट में ही स्पेस और मैटेरियल दोनों समाये हुए थे। उन्होंने गणित के माध्यम से भी यह बताने का प्रयास किया कि इस घटना से ही पदार्थ, समय और ऊर्जा आदि चीजों की शुरुआत हुई।

     

   ” दुनिया के लिए पहेली बने ब्लैकहोल के सिद्धांत से भी उन्होंने परिचित कराया, उन्होंने बतलाया की जब सूर्य से कई गुणा बड़े तारों का महाविस्फोट होता है तो वे ब्लैक होल का निर्माण करता है, ब्लैक होल के भीतर ही तारे का सारा पदार्थ एक खास बिंदु पर समाहित होता है, वह अपने चारों ओर के स्पेस और टाइम को समेट लेता है। ”   
                        दुनिया के लिए पहेली बने ब्लैकहोल के सिद्धांत से भी उन्होंने परिचित कराया, उन्होंने बतलाया की जब सूर्य से कई गुणा बड़े तारों का महाविस्फोट होता है तो वे ब्लैक होल का निर्माण करता है, ब्लैक होल के भीतर ही तारे का सारा पदार्थ एक खास बिंदु पर समाहित होता है, वह अपने चारों ओर के स्पेस और टाइम को समेट लेता है। ब्लैक होल की अपनी एक सीमा होती है, जिसके भीतर समय का कोई अस्तित्व नहीं होता अर्थात वह समय थम सी जाती है। उन्होंने ब्लैकहोल और बिगबैंग के बीच समानता को भी उलेखित किया। उन्होंने बतलाया की यदि कोई वस्तु ब्लैक होल के भीतर चली जाए, तो उसे पुनः बहार आने में प्रकाश की गति प्राप्त करनी होगी जो की आम तौर पर असंभव है। इतना ही नाठी उन्होंने क्वांटम मैकेनिक और ब्राम्हाड को आपस में जोड़ने का भी प्रयास किया जिसमें वे कुछ हद तक संफल भी हुए।
”स्टीफेन हाकिंग ने अपने शोध कार्य के इतर कई किताबें भी लिखी थी। जिनमे 1988 में ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम’ जिसकी करोडो प्रतियां बिकी। उसके बाद ‘द यूनिवर्स इन ए नतशेल’, ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम’ और ‘द ग्रैंड डिजाइन’ आदि कई पुस्तके लिखी।”
           विज्ञान के दुनिया से इतर स्टीफेन सामाजिक सरोकार से भी जुड़े रहे, दुनिया भर में उन्होंने मानवता और समाज से जुड़े अनेक सरोकारों से जुड़े रहे थे। उन्होंने वियतनाम युद्ध के विरुद्ध अनके आंदोलनों में प्रदर्शनों में हिस्सा भी लिया। दुनियाभर में गरीबी, भुखमरी, बीमारी जैसी समस्याओं के सम्बन्ध में उन्होंने समाज को आगाह करते आए। उन्होंने हमेशा पर्यावरण को बचाने और जोड़ दिया, साथ ही साथ उन्होंने तेजी से बढ़ते आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के नकारात्मक प्रभाव के प्रति भी दुनिया को आगाह करते आए। उनका मानना था कि ये पूरी मानव सभ्यता के विनाश का कारक बन सकता है।
स्टीफेन हाकिंग ने अपने शोध कार्य के इतर कई किताबें भी लिखी थी। जिनमे 1988 में ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम’ जिसकी करोडो प्रतियां बिकी। उसके बाद ‘द यूनिवर्स इन ए नतशेल’, ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम’ और ‘द ग्रैंड डिजाइन’ आदि कई पुस्तके लिखी। स्टीफेन हाकिंग को उनके कार्य के लिए कई पुरस्कार भी मिले, जिनमे 1988 में वुल्फ फाउंडेशन प्राइज, 2006 में कॉपले मेडल और 2013 में फंडामेंटल फिजिक्स प्राइज, लगभग दुनिया की तमाम प्रतिष्टित पुरस्कारों से उन्हें नाबाजा गया, हालांकि उनके नोबल पुरस्कार नहीं मिला।
स्टीफेन हाकिंग पहली बार 1959 और दूसरी बार 2001 में भारत आये थे, तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायणन के साथ राष्ट्रपति भवन में मुलाकात के दौरान उन्होंने भारत के विकास और भारतीयों के गणित और भौतिकी की प्रतिभा की तारीफ की थी। मुम्बई स्थित टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च द्वारा स्थापित प्रथम सरोजनी दामोदर फेलोशिप सम्मान प्रदान किया गया था।
मोटर न्यूरॉन जैसे बीमारी से पीड़ित होते के वाबजूद उन्होंने अपनी इक्क्षाशक्ती से उन्होंने सभी कयासों को झुठलाते हुए कई शोध कार्य किए। उन्होंने अपने सिद्धांतों से संभावनाओं का वो द्वार खोला जिसकी कोशिश पूरी दुनिया दशकों से कर रही थी। स्टीफेन न सिर्फ महान वैज्ञानिक थे अपितु एक असाधारण व्यक्तित्व थे, जिन्हें उपचार के समय दो वर्ष जिन्दा रहने की बात की गई थी उन्होंने अपने इक्क्षाशक्ती से 55 वर्ष न केवल जीवित रह कर दिखया अपितु मानव सभ्यता को राह दिखा गए, उनके बौद्धिकता और मनोवृति के साथ साहस और दृढ़ता ने पूरी दुनिया को प्रेरित किया। उनके जाने के उपरांत जो बौद्धिक निर्वात उत्पन्न हुई है शायद ही उसे निकट भविष्य में पूरा किया जा सकेगा, वो मानव सभ्यता के अंत तक सभी के प्रेरणास्रोत रहेगे।
संदीप सुमन
sandeepsuman311@gmail.com

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