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लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील हो समाज।

Posted On: 25 Apr, 2018 Uncategorized में

Sandeep Sumanसमाज,शिक्षा और राजनीति पर निष्पक्ष और बेवाक दृष्टिकोण।

Sandeep Suman

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दिन प्रतिदिन बढ़ती महिलाओं के प्रति हिंसा और बलात्कार जैसी घटनाओं ने एक बार फिर भारतीय समाज को कटखरे में ला खड़ा कर दिया है। कठुआ-उन्नाव जैसी घटनाओं पर भले ही जितनी भी राजनीति हो किन्तु कटु सच्चाई ये है कि महिलाओं के साथ बलात्कार और बढ़ती हिंसा एक सामाजिक बीमारी है, जिसका जल्द ईलाज खोजने की दरकार है, वरना जल्द समाज का मूल ढांचा विकृत हो जायेगा। घटनाओ के बाद लोग मोमबतियां जलाने और दोषी को सजा की मांग को लेकर आंदोलन करने सड़को पर आ जाते है, किन्तु इसका स्थाई समाधान निकाला जाए इसको लेकर कोई सामने नहीं आता, ना हमारे नेता ना बुद्धिजीविवर्ग।
ऐसी घटनाओ को रोकने के लिए समाज के सोच में बदलाव लाना जरुरी है। महिलाओं के प्रति सामाजिक सोच ही ऐसी घटनाओँ को अंजाम देने में सबसे ज्यादा भूमिका अदा करती आई। उदहारणतः कल ही इंदौर में एक लड़की के साथ कुछ लड़कों ने इसलिए छेड़खानी की क्योंकि उसने स्कर्ट पहन रखा था। जब तक ऐसी विकृत सोच समाज में मौजूद रहेगी महिलाओं के प्रति अपराध में कमी आना नामुनकिन है।
महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों से लड़ने के लिए केवल कठोर कानून और सजा प्रयाप्त नहीं होंगे। हमारे परंपरा आधारित समाज में, महिलाओं का सम्मान और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए व्यवहार और सोच में बदलाव लाने की आवश्कता है। बच्चो को बचपन से ही महिलाओं का सम्मान करने के प्रति संवेदनशीलता बनाया जाना चाहिए। समाज में महिलाओँ का सम्मान करना भी उसी तरह सिखाया जाना चाहिए, जिस तरह से पुरुषों का सिखाया जाता है। लैंगिक समानता को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। स्कूली शिक्षकों और माता-पिता को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए की वे ना केवल नियमित व्यक्तित्व निर्माण और कौशल संवर्धन पर गौर करे बल्कि बच्चे के व्यवहार पर भी नजर रखे ताकि उसे लैंगिक आधार पर संवेदनशील बनाया जा सके।
शैक्षणिक संस्थाओं, सरकारी संस्थाओं, कर्मचारियों और सभी सम्बंधित लोगो को लैंगिक संवेदनशीलता और महिलाओं के सम्मान के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए कदम उठाना चाहिए। टीवी मीडिया और प्रेस के माध्यम से लैंगिक न्याय के प्रति जनता में संवेदनशीलता उत्पान करनी चाहिए।

संदीप सुमन
sandeepsuman311@gmail.com

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