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ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ रहा बाढ़ का खतरा

Posted On: 19 Aug, 2018 Uncategorized में

Sandeep Sumanसमाज,शिक्षा और राजनीति पर निष्पक्ष और बेवाक दृष्टिकोण।

Sandeep Suman

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अत्याधिक बारिश के वजह से केरल भयानक बाढ़ की चपेट में है। सेना,जल सेना, NDRF के अलावा पडोसी राज्यो की मानव शक्ति भी संकट के इस घड़ी में केरल की मदद में जुटी है। भूस्खलन हो रहे है, घर के अंदर पानी भर आया है, सैकड़ो की संख्या में लोग काल के गाल में समाहित हो चुके है। सवाल उठना लाजमी है कि आखिर क्यों इस तरह की विभीषिका के शिकार हो रहे है हम ? हम ऐसे आपदाओं के प्रति कितने सचेत है, विकास के नाम पर पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ भविष्य में और क्या संकट लेन वाली है और हम उसके प्रति कितने सचेत है ।
केरल में बाढ़ की विभीषिका हो या इससे पहले देश के अन्य हिस्सों में आयी बाढ़ और उससे हुए जान-माल का नुकसान हो, ये सब सरकारी विकास और जीडीपी ग्रोथ की अमानतें है। केरल की मौजूदा बाढ़ अप्रत्याशित है, इससे पहले वह पानी नहीं आया था। सवाल है कि बारिश के पानी से उत्पन्न हुए जलजमाव में शहर और एयरपोर्ट डुबने लगे। जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान में वृद्धि ने प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ा दी है।
यूरोपीय संघ के तहत दिसंबर,2016 में प्रकाशित एक अंतराष्ट्रीय शोध के मुताबिक, यदि वैश्विक तापमान में चार डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो जाती है, तो उन देशों में बाढ़ का खतरा 580 फीसदी बढ़ जाएगा, जहाँ दुनिया की 73 फीसदी आबादी रहती है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के 79 फीसदी हिस्से को भी इसका भारी नुकसान चुकाना पड़ सकता है। ‘नेचर कम्युनिकेशन’ के छपे ताजा शोध का कहना है कि बढ़ते तापमान के कारण होने वाली भारी बारिश से नादिया, बांधो, और अन्य जलाशयों में बहुत पानी भर जाएगा, जिसका नतीजा आचौक तेज बाढ़ और भुस्खलन होगा। जिसका उदहारण स्वरुप केरल सबके आज सबके समक्ष है।
विकास की अंधी दौड़ से मानव निर्मित ये आपदाएं अनहोनी को और भी विकराल बनने के संकेत दे रही है। समय का तकाजा ये कहता है कि समस्याओं की गंभीरता को समझते हुए सरकार एवं अन्य जनमानस को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारदारी के प्रति सजक होने के जरुरत है और तय होने चाहिए की ये करवाई अब कागजी तौर पर नहीं अपितु धरातल पर ठोस कदम के साथ होनी चाहिए ताकि हम स्वमं को तथा अपने आने वाले भविष्य को सुरक्षित रख सके।

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