blogid : 2606 postid : 1365888

कोसी में स्टेटस सिम्बल है दहेज

Posted On: 5 Nov, 2017 Others में

sanjayJust another weblog

sanjaypp

37 Posts

3 Comments

दहेज से बचने के लिए होती है कम उम्र में शादियां

कोसी में आज भी दहेज स्टेटस सिम्बल है। जहां यह नवधनाढ्य की नजर से जरूरी है। वहीं तथाकथित सभ्य समाज में दहेज बेटी को उसका हिस्सा देने के नाम पर इसे चलाया जा रहा है। अवैध एवं गैर कानूनी होने के बावजूद दहेज चोरी छिपे बदस्तूर है। दहेज के कारण कम उम्र में बच्चियों की शादी इस इलाके में आज भी हो रहे हैं।
ग्राम्य विवाह गीतों में भी दहेज से जुड़े कई गीत हैं जिसमें बढ़का कहाबै छै कलयुग के कसाई, जैसे गीत प्रमुख हैं। सदियों से इस दहेज की प्रथा ने कई जानें ली है। जहां बाप को विवाह के लिए अपना सबकुछ बेचने को उतारू देखकर बेटियों ने जानें दी है। वहीं कई बेटियों की जान दहेज लोभियों ने ली है।
बालक विवाह अर्थात क्रम उम्र में बेटों को व्याहने पर विद्यापति की साढ़े छह सौ साल पुराने गीत हैं पिया मोरा बालक हम तरूणी गे जो अद्यतन गाया और बजाया जा रहा है। दहेज प्रथा पर कोसी में कई रचनाएं हैं जिसमें अभावग्रस्त होने के कारण गुणी और विदुषी एवं काजूल बेटियों को अयोग्य वरों के साथ व्याहने की घटनाओं का हृदय विदारक दृश्य उपस्थित किया गया है। बाल विवाह के संदर्भ में यात्री नागार्जुन की रचना विलाप में बाल वैद्यव्य से देश की व्यथा को देखी जा सकती है वहीं हरिमोहन झा के साहित्य में भी दहेज प्रथा पर करारा चोट किया गया है। इन सबके बावजूद
कोशी में बालविवाह और दहेज कुप्रथा लगभग हर स्तर के समाज में विद्यमान है। दहेज की इसी प्रथा के कारण इस अंचल में यूपी के दुल्हों की आमद भी बढ़ी। कम उम्र की लड़कियों की अधेड़ से शादी की घटना इस इलाके में आम है। मंडन भारती जागृति समाज की सचिव लाजवंती झा बताती हैं दहेज के कारण लड़कियां बोझ समझी जाती है। शिक्षा का अभाव व गरीबी इलाके की बेटियों के श्राप जैसा है। दहेज दानवों के कारण यूपी व हरियाणा आदि इलाके की अधेड़ व्यक्तियों की शादी इस इलाके में कम उम्र की लड़कियों से कर दी जाती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बात को अच्छी तरह समझा कि दहेज पर अकुंश लगाए बिना बाल विवाह पर काबू पाना संभव नहीं है। दोनों कानून एक साथ लागू होने से इसका प्रभाव पड़ेगा,लेकिन जरूरत इस बात की भी है कि लोगों में जागृति के लिए भी कदम उठाए जाए। सिर्फ कानून बनाने से काम नहीं चलेगा। सरकार के साथ साथ कानून को लागू करवाने वाले लोगों का प्रयास भी ईमानदार होना चाहिए।
—–
केस स्टडी एक
—–
दो साल पहले सदर थानाक्षेत्र के सराही में सोलह साल के बच्ची की शादी अधेड़ उम्र के व्यक्ति से करने की सूचना पर पुलिस व सामाजिक संगठनों ने शादी रुकवायी थी। निहायत ही गरीब इस लड़की की शादी दहेज से बचने के लिए की जा रही थी।
—-
केस स्टडी दो

चार माह पूर्व सदर थाना के कारू खिरहरी हाल्ट के समीप दो सगी बहनों की शादी हरियाणा के दो अधेड़ व्यक्ति के साथ करायी जा रही थी। दोनों की उम्र दस व ग्यारह वर्ष थी। इसकी सूचना जब पुलिस को मिली तो शादी रुकवा दी गयी। मामले में सदर थाना में एक प्राथमिकी दर्ज की गयी। इस मामले में गुरूमीत व बलवीर को जेल भेजा गया था।
—-
केस स्टडी तीन

कहरा की नाबालिग लड़की की शादी हरियाणा के एक युवक से झांसा देकर करा दी गयी। लड़की के परिजन को जब सच्चाई का पता चला तब विदाई कराने पहुंचे लड़का को बैरंग लौटा दिया गया। इस मामले में एक महिला दलाल को पुलिस ने पकड़ा था। मामले की प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी थी। sanjay2<img

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग