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मूरख पंचायत ,...फिर निंदा रस !

Posted On: 6 Mar, 2014 Others में

हमार देशएक आम आवाज

Santosh Kumar

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आदरणीय मित्रों बहनों गुरुजनों ,..सादर प्रणाम !…….आपकी मूरख पंचायत में पुनः आपका हार्दिक स्वागत अभिनन्दन है ,….प्रकृति की रोषीली बरसात के बाद चटख बासंती धूप निकल आई ,…उकडूं चौकड़ी पालथी मारे मूरख मंडली फिर जम गयी …..सूत्रधार महोदय कुछ बोलने का साजोसामान जुटा ही रहे थे कि एक बेसब्र मूरख उचका .

“…..पिछली बारी भगवत्ता पर भागे थे ,….अबकी वहीँ से शुरू करो !…..भारत में भगवत्ता का राज कब कैसे होगा !….कब सबको सुख शान्ति सुरक्षा मिलेगी ..”

कुछ पल के लिए सब मौन हो गए …… एक पंच खड़े होकर बोले …….. “..जब हर हिन्दुस्तानी ह्रदय में भारत स्वाभिमान जागेगा ,….तब हमारे अन्दर से बाहर राजधानियों तक रामराज आएगा ,…… हमारे घरमंदिरों पर सनातन स्वाभिमानी पताका लहराएगी ,….मानवता के अंगने में भगवत्ता दौड़ी चली आएगी !……जब शैतानी लूटतंत्र का पूरा सत्यानाश होगा तब हम दुःख दरिया से सुखसागर में जाएंगे !…..”

मूरख पंचायत पंच के भाव में बहने लगी !………एक मूरख बोला … “..तो ऐसा करो भैय्या ,….फिर लूटतंत्रे को फेंटो…..तब आगे बढ़ो !….”

एक माता गुस्साई …………“..कब से फेंटते हो !….साल दर साल गुजर गए …..सूखे मजे के सिवा का निकला ,…….हमारे तमाम धन से महालुटेरों गद्दारों के बड़े बड़े मोहक परचार धूम मचाये हैं ,…अजब गजब कांग्रेसी नारे बजते हैं !….. छोटका शातिर गांधी मस्ती से मंदिर मस्जिद में पूजा सजदा करता है ,..चौपाल सजाता है ,……बार बार भारत को मूरख बनाने वाले गद्दार लुटेरे पूरे जी जान से जुटे हैं !….”

एक युवा ने माता को उत्तर दिया ………..“…ऊ जी जान से अपनी मैय्यत बचाने में जुटे हैं काकी !……..शैतान मक्कारों की चालबाजी भगवान इंसान सब जानते हैं ,….. भारत खाऊ मगरमच्छ लोग मजबूरी में रोड शो भौकाल करते हैं ,…कौनो तरह बाहरी सफेदपोशी बचाने खातिर बेचैन हैं ,……अखबार टीवी देखकर हमको बेबस हंसी आती है ,…..खाऊ चाटुकार लोग सलामी ठोकते हैं ,…बेबस जनता अपनी मुसीबत के प्रार्थना पत्र देती है !….”

एक बुजुर्गवार गुस्से से बोले ………..“….हमारी सब मुसीबत कांग्रेसी देन हैं !…..उनकी सभा रोडशो में लोगबाग़ किराए पर मूरख बनने आते हैं !…..अब उनको फेंटने से कोई लाभ नहीं !…..ऊ अपने कुकर्मों से स्वाहा हो गए …और होते जायेंगे !..”

एक और मूरख माता से बोला ………“…सत्यानाश सवासत्यानाश में का अंतर है ,…….कुछ निकलने की चिंता हम काहे करें !…….हमको भारतद्रोही शैतानों को मार निकालना है ,….एक बारी फिर सबकी सच्चाई खोलो ,…..मक्कारी में भटके गिरे इंसान खुदै जाग जायेंगे ,…..बेशर्म शैतानों खातिर उनके हिसाब से इंतजाम होगा !…”……

बात भटकती देख सूत्रधार ने मोर्चा संभाला ……….. “….देखो भाई लोग शांत रहो !…….तमाम बात हो चुकी हैं और बहुत बाकी हैं !…….लोकतंत्र के लिबास में लुटेरे राजतंत्र पर एक भैय्या ने लेख लिखा है ,…..ई सुनो फिर बोलना …”…….

“..सुनाओ लेकिन हम तीन बात लिख लिए हैं !….ईका उत्तर देना पड़ेगा ,…”…….मरियल से बाबा बोले तो युवा ने कटाक्ष किया ..

“..बगैर कागज़ कलम कहाँ लिखा है बाबा !……और का लिखा है …”

बाबा बोले ………“..लिखने का ना पूछो रमेश ….खाली खोपड़ी कब काम आएगी !…..असल में केवल एक बात लिखी है ,…चौतरफा कालिख में अन्दर से बाहर तक रामराज्य कैसे आई ……दुखी मानवता कब कैसे सुखसागरी भगवत्ता पाएगी !…”

कोने वाले मूरख ने बाबा को लपका …………….“…सुख शान्ति सच्चे धरम से आएगी !……सबके अन्दर सच की आग जिन्दा है !…..आधे झूठे सच्चे धर्मों अधर्मों के दलदल से निकलकर मानवता को अपना सनातन धर्म अपनाना होगा …….पुरानी बैठकी में ई बात चली थी !…”….

“..चली तो थी ,…फिर बिछुड़ गयी !…”………..पीछे से एक महिला आवाज उठी तो वहीँ से उत्तर उठा .

“..कुछौ न बिछुड़ा है ,…सब बात एक दुसरे से जुड़ी हैं !…..अपने देश से चोर लुटेरों गद्दारों शैतानों साजिशबाजों का राज मिटाना राष्ट्रधरम है ,…..ई सबसे महान धरम है !…”

महिला फिर बोली ………….“..लेकिन ई धर्म तबहीं पूरा होगा ,..जब सब स्वामीजी जैसे धरमपरायन योगी कर्मठ होंगे !……आप हम जैसों से टोपी बदल नकारा बदलाव होगा !..”

सूत्रधार फिर कूदे ………….. “…स्वामीजी जैसा महामानव और नहीं हो सकता !….ऐसे महापुरुष युगों बाद पैदा होते हैं ,…..अब टोपी बदल नहीं ठोस बदलाव होगा ,….पाहिले ई लेख सुनो ….नाम है राजनामा !..”

पंचायत तैयार हुई तो एक युवा ने रोक लगाई ……..“..ऊ बाद में सुनायो …पहिले ताज़ी खबर सुनो !…….चुनाव आयोग ने सात अप्रैल से चुनाव का घोषणा करी है ,….नौ चरण में मतदान होगा !…..सब दलों ने स्वागत किया है !..”

बुद्धिजीवी टाईप वाला बोला ……….“..चुनाव लोकतंत्र का पर्व है …ऊका स्वागत होना चाहिए ,….बहुत दिन से भारत नोचते लुटेरों की जूतामार बिदाई पक्की है !….लेकिन तारीख हमको ठीक नहीं लगती !..”

“..ऊ काहे !…”……..एक सवाल उठा तो उत्तर मिला ..

“..पढने लिखने वाले जवानों को चुनाव पर्व से दूर रखने का पिलान लागे !…..अप्रैल में बीए एमए सब परीक्षा होती है ,….युवा जोश परीक्षा देगा कि मतदान कराएगा !…फिर चिलचिलाती गर्मी में हालत खराब होगी ,..वोट कम गिरेगा !…”

“…यही गर्मी में हम लोकतंत्र का कूड़ा कचरा फूंकेंगे !…”………….एक युवा गरजा तो मरियल बाबा फिर बोले

“…लेकिन सवाल सही है !……चुनाव आयोग को फिर विचार करना चाहिए …..भयानक गर्मी परीक्षा में वोट कम होगा !…….”

युवा फिर बोला …………. “..ऊ का विचार करेगा !……सब जगह कांग्रेसी पालतू लोग जमे हैं ,….मशीनी चुनाव में गड़बड़ टंटा जान समझकर फिर वही अपनाए हैं !…..गुप्त साफ्टवेयर वायरस से गिनती नतीजा घुमा सकते हैं !….”

“..अबकी पर्ची भी मिलेगी !…”……..एक उत्तर पर दूसरा बोला

“…पर्ची गिनेगा कौन ….ई सब नकली भौकाल है !..”

पीछे से एक जवान उकताए जोश में बोला …………“..ई सब छोड़ो ,….कुछौ घुमाकर उनको कुछ न मिलेगा !……कोई हिन्दुस्तानी कांग्रेस को वोट न देगा !….उनको शून्य बटा सन्नाटा का जोरदार तमाचा मिलेगा ,..फिर जेल में झलरा रोटी मिलेगी !…हमको कालेतंत्र से आजादी मिलेगी !…अपना काला धन मिलेगा सबका उत्थान होगा !…”

“..लेकिन कान्ग्रेसियत तो सब जगह घुसी है !..कौन दल कांग्रेसी बीमारी से बाकी है !.”………….एक सवाल फिर उठा

मरियल बाबा ने समझाया …………“..चिंता न करो लाला !….सब निकल जायेगी !..भारत से कान्ग्रेसियत का अंत निश्चित है !..ऊ दिन तारीख भगवान् तय किये होंगे !…”

………….“..और प्रदेश में मरीज मर रहे हैं ……डाक्टर लोग हड़ताल पर हैं !….”………….. नया गंभीर सवाल उठा तो एक पंच बोले .

“..डाक्टर करें तो का करें !……महागुंडे गांधीगुलाम मुलायम का गुंडा विधायक डाक्टरों से गुंडई किया ,…फिर.. उनकी पालतू बदमाश पुलिस ने मासूम डाक्टरों को बेहिसाब पीटा !….फिर.. उनपर भयानक कानून ठोंक दिया !……..लूटतंत्र में सच की कोई सुनवाई नहीं !……लावारिस शिकार जैसे डाक्टरों के पास का चारा था ,…..मरीज बेचारे हैय्ये लावारिस !…”

काले स्वेटर वाला मूरख बोला …………..“..साजिशी अंग्रेजी राज में आधी से ज्यादा दुनिया मरीज है !……एलोपैथी इलाज के नाम पर सब नोचे खाए जाते हैं …..ठीक कोई कोई होता है ,..बाकी बीमारी लेकर फिर पैदा होते हैं ,…..बाकी कसर माननीय गुंडे मवाली चोर डाकू पूरी करते हैं !…”

पंच से फिर रहा न गया ……………“..बीमारी ठीक करने का सबसे अच्छा सौ फीसदी कारगर रास्ता आयुर्वेद है ,…..योग प्राणायाम मिलाकर अचूक औषधि मिलती है ,…..स्वामीजी लाखों करोड़ों निराशों की लाइलाज बीमारी दूर किये हैं ,…”

नीचे से एक बाबा ने पंच को डपटा ………..“..अरे पुरातन सिद्ध बात घोटना बंद करो …. ई बताओ हड़ताल से कैसे राहत मिले …”

“..राहत का एकै इलाज है ,….अंग्रेजी लूटतंत्र का खात्मा ..”…………एक युवा का आक्रोशित मत आया तो दूसरे पंच बोले

“…फिलहाल गुंडी अखिलेश सरकार को अपने मुंहपर कालिख पोतकर जूता मारना चाहिए !….. डाक्टरों को सच न्याय सद्भावना का इलाज चाहिए ,…सब झूठे मुकदमें तुरंत हटने चाहिए …..विधायक एसपी पुलिस पर ठोस मुकदमा दर्ज होना चाहिए !……मौतों खातिर खुद सरकार पर इरादतन हत्या का मुकदमा लगना चाहिए !……तब गुंडों को औकात समझ आयेगी !..”

युवा फिर गरजा ………..“..ई सब कुछ न होगा ,….गुंडों चोर लुटेरों मक्कार दलालों शैतानों से अपने देश को पूरा आजाद करवाना होगा !……वोट हमारी ताकत हैं ,….वही से सब बदलाव होगा !….”

एक मूरख ने समर्थन किया ………..“..सही कहते हो भैय्या !……हमही गधे मूरख हैं जो इनको सत्ता देते आये !…..गांधियों से लेकर जाहिरा बैंगनों गुप्त दलालों के झूठे जाल में फंसते आये हैं !….अब सबको उनकी औकात दिखाने का समय आया है !..”…………..पंचायत सहमती में हिली …..कोने से एक मूरख खड़ा हुआ ….

“..!….सुब्रत राय सहारा जैसे लोग फंसा दिए गए !….सेबी सुप्रीम कोर्ट की मार से बेहाल हैं !…..तमाम फरेबी कम्पनियाँ हमारा हजारों लाखों करोड़ खाके नेताओं के मार्फ़त भाग गयी..”

बुद्धिजीवी टाईप वाला फिर बोला ………….“..सहारा को सेबी सुप्रीमकोर्ट ने नहीं लूटतंत्र ने फंसाया है !…ऊ राजनीतिक जाल के शिकार हुए हैं ,…….जब जमा किया तो कानून और था अब और बना दिया ,…….. नेताओं के गांधीतंत्र में हमारा लूटधन पचाने वाले हसन अली जैसे सैकड़ों चालबाज बाइज्ज़त बाहर हैं !… सहारा ने कौनो जमाकर्ता का धन नहीं खाया !…”

एक प्रतिवाद उठा ……….“..खाया नहीं लेकिन खिलाया तो होगा ,…कभी मुलायम कंपनी ख़ास बगलगीर होती थी ,..वैसे ऊ देशभक्त कारोबारी हैं !……जब तक मुलायमा की मक्कारी समझे होंगे ,..तब तक देशद्रोही शिकंजे में आ गए !…”

एक और मत मिला …………“..फेबी लोग हमारा तमाम धन लूटकर चम्पत हो गए ,..सेबी सूबी अदालत कुछ न कर पाए !…… आजौ सब बीमा जमा कम्पनियाँ लूट रही हैं ,…अपना पेट काटकर जमा किया धन दलाल गली में डुबाये हैं ,…काले दलाल मालामाल देश का गाँव गरीब कंगाल !…….काले खेल में सरकारी गैरसरकारी नामी बेनामी सब जुटे हैं !…..वादा व्यापार सीधा घपलाबाजी है ,…गाँव गरीब किसान इंसान से धोखा है ,…..सब कालिख लूटतंत्र की सरपरस्ती में फैली है !…”

पीछे से एक और मूरख धीरे से उचका ………..“..हमारे तमाम कारोबारी देश भक्त हैं ,….टाटा बिडला बजाज मुंजाल वर्धमान जैसे अनेकों कारोबारी घराने लूटतंत्र की हर रुकावट को पार करके तरक्की किये ,..तमाम नए पुराने लोग अपनी मेहनत से देश को तरक्की दिए ,…..लुटेरी सत्ता का खुला खेल बहुतों को लालच में अँधा बना देती है ,…..नेताओं अधिकारियों को सोने चांदी की चप्पल चढ़ाना उनकी मजबूरी है ,…..धनी मूरख लोग दुनिया को कुंवे में धकेलकर खुद वही में कूदते हैं !…चोर चालू उद्दमियों को एक पल का चैन नहीं मिलता !….”

एक माता बोली ………..“..बेचैनी बांटकर कमाए धन से चैन काहे मिलेगा !……अब केजरीवाल अम्बानी के खिलाफ काहे जुटा है !….”

एक युवा ने उत्तर दिया …………..“…अम्बानी भी नेताओं को चढ़ाकर चढ़े हैं ,….गैस के दाम गांधियों से मिलकर चढ़ाए हैं ,……केजरीवाल भी उनसे चंदा माँगा होगा ,…अम्बानी सीधा बोला होगा ,…कांग्रेस भाजपा को देते हैं ,…आप खातिर बजट नहीं है ,…तो खुन्नस निकाला होगा !…”

“..लेकिन उद्दमियों को सबने बेहिसाब जमीन सुविधा दी है !….गांधी के टट्टू ने कई लाख करोड़ का कर चुपके से माफ़ किया है ,…चोर सरकार उनको तमाम कर्जा सहूलियत देती है !….”……………एक और बात उठी तो मरियल बाबा ने लम्बी गर्म सांस भरी ….

“…पहली बात इतने कर काहे हैं ,….इतना धन कहाँ जाता है …अथाह कुदरती संपदा विदेशी हाथ में काहे गयी ,……काहे से कि … देश का लुटेरी व्यवस्था शैतानों की रची है ,….नकली विकास रोजगार दिखाने भारत खाने खातिर भारी उद्योगीकरण जरूरी है ,…तो देसी विदेशी सबको बुलाते हैं !…अच्छे इंसान को जबरन चोरी मक्कारी अपराध करना सिखाते है ,…..ख़ास हमप्याला हमनिवाला को सब छूट देते है ,…जिंदल जैसे भारी कांग्रेसी कोयला चोर केजरीवालौ के ख़ास हैं ,……दूर देश में बैठकर भारत पचाने खातिर देशी लालची लोग चाहिए !….लूटतंत्र की सत्ताई सरपरस्ती में यही होता आया है ,….अम्बानी लोग रहें इक्कीस सितारा में ,..नेता खाए इशारा में ,….जनता मरे गुजारा में !..”

“..आखिर केजरीवाल मोदी से इतना दुश्मनी काहे निकालता है ,…..राहुल के साथ मोदी की तुलना करके चुटकुला सुनाता है !….खुदै हँसता है ,….मूरख बने समर्थकों को हंसाता है !..”………..एक और सहज बात आई तो एक युवा बोला

“..केजरीवाल भाई की अपनी मजबूरी होगी !…कुर्सी गांठना जरूरी होगा ,…..बड़े व्यापारी पूंजीपति सत्ताओं के करीब रहते हैं ,..लूटतंत्र में ई दोतरफा मजबूरी है ,…सौ फीसदी सच्चे देशभक्त टाटा को भी राडिया दलाल की सेवा लेनी पड़ी … गांधी कंपनी सीधा विदेशी आकाओं की जेब में है ,……वही आका दूसरी डोर से केजरीवाल को चलाते हैं !……मोदी सच्चा भारतपुत्र है ,….ऊ भारत का पक्का सेवक है !….पूरा देश ई बात जानता है …..किसी के कहने से कुछ न होता !….देश खातिर मोदी का सबकुछ कुर्बान है !…”

एक चाचा बोले ………….“…..दिल्ली दरबार गांधियों के हाथ है ,.सब लूट चोरी मक्कारी का सूत्रधार कांग्रेस है ,….भारत की भ्रष्ट्रोत्री कांग्रेस है ,……मोदी ने गुजराती उद्योग खातिर सबको जमीन सुविधा दिया है ,….चोर साहूकार सब घुसे होंगे ,…..फालतू विदेशी निवेश वहां भी हुआ होगा !…..हमारा कालाधन वहां भी खपा है !….धुर कालेतंत्र में कालिख सबको छू सकती है !…..मोदीजी महान भारतभक्त हैं !….ऊ जो सर्वोदयी काम बंधे हाथ से गुजरात में किये ऊ खुले मन से देश में होगा तो देश का महान उत्थान होगा ! …”

एक बाबा गुस्से में बोले ………..“…फालतू बात से कुछ न होगा ,….सच्चे लोगों के नेतृत्व में इंसानियतखोर व्यवस्था बदलने से भारत का उद्धार होगा !……सही व्यवस्था में पूंजीपति लोग भी इंसानियत के हिसाब से काम करेंगे !….ऊ भी भारत का उत्थान चाहते हैं ,..उनका झूठा दुखदायी लालच मिटेगा ,… सर्वसुखदायी कारोबार फैलेगा !….व्यवस्था के हर अंग को इंसानी सिद्धान्तयुक्त करना होगा !..”….

“..सिद्धांत माने का होता है !…”…………….एक मूरख के सरल प्रश्न ने गुस्से पर हंसी बिखेरी .. बाबा ने सहजता से उत्तर दिया .

“..जिसका अंत परिणाम सिद्ध हो ऊ सिद्धांत है !…”………..

“..माने सफेदपोशी से भारत लूटना कांग्रेस का असल सिद्धांत है !….”…………मूरखों का पुराना सिद्धांत फिर उभरा तो पीड़ित सी हंसी और फैली ,…..एक युवती बोली .

“…ईको शैतानी कांग्रेसवादी सिद्धांत कहते हैं !…..इनका अंत भी निश्चित है ,…..गान्धिओं का सब कायदा कानून जुगाड़ निर्माण अध्यादेश योजना परियोजना का निशाना भारत खाना होता है !…विकास तो अन्ग्रेजौ किये थे !.. .”

एक माता की पीड़ा बही ………….“…सब वहै सिद्धांत अपना लिए !…गांधी छाप तंत्र में सब गांधी के बन्दर जैसे हैं !……राजनीतिक माफियाबाजी में कामयाबी खातिर चौकस चालबाजी चाहिए !….बाहरी लड़ाई भीतरी मिलाई चलती है ,…..जनता का काम डाकुओं को इलाका बांटना है !.”

एक और महिला बोली ……………“…..कहने को समाजवाद लोहियावाद मार्क्सवाद गांधीवाद स्वराजवाद राष्ट्रवाद है ,….धंधा जातिवाद पंथवाद क्षेत्रवाद भाषावाद में बांटकर लूटना है !..”………………… सूत्रधार जरा झल्लाकर बोले …

“…परिवारवाद न भूलो भौजी !……अब राजनामा सुनो …..”

एक युवा ने फिर ब्रेक लगाईं …………“..तनिक ठहरो बाबू !……एक और खबर पर गौर फरमाओ !……केजरीवाल का काफिला गुजरात में चुनाव आयोग ने रोका ,…..आप वाले लोग दिल्ली में भाजपा मुख्यालय पर धावा बोल दिए !……दोनों ने जमकर पथरीली होली खेली !…”

पीछे वाला युवा फिर बोला ………..“..दल केजरीवाल का करे …मोदी की खिलाफत दिखाना उनकी मजबूरी है ,….हर हाल में टीवी पर छाना है ,….स्टंट ड्रामा इमोशन न होगा तो फिलिम कौन देखेगा !….ऊ छपास का लाभ जानते हैं ,….गांधी नेहरू का आजमाया नुस्खा है !…”

मरियल बाबा तीखी आवाज में बोले ………“…………अब बेमतलब बात न करो !……सबकी सच्चाई सामने है ,…..आगे बढ़ो और बढ़ते ही जाओ !…..निंदा का रस तकलीफ देता है !…”

सूत्रधार बोले ………..“….तकलीफ तो देता है लेकिन आदतन जरूरी है काका !……उनको देश लूटने खाने पचाने में कोई तकलीफ नहीं तो हमको जहर पीने से कोई तकलीफ नहीं !…….. जरूरत के हिसाब से स्वाद तो बदलेगा ही !………अब ई राजनामा सुनो … लेखक हैं गोविन्द भाई !…..”…………क्रमशः

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