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मूरख पंचायत ,....वाह मोदी आह मोदी !

Posted On: 13 Jul, 2014 Others में

हमार देशएक आम आवाज

Santosh Kumar

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गतांक से आगे …………………..

…..आगे से एक मूरख बोला ……………“…जितना लूट मक्कारी शैतानी शासनहीनता कांग्रेसी राज में रही ,…ऊ हिसाब से मोदीजी बहुत अच्छी शुरुआत किये हैं ,…………सधी तेज शुरुआत से इरादे नेक लागें ,….तमाम उखड़े सरकारी कील कांटे दुरुस्त किये …..मंतरी संतरी सब टाइम से पहले दफ्तर में राईट हो जाते हैं !…….”

एक पंच फिर बोले …………….“….मोदीराज पर कौनो बात करना बहुतै जल्दबाजी है !……मोदी राज का असल परिणाम दो तीन साल बादे दिखेगा !………विदेशियों की पालतू कान्ग्रेसियत अपना नाश निकट देखकर सब तरह से अड़ंगा फंसाएगी !…”

एक युवा जरा तैश में आया ………..“..अरे हर तरह से फंसाने में लगी है !…….कांग्रेस जाते जाते भरसक कांटे बोकर गयी है ,….दागी अधिकारी को दौड़ाकर सेनाअध्यक्ष बनाया है !…….”

मरियल से बाबा बोले ……..“..दागी के दाग जबरन मिटाए छुपाये गए हैं !…….मोदी सरकारो धीरे से सहमत है ,……..फिरौ …हमको आशा करना चाहिए ,…..भारतीय सेना की कमान संभाले वाला इंसान योग्य समझदार जिम्मेदार हो ,…..ऊ केवल भारत का हित सोचे !…”

युवा फिर बोला …………“..और राज्यपालों का पेंचा फंसा है !………पुराने पापी इज्ज़त से हटने को तैयार नहीं हैं !..”

दूसरा युवा और तैश में बोला ………“…. राज्यपाल का पदे गलत है ,….खाली जुगाड़साज हमारा खर्चा बढाते हैं ,…..फिर ..कांग्रेसी रवायत के हिसाब से उनका कौनो नेता चाटुकार कतई राज्यपाल नहीं होना चाहिए !…. शीला जैसे महाचोर चाटुकार की परछाई राजभवन पर नहीं गिरनी चाहिए !…”

………….“..और ,.. खौफजदा गांधी मंडली नेता विपक्ष का पद मांगती है ,…..गांधियों की नेशनल हेराल्ड वाली मक्कारी खुली तो राजनीतिक साजिश बताने लगे !…”…………..एक मौन मूरख जरा काव्यात्मक अंदाज में बोला तो पहले वाले युवा ने उत्तर दिया

“..जब इनकी सब साजिशें खुलेंगी तब का का गायेंगे बताएँगे !…….कांग्रेसी कुकर्मों से देश ने उनको हर पद से दूर किया है ,…..अब जेल से नजदीकी की बारी है !……”

“..वैसे लोकतंत्र में नेता विपक्ष होना चाहिए !…..”…………..एक युवती ने अपना मत रखा तो आगे वाला युवा बोला

“…..नेहरू इंदिरा राजीव किसी ने बहुमत पाकर नेता विपक्ष नहीं बनाया था ,..मोदी काहे बनाए !…….फिर आज लायक कौन है !…….कांग्रेसी केवल कमीनापने करेंगे !………….बाकी चमचों में वही कान्ग्रेसियत कूटकूटकर भरी है ,…….ममता दीदी का फायरब्रांड अपने कुत्सित सांसद पर बरफ का सिल्ली बन जाता है !…”

बगल बैठे बाबा बोले ……………“..ऊ जुझारू ईमानदार सादगीपसन्द महिला हैं !….. लेकिन .. जूझते जूझते खुदै बामपंथी तानाशाही गुंडागर्दी अपना लिया !…..उनकी क्षणिक दूरदर्शिता मुलायम जैसी नीयत कुछ कांग्रेस जैसी लागे !……..माँ माटी मानुष का बात करो ,…काम केवल वोट कुर्सी चमचों खातिर !…”

मरियल बाबा ने आपा खोया ………..“…अरे भाड़ में जाएँ सब !….हमको फिलहाल अपने से लेना देना होना चाहिए !……जयललिता ममता मिलकर नेता विपक्ष का दावा करें .. तो ई पद उनको देना चाहिए !……बाकी सब बहुत नीच नंगे हैं !…..भारतद्रोही कांग्रेस की औकात देश में चालीस वोट पाने की नहीं है ,…ऊ बस हमारी मूरखता को सलाम करें !….”

…..“….मोदी को लम्बी कांग्रेसी विरासत में बहुत बीमारी मिली हैं ,…..रगों में कान्ग्रेसियत घुसी है ….. खजाना खाली है !…..रेल किराया डीजल पेट्रोल बढ़ाना पड़ा !…..इराकी संकटो का असर होगा !……आलू पियाजी मंहगाई पर समय रहते कुछ काबू लागे ……फिरौ तमाम मंहगाई है !..”…………….बीच वाले बाबा ने अपना मत दिया तो बुद्धिजीवी टाइप मूरख बोला

“………हरामखोरों का राज होता तो पियाज पचास पार होती !…..रेल खातिर रेल किराया बढ़त जरूरी था !…….रेलमंत्री तमाम हकीकत जानते बताते हुए संतोषी विकासी बजट दिए हैं !..”

साथी फट से आगे बोला ……………..“….ताजा ताजा आये हैं ,…सबकुछ कहाँ समझा होगा !……..रेलौ में भयानक खाऊ खेल है ,…रेल हर सामान दूने तिगुने दाम पर लेता है !…बड़े निकम्मे अफसर बाबू लोग टेंडर ठेका बिल नीलामी पर दसखत मुहर लगाकर करोड़ों कमाते हैं ,…रेल कंगाल .. अधिकारी ठेकेदार नेता रिश्तेदार मालामाल …जनता बदहाल !…”

“…बजट में बुलेट ट्रेन चलाने स्टेशन चमकाने का पक्का पिलान है ,…”……………एक युवा उम्मीद बोली तो पंच साहब बोले ..

“……लेकिन गरीब जनता खातिर कुछौ नहीं है ,……..हर गाड़ी में दूना जनरल डिब्बा जरूरी है ,…और ज्यादा जनसधारण गाड़ी चलना चाहिए !……रोटी रोजगार में बेहाल आमजन भूसे जैसे भरते हैं !….हम बूँद भर पानी को तरसते हैं !…”

दूसरे पंच भी बोले …………..“..और सुरक्षा का पक्का इंतजाम होना चाहिए !…..जीआरपी वाले भैय्या लोग खाऊ हो गए !……उनकी मिलीभगत से चोरी डकैती जेबकतरी होती है ,…….रेल में पूरी सुरक्षा खातिर रेल पुलिस को  ताकतवर फुर्तीला जिम्मेदार जबाबदेह होना चाहिए ,…….”

……………..“.. मोदी से सबकुछ अच्छा करने की बड़ी लम्बी आस है !……..लेकिन …….अर्थव्यवस्था का पूरा रागतोमड़ा उखड़ा है …लुटेरों ने सब लूट लिया !…”……………..पीछे से एक और मत आया तो एक पंच झल्लाए ……….

……………“….रागतोमड़ा उखड़ा है तो बड़े फैसले लेना चाहिए !……….चोरी मक्कारी फैलाते बड़े नोट फ़ौरन बंद करो !………..तमाम नोटन का चलन हटाओ ……भारतीय नोट की इज्जत बढ़ाओ !……दलाल गांधी बाबा की फोटू हटाओ !….सच्चे महापुरुषों महात्माओं के दर्शन कराओ !……….कालाधन लाओ !…..जनता खातिर बैंक बढ़ाओ ….सब कर हटाकर अकेला मजबूत बैंक कर लगाओ ,….कमाई के तमाम काले रास्ते बंद करो !…कड़क असरदार कानून बनाओ !……….मंहगाई लूट जमाखोरी कालाबाजारी सब रुकेगा !…..देश तरक्की करेगा !…….कांग्रेसी राह चलकर कुटिल खाऊ कान्ग्रेसियत से आजादी कैसे मिली !……विदेशी निवेश के सहारे गाड़ी कैसे चली !…”…………………..पंच के आवेश पर सब मौन हो गए ,…कुछ पल बाद एक युवा बोला

“..कालेधन पर स्विस बैंक कुछ जानकारी देने वाला है !…..”

इसबार बुद्धिजीवी टाइप वाला फटा ………….“…ऊ सब भौकाल बकवास है ,…दस नया पैसा दिखाकर लाखों हडपने का पिलान है ,……स्विस बैंको में बहुत कम माल बचा है ,……बड़े मगरमच्छों का सब माल इधर उधर हो गया है ,…. सोनिया संस का पैसा इटालियन नागरिकता से जमा होगा !……रौल विन्ची एंटोनियो माइनो के नाम जमा होगा !…. भारत को सन्नाटा मिलेगा !…”

साथी जरा शान्ति से बोला …………“……अरे नब्बे पैसा बेनामी होगा ,…दस पैसा नामदारी से सोनिया दुनिया की टाप अमीर नेता बनी है !……इनको पकड़ ठोंककर कबूल करवाना चाहिए !…….सही से सबका नार्को टेस्ट होना चाहिए !…एक डाकू पकड़ेंगे .. ऊ बीस महाडाकुओं के नाम बताएगा !.”

एक युवा बोला ………. “……हम गणित में चौथी बार ग्रेस से पास हुए हैं ,……लेकिन कालेधन का सीधा हिसाब आता है !………….सब मिलाकर हमसे कम से कम एक हजार लाख करोड़ की लूट हुई है ,……ई धन मोदियो सरकार खातिर गणित का कठिन प्रश्न जैसा है !….जितने लाये उतने नंबर मिलेंगे !..”

एक और पंच बोले ………………“…उनको जो करना होगा ऊ करेंगे !……फिलहाल सरकारी बजटो आ गया ,….नीयत काफी अच्छी दिखे …..लेकिन ….मोदी सरकार का अर्थपथ उन्नीस इक्कीस कांग्रेसे जैसा लागे !….”

नीचे से एक मूरख ने पंच को काटा ……..“…. जमीन आसमान का अंतर है भैय्या !……..विदेशी गुलाम नेहरू गांधियों वाली कांग्रेस हमेशा देश खाने के पिलान में रही ,….मोदी समर्थ देशभक्त हैं ,…भरसक देश उठाएंगे !…..”

एक माता बोली …………….“……फिलहाल मौजूदा अर्थव्यवस्थे बकवास लागे ,…..कौनो इंसान को सुख शान्ति नहीं दे सकती !…..सरकार को क्रांतिकारी कदम उठाना चाहिए !….”

पंचाधीश ने उत्तर दिया ……………“…क्रान्ति सरकारी बस से बहुत बाहर है ,…ऊ केवल क्रान्तिजाप कर सकती है … स्वामीजी जैसा धीर लगनशील सच्चा पराक्रमी महापुरुषे क्रान्ति ला सकता है ,….फिर …धीरे धीरे होने वाली क्रान्ति बहुत देर तक मीठा फल देती हैं !…..क्रान्ति लगातार जारी है ,…..सुफल निश्चित मिलेगा !..”

एक बाबा बोले …………..“…कुलमिलाकर मोदी सरकार का बजट अच्छे से कुछ ज्यादा लागे !…”

एक और पंच बोले …………..“……..नया बजट अच्छा है ,..सबके खातिर हितकारी लगता है ,……मौजूदा बदहाली में ईमानदार नीयत से तनिक दूर की सोच लागे ,…….देश को मजबूत करने और जनहित का इरादा छापा है ,…..लेकिन अन्दर से तमाम खोखलापन लगता है !………बाकी नतीजा सालभर देखेंगे !…”

मरियल बाबा भी बोले …………….“…असल बात ई होगी कि सरकार काम कैसे करती है ,…..अब तक बजट मजाके बनता रहा ,…तमाम पैसा खर्च नहीं होते घाटा चौगुना बढ़ता रहा ,….मोदी देखो का करते हैं !…”

“…मोदी जो चाहें करें !……..नेता लोग अपने लाभ हानि के जोड़ से वाह वाह हाय हाय करते हैं ,…कुछ कांग्रेसी भाई लोग पुतलादहन कार्यक्रमों मचाये !…”………….एक युवा ने खड़े होकर नयी बात बतायी तो दूसरा पंच से मुखातिब हुआ

“..अब बेशर्म चाटुकारों से जनता का कहे !…. पहले महालुटेरे गद्दार गांधियों को फूकना चाहिए !…….तुम उनकी छोड़ो काका …अपनी कहो …..वाह कि आह !…”

पंच ने उत्तर दिया  ………..“..हमारी दो वाह एक आह है !…..अर्थनीति पर हमसे धोखा हुआ लागे !……. भारत स्वाभिमान के मुद्दों से मोदी सरकार पलटी लागे ,……कालाधन राष्ट्रीय संपत्ति का पांच साल बाद बनेगा !……”

दुसरे पंच घूमकर बोले ………“…सब अपना गुणा भाग लगाते होंगे ….गणित बैठाने का पूरा मौका दो !……लेकिन …. मोदीजी से और बड़ी चूक हुई है !…… चार जून के गुनाहगार गांधियों पर सरकार काहे मौन हैं !…..स्वामीजी पर तमाम मुक़दमे उत्पीड़न का हिसाब होना चाहिए !…”

पंचाधीश कुछ तेज आवाज में बोली ………..“…स्वामीजी को अपने साथ हुए घोर अन्याय पर तनिकौ गम न होगा !….लेकिन राष्ट्र मुद्दों खातिर पूरा जिंदगी समर्पित किये है ……. भारत स्वाभिमान किसी नेता दल का नौकर चाटुकार नहीं है ,….भारत स्वाभिमान से देश का असली उत्थान होगा !……स्वामीजी के सब मुद्दे सर्वहितैषी हैं !….”

मरियल बाबा ने समझाया ……………“……स्वामीजी ने देशहित में मोदीजी को मुद्दों पर जीजान से समर्थन किया है ,….अब ऊ अपने हिसाब से पूरा करेंगे …उनकी जिम्मेदारी है !……सब अपना काम करेंगे !…”

एक बाबा और कूदे …………“..अरे ऊ लोग अभी काम शुरू किये हैं ,….धीरज रखो .. कुछ समय लागी ..अच्छा नतीजा जरूर मिली !….”

एक युवा बाबा से बोला ………..“……हम तबहीं मानेंगे जब महाखाऊ मंडली सलाखों के पीछे होई !…….अर्थपथ कालेधन के खात्मे से सुधरेगा ,…बड़ा विकास चोरी वसूली से होगा …!..”

एक और मूरख धीरे से बोला ………“……..अबहीं तो तमाम खाऊ बेशर्म बादल बहू मोदी कैबिनेट में खाद्य संस्करण मंत्री हैं !…….मोदी के वित्तमंत्रियो पर भरोसा फिफ्टी फिफ्टी है ,….अटूट राष्ट्रनिष्ठा का सवाल है !….झक एलीट नेता की देशभक्ति में बहुत शंका है !….स्वदेशी विदेशी से पीछे लागे !……..पीछे से कोई जयचंद न निकले !……प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाना और खतरा है !…तिकड़मी यार कहीं गद्दार न बने !..”

इसबार मरियल बाबा ने समझाया …………………“….शंका सुबहा कम करो …..खतरे में कुछ अवसरो जरूर होंगे !………मोदीजी होशियार हैं ….समय के साथ सब काम देखो !….विदेशी त्यागकर स्वदेशी अपनाना देश की जिम्मेदारी है !….समय तमाम सवाल शंका का उत्तर देगा !.”

मूरख ने फिर प्रतिवाद किया ……………..“..लेकिन .. तिकड़मी आदमी तिकड़मे करेगा ,……जोड़ घटाव काट छांट करेगा !…..ठोस काम ऊके बस में कहाँ होगा !……..अरुण जेटली को रक्षा मंत्रालय देना मोदीजी का अंध दिलेरी लागे !……..उधर अपनी स्मृति बहिन को बड़ा करने में शिक्षा विभाग को छोटा बना दिया !…”

मरियल बाबा ने उत्तर दिया …………“…हम आशा कर सकते हैं ,… सबकी क्षमता योग्यता देशभक्ति बढ़े ,… बहुत अहम् विभाग भारत उत्थान में बड़ा काम करे !..”

एक युवती चहंकी …………….“….. हिंदी के अच्छे दिन आये लागें !…….जीवनदायी गंगा मैय्या का उद्धार होता दिखे !….”

एक पंच बोले …………..“…बिटिया !…..हिंदी और सब भारती भाषाओं के अच्छे दिन तब आयेंगे .. जब हर परीक्षा में अनिवार्य अंग्रेजी ख़तम होगी !….समय लगेगा ,..सही शुरुआत जरूरी है ……सही दिशा में काम जरूरी है !..”

दुसरे पंच भी बोले ………..“..और …गंगा मैय्या समेत सब नदियों के उद्धार खातिर देश एकजुट है ,…सरकारी निष्ठा का आंकड़ा समय बतायेगा !…….देश दैनिकजागरण परिवार का बहुतै आभारी रहेगा !……राष्ट्रनिष्ठ पत्रकारिता महान राष्ट्रजागरण में जुटी हैं !……..जिम्मेदार मंत्रीजी बहुत पहले से घोर गंगाभक्त हैं ……हमको अच्छे नतीजे की बहुत आशा है !..

“…. आखिरकार हम नतीजा प्रेमी हैं !……..कालाधन लाकर ही बड़े काम होंगे !…..जैसा स्वामीजी कहे हैं ..सब नेताओं पर एफ़आईआर जांच होना चाहिए ,…कालाधन रोके निकाले खातिर यूएन कानून का डंडा चलना चाहिए ,……तमाम विदेशी निवेश के असल मालिकों की पड़ताल होना चाहिए !…….तब चोर नेता अधिकारी दलाल ठेकेदार मंडली आत्म समर्पण करेगी !….देश को बहुत धन चाहिए ,…ऊर्जा खातिर कोयला डीजल पेट्रोल गैस खर्चा कम होना चाहिए !….ऊर्जस्वी भारत खातिर प्रकृति समर्थक तमाम लघु जल परियोजना होना चाहिए ,…….स्वच्छ सुलभ सौरऊर्जा पर अनुसंधान निर्माण होना चाहिए ,…तमाम पवन ऊर्जा गोबर गैस चाहिए ,……….नदियों में जाने वाला तमाम घरेलू गन्दगी का उपचार करना है ,…….उद्योगी जहर रोकना है ,……कुदरती जल शक्ति का अतिदोहन रोकना है !……”…………….बुद्धिजीवी टाइप वाले ने लम्बी बात कही तो साथी फिर कूदा ……

….“..करना तो बहुत है ,…….सिंचाई के कारगर प्राकृतिक साधन चाहिए ,……भूगर्भी पानी तेजी से ख़तम हो रहा है ,…रसायनी खाद दवा से जल बहुत जहरीला हो रहा है ,…..इनका प्रयोग रुकना चाहिए !…….नलों ट्यूबेलों जितना पानी दुबारा धरती माता को देना चाहिए ,……वाटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था बहुत जोर से लगानी होगी !……”

बुद्धिजीवी टाइप फिर बोला ………..“…….शहरी इमारतों बंगलों में ई जरूरी होना चाहिए !…… पोखर तालाबों में परिणामदायक निर्माण होना चाहिए ,….आज गाँवों के तमाम कुंवे बेकार पड़े हैं ,…बहुत कम खर्चे में तमाम जल धरती माता को वापस दे सकते हैं !…….हमारी मूरखता से तमाम सदानीरा छोटी मंझोली नदियाँ बरसाती नाला बन गयी हैं ,……..धरती के भीतर बाहर जल होगा तो सूखे सोंते फिर फूटेंगे !…..छोटे बांधों जलाशयों नहरों से मानव प्रकृति सबका कल्याण होगा !…”

………..“…ई कामों में बहुत धनशक्ति जनशक्ति लागी !….”…………पीछे से एक बात उठी तो एक पंच फिर बोले ..

“..ऊ हमारे पास बहुतायत है ,….सोयी जनशक्ति जागेगी !…….कैद धनशक्ति आएगी !…….नरेगा की मनमानी लूट रुकेगी !……अपने भले खातिर हर इंसान जुटेगा !…..जल है तो जीवन है !…”

एक गमछाधारी मूरख बोला ……………..“..नरेगा में भारी बंदरबांट है ,…केंद्र प्रदेश अधिकारी कर्मचारी सब खूब खाए !..बेबस मजदूरो हराम का खा लेता है !……ई कैसे रुके ,….”

एक बाबा ने उत्तर दिया ………….“…गलत रोकने के दो तरीके ,…. सब सदाचारी बनें .. गलती लूट चोरी पर ढंग का डंडा मिले !….मोदी सरकार सही दिशा में लागे ,……पछत्तर पैसा नरेगा को सीधा किसानी से जोड़ना होगा !…..सही व्यवस्था से किसान को भरपूर मजदूर मिलें ,…मजूरी किसान सरकार मिलकर अदा करें !………बदहाल किसानी उठेगी ,….सार्थक रोजगारो मिलेगा !…..बंदरबांट मिटेगी !..”…………बाबा से सब सहमत दिखे … एक पंच की निराशा फिर उभरी

“… जो होगा सब ठीकै होगा !……फिलहाल हमारी चर्चा फिजूल जमाखर्ची है ,…..मानव के मिले बगैर सब अधूरा है !…..”……………क्रमशः

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