blogid : 855 postid : 229

विचार मंथन (भाग पांच)

Posted On: 3 Aug, 2011 Others में

jara sochiyeसमाज में व्याप्त विक्रतियों को संज्ञान में लाना और उनमे सुधार के प्रयास करना ही मेरे ब्लोग्स का उद्देश्य है.

SATYA SHEEL AGRAWAL

251 Posts

1360 Comments

देश का मालिक कौन ?

कभी सरकारी वेतन कर्मियों के वेतन  तर्क संगत नहीं हुआ करते थे.अतः सरकारी कर्मियों को भ्रष्टाचार   अपनाये बिना परिवार  चलाना मुश्किल था अथवा कम वेतन दे कर सरकार ने भ्रष्ट तरीके अपनाने को प्रेरित किया. धीरे धीरे पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार में डूबता चला गया और नेताओं की जेबें भरने लगीं .प्रत्येक सरकारी कर्मी की नियति बन गयी की बिना कुछ लिए उसे फाइल को हिलाना भी गवारा न रहा. परन्तु पिछले बीस वर्षों में सरकारी वेतन आयोग की सिफारिशों  के चलते वर्तमान में  सरकारी कर्मियों को वेतनमान मार्केट में प्रचलित वेतनमानों से कहीं अधिक कर दिए गए हैं. परन्तु तर्क संगत वेतनमान से भी अधिक वेतन मिलने के पश्चात् भी भ्रष्टाचार पर किसी प्रकार से अंकुश नहीं लगा. बल्कि घूस की दरें भी वेतनमान के अनुसार बढा दी  गयीं. अब पांच सौ प्रतिदिन के हिसाब से वेतन पाने वाला कर्म चारी पचास रूपए रिश्वत कैसे ले सकता है,उसे भी कम से कम दो सौ या ढाई  सौ से  कम रिश्वत कैसे रास आ सकती है.इसी प्रकार अधिकारियों ने अपनी घूस की दरें बढा दीं .अर्थात वेतनमान तो जनता की गाढ़ी कमाई से गया ही, रिश्वत दरें बढ़ने से अपरोक्ष रूप से भार पड़ा सो अलग.जनता तो शोषित किये जाने के लिए ही है. शायद हमारे देश में नेताओं,पूंजीपतियों,सरकारी कर्मियों को ही जीने का अधिकार है. बाकी जनता तो लुटने के लिए है.
हमारी  चुनाव  प्रणाली  दोष  पूर्ण  होने  के  कारण ,चुनावों में  विजय मिलती है, या तो धनवानों को या फिर बाहुबलियों को जो दबंगई के बल पर चुनाव जीत जाते हैं .धन वाले उम्मीदवार धन के बल पर समाज के कमजोर वर्ग को आसानी से भ्रमित कर वोट प्राप्त कर लेते हैं.और चुनाव जीत जाते हैं यही कारण है कोई भी नेता आरक्षण व्यवस्था को हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता.परिणाम स्वरूप मेधावी नागरिक जो उच्च जाति के होते हैं, को देश के विकास में योगदान का अवसर नहीं मिल पाता .अतः वे अधिकतर विदेशों को चले जाते हैं और देश के विकास  अवरुद्ध हो जाता है.जनता को चुनाव का अधिकार होते हुए भी वह उसका सदुपयोग नहीं कर पाती .
जनता तो देश की मालिक है उसे सिर्फ प्रितिनिधियों को चुनने का अधिकार है,वोट देने का अधिकार है बस यहीं तक जनता देश की मालिक है.जनता अपनी मेहनत से विकास करेगी,पैदावार बढ़ाएगी,मिलों  में उत्पादन बढ़ाएगी, तो लाभ सरकार में बैठे नेता या फिर सरकारीकर्मी चाटते रहेंगे,फिर जनता महंगाई से  पिसती रहेगी . और अपने नसीब को कोसती रहेगी.वाह रे लोकतंत्र,वाह रे जनतंत्र, या बेईमानी  तेरा सहारा…….देश का विकास होगा तो विकास होगा सरकारी कर्मियों का विकास होगा नेताओं का या फिर  उद्योगपतियों का ,पूंजीपतियों  का ———-.

*SATYA SHEEL AGRAWAL*
(blogger)*
BLOG SITE NAME*
*JARA SOCHIYE      satyasheel.blogspot.com*
* THINK OVER IT       quality532.blogspot.com

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग