blogid : 11009 postid : 29

होता हूँ विवश कभी जो माँ ,बस तुम्ही याद मुझे आती हो

Posted On: 13 May, 2012 Others में

भावों को शब्द रूप

satyavrat shukla

17 Posts

82 Comments

मेरे आधार में तुम हो ,मेरे आकार में तुम हो
तुम्ही सांसो में हो मेरी ,लहू कि धार में तुम हो
बनी सम्बल हो दुखों में ,मेरी मुस्कान में तुम हो
बचाने को मेरी कस्ती भरी मझधार में तुम हो

तुम करुणा का सागर हो ,मर्यादा कि मूरत हो
तुम देवों की पूज्यनीय,तुम ही सृष्टि की सूरत हो
मैं ऋणी तुम्हारी ममता का तुम इतना प्यार लुटाती हो
होता हूँ विवश कभी जो माँ ,बस तुम्ही याद मुझे आती हो

बाल्यावस्था से अबतक माँ, प्यार तुम्हारा पाया है
खुद को कष्टों से रंजित कर तुमने फ़र्ज़ निभाया है
मेरी खुशियों की खातिर माँ तूने सर्वस्व लुटाया है
अपनी छोटी सी चोटों पर तेरी आँखों में सागर पाया है

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग