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आसमान से इन्द्रदेव भी करते हैं शिव भोले का अभिषेक...

Posted On: 13 Aug, 2014 Others में

saurabh dohare v
आसमान से इन्द्रदेव भी करते हैं शिव भोले का अभिषेक

आपने अपने घर में भोले बाबा यानि जगत के पालन हार शिव भोले का कभी स्वागत किया है मैंने किया है और हर सावन माह में हम सब उनके स्वागत की तैयारियों में जुट जाते हैं वैसे मैं ज्यादा काम नही करता पर बाबा भोले के स्वागत में कोई कसर नही छोड़ता हूँ पूरे सावन भर घर शिवमय होता रहा, विगत सोमवार को सुबह से घर में बड़ी चहल-पहल हो रही है आखिरकार वो पल आ ही गया जब शिव भोले अपने परिवार सहित मेरे घर आने वाले हैं पुजारी जी ने घर में आकर मंदिर से लाई हुई चिकनी मिटटी से स्वयं अपने हांथों से शिव भोले का पूरा परिवार बनाया फिर एक चैकी पर नए सफेद कपडे को बिछाकर शिव परिवार को स्थापित किया ! एक बड़ी सी परात में उस चौकी को रखा गया साथ ही तीन टांगों वाले स्टेंड को भी पास ही रख लिया गया फूल मालाओं से उस स्टैंड सहित एक कलश को भी खूब सजाया गया मेहमानों का आगमन शुरू हो गया था इसलिए मैं भी जल्दी से पूजा वाले स्थान पर बैठ गया फिर पुजारी जी ने मंत्रोच्चार के जरिये पूजा की शुरुआत की। सारा माहौल भक्तिमय हो गया था सारे लोग जय भोले के जयकारे बोल रहे थे। सबसे पहले शिव परिवार के चरण धोये गये फिर उन्हें गंगाजल, दूध और दही से स्नान कराया गया फिर दुबारा जल से स्नान करवाने के बाद भगवान भोले के परिवार को कपड़े पहनाये गये फिर इतर भी लगया गया पार्वती माता को पूरा सिंगार पहनाया सिंदूर भी लगाया। उसके बाद सारी दिशाओं में सरसों के बीज चावल चढाकर अगरबत्ती, धूपबत्ती आदि जलाई गयी पुजारी जी के मंत्रोच्चारण के साथ ही साथ सब लोग हरसिंगार के फूल, करवीर और दुपहरिया पुष्प, कमल पुष्प और शंख पुष्प, चमेली के फूल, बेल पत्र, धतूरा, मक्खन, शहद, सुगंधित तेल, सरसों का तेल, गन्ने का रस, देसी घी, गंगाजल, दूध, पंचामृत, मेवा, फल इत्यादि अपने-अपने हांथों में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर चौकी पर विराजमान भोले नाथ को चढ़ाये जा रहे थे। एक घंटे के पश्चात पुजारी जी ने सजे हुए तीन टांगों वाले उस स्टैंड को चौकी के ऊपर रखा और उसके ऊपर मिटटी के उस कलश को जिसमें पेचकस से एक छिद्र किया गया था और उस छिद्र के जरिये पूरे शिव परिवार को दूध, गंगाजल चढ़ाया जा रहा था इस बीच पूरे चार से पांच घंटे पुजारी जी के मंत्रोचार भी लगातार चलते रहे जो कानों को बड़े ही सरस लग रहे थे उसके बाद नाना प्रकार के व्यंजनों से उनको भोग लगाया गया फिर आरती हुई पुजारी जी ने सबको कलावा बाँधा उसके बाद सबको प्रसाद दिया गया। पूजा के पूरे समय मानों ये लगता कि सक्षात शिव भोले, माता पार्वती, गणेश भगवान, कार्तिकेय और नादिया महाराज मेरे घर में पधारे हैं …
मुझे मेरी मम्मी ने बताया है कि शिवलिंग भगवान का रुद्ररूप है जिसका विभिन्न वस्तुओं से अभिषेक किया जाता है। शास्त्रानुसार रुद्राभिषेक करने से प्रभु बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं तथा अपने भक्त की सभी मनोकामनाएं भी सहज ही पूरी कर देते हैं। और उनकी पूजा में इसी कारण वश करता हूँ कि मेरी भी मनोकामनाए शिव भोले पूरी कर दें वैसे प्रभु मेरी लिस्ट ज्यादा लम्बी नही है भक्तजन अपनी किसी भी मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान शिव की उपासना करते हैं तथा शिवलिंग का पूजन करते हैं। मैं भी भगवान शिव को अपना इष्ट मानता हूँ मैं भगवान से यही मांगता हूँ कि इस संसार के प्रभु कष्ट हर लो, दींन दुखियों का कल्याण करो और पपियों का नाश करो। इस धरती पर पाप ने कोहराम मचा रखा है तनिक ध्यान धरो प्रभु। जब आप ही (शिव ) दाता हैं तो सब आपकी ही महिमा है आपके नाम का अर्थ है-परम मंगलम, परम कल्याण। भगवान आपकी शक्ति अपरम्पार है, आप सदा ही कल्याण करते हैं। आप विभिन्न रूपों में संसार का संचालन करते हैं। अगर आप सबका कल्याण करेंगे तो मेरा कल्याण अपने आप ही हो जायेगा।
भगवान शिव आपको प्रसन्न करने के लिए अक्सर लोग जल में दूध मिलाकर कच्ची लस्सी और गंगाजल से रुद्राभिषेक करते हैं घी, तेल, दही, दूध, सरसों का तेल, गन्ने के रस और शहद से विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अभिषेक करते हैं और मैंने तो ये भी सूना है कि शिव पुराण की रुद्र संहिता के अनुसार जो व्यक्ति तुलसी दल और कमल के सफेद फूलों से आपकी पूजा करते हैं उन्हें भोग एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। तो हे मेरे इष्ट देवता! मुझे भोग की इच्छा नहीं और इतनी छोटी उम्र में मोक्ष भी नही चाहता अब जो तुमने दिया है वही मेरे लिए काफी है बस इतनी कृपा बनाए रखना कि मेरे साथ जुड़े हर रिश्ते को संवार देना इस संसार का कल्याण करना। जिस तरह हमारे बड़े जैसे मम्मी-पापा, भैया आपके क्रोध से डरते हैं मैं भी आपके सहित अपने परिवार के बड़ों के क्रोध से डरता रहूँ और इसी डर वश कोई ऐसा काम न करूँ जो समाज के अहित में हो।
आप तो भोले बाबा इतने अधिक कृपालु हैं कि भक्त द्वारा भोले भाव से चढ़ाए गए केवल जलमात्र से भी प्रसन्न होकर कृपा कर देते हैं परंतु जो भक्त रुद्राभिषेक करते समय महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं वह विशेष कृपा के पात्र बन जाते हैं इसलिए उक्त मंत्र के उच्चारण के साथ ही रुद्राभिषेक करता हूँ प्रभु मेरे ऊपर भी अपनी विशेष कृपा बनाए रखना।
मैं अपने बुजुर्गों से यही सुनता आ रहा हूँ कि सावन मास आपका महीना है इस महीने में देश भर के शिवालय श्रद्धालुओं से पट जाते हैं। इसमें भी सबसे अहम होता है सोमवार को शिवपूजन। इसलिए इस बार पापा ने सोमवार को ही आपका पूजन रखा … हे प्रभू ! आपके तीन नेत्रों में सूर्य दाहिने, चंद्र बाएं नेत्र और अग्नि मध्य नेत्र हैं। चंद्रमा की राशि कर्क और सूर्य की सिंह है। जब सूर्य कर्क से सिंह राशि तक की यात्रा करते हैं तो ये दोनों संक्रांतियां अत्यंत पुण्य फलदायी होती हैं और यह पुण्यकाल सावन के महीने में होता है। इसलिए आपको सावन मास अधिक प्रिय है। सोमवार चंद्रमा का दिन है। चंद्र आपके भगवान शिव के नेत्र हैं और उनका दूसरा नाम सोम है। इसलिए यह दिन प्रभू आपको बेहद पसंद है। ज्यादा तो कुछ नहीं जनता लेकिन इतना जानता हूँ कि आप ही इस जग के पालन हार हैं आप ही शिव हैं और शिव ही सर्वस्य है। सामान्यतः ब्रहमा को सृष्टि का राचयिता, विष्णु को पालक और शिव को संहारक माना जाता है। परन्तु मूलतः शक्ति तो एक ही है, जो तीन अलग-अलग रूपों में अलग-अलग कार्य करती है। वह मूल शक्ति आप ही हैं। स्कंद पुराण में कहा गया है-ब्रह्मा, विष्णु, शंकर (त्रिमूर्ति) की उत्पत्ति माहेश्वर अंश से ही होती है। मूल रूप में आप ही शिव ही कर्ता, भर्ता तथा हर्ता हैं। सृष्टि का आदि कारण शिव है। शिव ही ब्रह्म हैं। महादेव आप तो तीनों लोकों के स्वामी हैं आपके नाम शिव तत्व में सम्पूर्ण सृष्टि समाहित है और आप सब जगह व्याप्त हैं। हे प्रभु ! आप भक्ति की ऐसी अविरल धारा हैं जहां हर-हर महादेव और बम-बम भोल की गूंज से कष्टों का निवारण होता है।
प्रभु जो देख व सुन रहा हूँ बहुत ही कष्ट प्रद है भारत देश में तो नारियों को एक देवी के रूप में पूजा जाता है तो फिर क्यों इन अबलाओं की अस्मत लूटी जाती है प्रभु इस धरती पर फिर से अवतार लेकर पापियों का नाश करो हमारे देश में हो रहीं इन वीभत्स घटनाओं का अंत करो हम सब आपकी शरण में हैं।
सौरभ दोहरे
विशेष संवाददाता
“इण्डियन हेल्पलाइन”
राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका

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