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योगशास्त्र एवं आध्यात्म – २२. दर्शन : अंगुलिमाल डाकू, जो सबको मार देता था, भगवान बुद्ध को न मार सका, क्यों ?

Posted On: 24 Jul, 2010 Others में

Dharm & religion; Vigyan & Adhyatm; Astrology; Social researchDharm & Religion- both are not the same; Vigyan & Adhyatm - Both are the same.....

Er. D.K. Shrivastava Astrologer

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आपको पता है, यही वो महान कारण था जिससे अंगुलिमाल डाकू, जो सबको मार देता था, भगवान बुद्ध को न मार सका वल्कि बुद्ध ने ही उस डाकू को मार डाला | जानते है इसका कारण क्या है…? बचपन में मैंने पढ़ा था कि जंगल में अंगुलिमाल नाम का डाकू रहता था | जो कोई वहां से गुजरता था वो उसे मार देता था तथा उसका अँगुली काट कर माला में गूँथ पहन लेता था | इसीलिए उसका नाम अंगुलिमाल डाकू पड़ा था | उसके भय से कोई भी उसके इलाके से होकर न गुजरता था | एक बार भगवान बुद्ध उस रास्ते से गुजरने लगे | लोगों ने काफी मना किया किन्तु वो न माने | जंगल में भगवान बुद्ध की अंगुलिमाल से भेंट होती है | अंगुलिमाल कहता है – रुक जाओ, भगवान बुद्ध न रुकते है | पुनः अंगुलिमाल जोर से चिल्ला कर कहता है – ठहर जा | भगवान बुद्ध न रुकते है और कहते है – मै तो कब का ठहरा हुवा हूँ, तू कब ठहरेगा और कहानी कहती है कि ये सुनते ही अंगुलिमाल भगवान बुद्ध के चरणों में गिर जाता है एवं उनका शिष्य बन जाता है | बचपन में ये कहानी समझ में न आई थी | ऐसा लगा कि ऐसा तो मै भी कह सकता था तो क्या अंगुलिमाल मेरे भी चरण में गिर जाता | ऐसा कैसे संभव हुआ ? किन्तु असल बात बाद में समझ आई |

उर्जा उच्चतर से निम्नतर की और प्रवाहित होती है, जैसे पानी ऊपर से नीचे बहता है | बुद्ध की प्राण उर्जा अंगुलिमाल की प्राण उर्जा से उच्च थी | बुद्ध के पहले जितने भी साधू-संत उस इलाके से होकर गुजरे थे, वे उतने अच्छे संत नहीं थे जितना बुरा डाकू था अंगुलिमाल | अतः उर्जा के तल पर वे साधू, अंगुलिमाल से कम उर्जावान थे | अतः जब वे अंगुलिमाल के सामने आये तो उर्जा का प्रवाह उच्चतर से निम्नतर अर्थात अंगुलिमाल से उन साधू-संतो की तरफ हुआ | अंगुलिमाल के पास क्रोध की उर्जा थी, हिंसा की उर्जा थी जिसके चपेट में वे आ गए और मारे गए | जब बुद्ध सामने आये तो बात उल्टी हो गयी | बुद्ध जितने अच्छे थे उतना बुरा अंगुलिमाल नहीं था | उर्जा के तल पर बुद्ध अंगुलिमाल से ज्यादा उर्जावान थे | अतः जब बुद्ध सामने आये तो उर्जा का प्रवाह उल्टा ही गया – बुद्ध से अंगुलिमाल की तरफ | बुद्ध के पास प्रेम की उर्जा थी, शांति की उर्जा थी, दया की उर्जा थी | अंगुलिमाल अपना हिंसा उन्हें न दे सका वल्कि उनके प्रेम के चपेटे में आ गया | अंगुलिमाल ने उर्जा को बुद्ध से लिया, दे नहीं सका और यही कारण है कि अंगुलिमाल ने बुद्ध से प्रेम लिया, शांति लिया किन्तु अपना क्रोध न दे सका |

तो यह है मात्र दर्शन लाभ का फल |

cont….Er. D.K. Shrivastava, 9431000486, 24.7.10 (Dhiraj kumar shrivastava )

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