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सुखमय जीवन की कुंजियाँ : Key to Happy लाइफ : जिए तो ऐसे जिए |

Posted On: 6 Jul, 2010 Others में

Dharm & religion; Vigyan & Adhyatm; Astrology; Social researchDharm & Religion- both are not the same; Vigyan & Adhyatm - Both are the same.....

Er. D.K. Shrivastava Astrologer

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सुखमय जीवन की कुंजियाँ
Key to Happy Life

१. ब्रहममुहूर्त (सूर्योदय के २ घंटा पहले) में जगे | सूर्योदय होने तक कभी न सोये | यदि किसी दिन ऐसा हो जाए तो प्रायचित करें, गायत्री मंत्र का जप करें। उपवास करें या फलादि पर ही निभर्र करें ।

२. चेहरे को धो ले |

३. सुबह सोकर उठने के बाद पहले माता-पिता, आचार्य तथा गुरुजनो को प्रणाम करें |

४. बिना कुछ खाए पानी पिए |

५. दैनिक नित्य कर्म (मल त्याग ) को जाये |

६. दांतों को साफ़ करें | मौन रह कर दंतधावन करें।

७. नित्य ब्यायाम करे |

८. व्यायाम के १५ मिनट बाद स्नान करे | स्नान के बाद तेल आदि की मालिश न करें यदि करनी हो तो स्नान से पहले करें। गीले कपडे न पहने।

९. स्नानादि से निवृत हो कर प्रात:कालीन संध्या करें। दंतधावन किए बिना देवपूजा व संध्या न करें। नियमित त्रिकाल संध्या करने वालों को रोटी रोजी के लिए कभी हाथ नही फैलाना पडता ऐसा शास्त्र वचन है।

१०. स्नान के बाद नास्ता करे | नास्ते में फल/अंकुरित अनाज ले |

११. अपने दैनिक कर्मो की शुरुवात करें |

१२. खानपान आवश्यकतानुसार करे | एक बार खाए योगी, दो बार खाए भोगी और बार बार खाए रोगी |

१३. खाने के पहले पानी पिए, बीच में या बाद में नहीं | पहले पिए योगी, बीच में पिए भोगी और बाद में पिए रोगी |

१४. रात में कम से कम ६ घंटे की एक अच्छी नींद ले | जल्दी सोये और जल्दी जागें | दिन में कभी न सोये | कई लोग देर रात तक जागते है और सुबह देरी से उठ्ते है। ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए उचित नही है रात को समय पर सो कर सुबह जल्दी उठना चाहिए। कम से कम सूर्योदय होने से पूर्व बिस्तर छोड देना चाहिए। सूर्योदय के बाद तक बिस्तर पर पडे रहना स्वास्थ्य की कब्र खोदना है।

१५. सदाचार से मनुष्य को आयु, लक्ष्मी तथा इस लोक और परलोक मे कीर्ति की प्राप्ति होती है । दुराचारी मनुष्य इस संसार मे लम्बी आयु नही पाता, अत: मनुष्य यदि अपना कल्याण करना व सुखमय जीवन जीना चाहता हो तो उसे सदाचार का पालन करना चाहिए । मनुष्य कितना ही बडा पापी क्यों न हो, सदाचार उस की बुरी प्रवृतियो को दबा देता है। सदाचार धर्मनिष्ठा तथा सच्चरित्र का लक्ष्ण है। सदाचार से धर्म उत्पन्न होता है और धर्म के प्रभाव से आयु की वृद्धि होती है। जो मनुष्य धर्म का आचरण करतें है और लोक कल्याणकारी कार्यो मे लगे रहते है, उनके दर्शन न हुए तो भी केवल नाम सुनकर मानव समुदाय उनसे प्रेम करने लगते है।

१६. जो मनुष्य नास्तिक, क्रियाहीन, गुरु और शास्त्र की आज्ञा का उलंघन करनेवाले, धर्म को न जानने वाले, दुराचारी, शीलहीन, धर्म की मर्यादा को भंग करने वाले तथा दुसरो वर्ण की स्त्रियों से संपर्क रखने वाले है, वे इस लोक मे अल्पआयु होते है , मरने के बाद नरक मे पड्ते है और सुखमय जीवन की कल्पना नही कर सकते ।

१७. ईष्या करने से, सूर्योदय के समय और दिन मे सोने से आयु क्षीण होती है। प्रतिदिन सूर्योदय से एक घंटा पहले जागकर धर्म और अर्थ के विषय मे विचार करें।

१८. किसी भी वर्ण के पुरुष को परायी स्त्री से संसग नही करना चाहिए। परस्त्री सेवन से मनुष्य की आयु जल्दी ही समाप्त होती है। इसके समान आयु को नष्ट करने वाला संसार मे दूसरा कोइ कार्य नही है। रजस्वला स्त्री के साथ कभी बातचीत न करें।

१९. नास्तिक मनुष्य के साथ कोइ प्रतिज्ञा न करें ।

२०. आसन को पैरों से खिंचकर या फटे आसन पर न बैठें।

२१. रात्री के समय हो सके तो स्नान न करें।

२२. जुठे मुँह पढना-लिखना, शयन करना, मस्तिष्क पर स्पर्श करना कदापी उचित नही है। यमराज कहते हैं कि जो मनुष्य जुठे मुँह उठकर दौड्ता है और स्वाध्याय करता है, मै उसकी आयु नष्ट करता हूँ और उसकी संतानो को भी छीनता हुँ ।

२३. एक चुप- सौ सुख; दूसरों की निंदा, बदनामी और चुगली कदापि न करें और नीचा न दिखायें । निंदा करना अधर्म बताया गया है, इसलिए दूसरो की और अपनी भी निंदा नही करनी चाहिए | क्रूरताभरी बातें न बोलें जिसके कहने से दुसरो को उद्धेग होता हो, वह रुखाई से भरी हुइ बात नरक मे ले जाने वाली होती है। उसे कभी मुँह से न निकालें। बाणो से बिंधा हुआ और फरसे से काटा हुआ वन पुन: अंकुरित हो जाता है, किन्तु दुर्वचन रुपी शस्त्र से किया हुआ भय़ंकर घाव कभी नही भरता।

२४. खुशी जैसी खुराक नही और चिंता जैसा कोइ गम नही! हरीनाम, रामनाम, और ओंकार के आचरण से बहुत सारी बिमारियां मिटती है, रोग प्रतिकारक शक्ति बढ्ती है, विकार क्षीण होते हैं, चित का प्रसाद बढता है एव आवश्यक योग्यताओ का विकास होता है। मन मे बसे बुरे विचारों का नाश होता है, मन की शुद्धि होती है और आत्मविश्वास बढता है।

२५. सब रोगों की एक दवाई, हँसना सीखो! दिन के शुरुआत मे २० मिनट तक हँसने से आप तरोताज़ा एंव उर्जा से भरपूर रहेंगें। हास्य आप का आत्मविश्वास बढ्ता है, बहुत सारी बिमारियों का नाश होता है, रोगो से लडने की क्षमता प्रदान करता है, मन प्रसन्न रहता है कार्यो मे जी लगने लगता है। जो दिल के पुराने रोगी हो, जिनके फेफडे रोगग्रस्त हो, क्षय रोग के मरीज़ हो, गर्भवती महिला, जिसने पेट का आँप्रेशन कराया हो व हार्ट के मरीज को ठाहके लगा कर नही हँसना चाहिए।

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