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गद्दार का अंजाम... और हम !!!

Posted On: 27 Nov, 2012 Others में

आर्यधर्मआर्य पुनर्जागरण का आह्वाहन

shailesh001

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इस २४ साल के दरिन्दे ने अकेले युद्ध छेड़ते, दुस्साहस की सीमायें लांघते हुए १६६ लोगो को सबसे हिंसात्मक मौत, जिसकी कल्पना वो मारे हुए या कोई अन्य मनुष्य, ताज होटल और रेस्तरां में खाते पीते, समय बिताते हुए कभी नहीं कर सकते थे, दे दी.. ऐसी सामूहिक मौत जो बस युद्धरत देशो की सीमाओं पर भीषण संघर्षो में अत्यंत प्रशिक्षित सैनिको के साथ ही देखी जा सकती है.. जब घातक हथियार संहार की लीला करते हैं ..ऐसी सामूहिक मौत जो इस देश ने कभी नहीं देखी थी, कम से कम अपने होश और अपने पलायनवादी दृष्टि की सीमा में तो कभी नहीं .. I
हमने दुनिया को दिखा दिया की हम भारतीय हजार सालो से अधिक समय से जो करते आये हैं उसमे हमारा कोई सानी नहीं… हारने मरने और अपमानित होने में.. हम न अपने देशवासियों को बचा पाते हैं, न अपने आश्रितों को और न विदेशी मेहमानों को..

cst

चार साल पहले देश के दुश्मन दस पाकिस्तानी आतंकवादियों में से एक मोहम्मद अजमल कसाब ने भारत देश के निर्दोष नागरिको के खिलाफ युद्ध छेड़कर सैकड़ो लोगो की जान ले ली थी… जिन हत्यारों को हजारो न्यूज चैनलों, हजारो चश्मदीदो और तो और करोड़ों भारतीयों यहाँ तक की अन्य कई करोड़ विदेशी दर्शकों तक ने देखा, जिन हत्यारों का जिन्दा पकड़ा गया एकमात्र साथी समूचे १२५ करोड़ के देश का हत्यारा दुश्मन था और सबके द्वारा देखा गया उसको भी सजा देने में भारतीयों को चार साल यानि लगभग डेढ़ हजार दिन लग गए… जो दुश्मन हत्यारा देश के नागरिकों को जान से मारने आया था उसे इस भारतीय न्याय व्यवस्था की वो सहूलियत दी गयी जो मात्र भारतीय नागरिकों के लिए होती है, देश के हत्यारे को सहानूभूति और हमदर्दी दिखाई गयी… देश के भाइयों बहनों को मारने वाले के लिए इसी देश के कुछ निवासियों के मन में दया आ रही थी… २०० इसी भारत देश के अजब आदमियों ने अजमल कसाब को माफ़ किये जाने के लिए राष्ट्रपति को प्रार्थना-ज्ञापन भेजते हैं —कॉलिन गोंजाल्वेज़, केटी थॉमस, अरुंधती रॉय, वंदना शिवा, मेधा पाटकर, नंदिता सेनगुप्ता, एके गांगुली,अशोक खोसला, विनय नायडू, राजेन्द्र सच्चर..…. आदि!
इन भारतीयों को किसी भारतीयों की जान लिए जाने का मतलब नहीं मालूम… इन्हें सीमा पर मारे गए हजारो सेना के वीर जवानो की जान का उनकी शहादत का मतलब नहीं मालूम.. उनको भारत के साधारण नागरिकों के मानविक अधिकारों के बारे में कुछ नहीं मालूम…

इस देश का मीडिया कहता है की बम्बई मुठभेड़ में मारे गए पुलिसवालों और कमांडो के पिता ने आतंकी कसाब की फांसी की मांग की है.. क्या कसाब कुछ चंद लोगों का अपराधी है? क्या कसाब बम्बई के कुछ परिवारों को निशाना बनाने के लिए समुद्र के रास्ते पाकिस्तान से हजारों मील दूर चल कर आया था? क्या कश्मीर में आतंकवादी का हथगोला मात्र किसी एक सैनिक के परिवार को अनाथ बनाने के लिए फटता है? आतंकियों की ए के सैंतालिस क्या आईटीबीपी या बीएसऍफ़ के जवान को व्यक्तिगत रंजिश वश मारने के लिए तडतडाती है? क्या सीमा पर और सीमा के अन्दर हो रहा युद्ध क्या किसी एक व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला है? इस धूर्त-दोगले मीडिया के लिए तो आतंकी घटना मात्र एक खबर है.. बम्बई का हमला, संसद पर हमला तो तमाशेबाज चैनलों का, जिनमे से अधिकतर विदेशी या विधर्मी चैनल हैं, टीआरपी बढ़ाने वाला मसाला मात्र है!! मीडिया को तो इससे भी बड़े हमलों का इंतजार है… और ऐसा ही इन्तजार कई और लोगों को है… पाकिस्तानी जिनकी जमीन से ये आतंकी बनाकर हमारे देश में भेजे जा रहे हैं, जहाँ के राजनीतिज्ञ इन हमलो के पीछे खड़े हैं..जहाँ का एक राजनेता इमरान खान कहता है की भारत अगर कश्मीर से दावा नहीं छोड़ेगा तो ऐसे और हमले होते रहेंगे!! और ऐसे पाकिस्तानियों से, इस देश के कुछ नेता जो बड़े लोकप्रिय कहलाये जाते हैं, लालू यादव और नीतीश कुमार गले मिलने में फख्र महसूस करते हैं .. ऐसे जनप्रतिनिधियों को भारत देश कहीं दिखाई नहीं देता.. उससे महान तो कोंग्रेस सरकार के चौखटे हैं जिन्हें मुसलमानों को खुश करने के लिए भारतीय नागरिको के हत्यारों देश के दुश्मनों का समर्थन करने में भी झिझक नहीं होती.. यह सरकार एक खुनी आतंकी को सजा देने में भी अपनी कायरता को अपनी राजनीतिक लालच में लपेटकर अपने राष्ट्रीय दायित्व और भारतीय नागरिको के प्रति अपने कर्त्तव्य से अँधा होने में भी शर्म नहीं करती.. यह सरकार मुसलमानों को भारत का दुश्मन बनने के लिए प्रेरित कर रही है.. और, उन बन चुके आतंकियों को संरक्षण देने में कुछ अन्य सरकारें कौंग्रेस का साथ दे रही हैं– उत्तर प्रदेश को ६०० साल पहले मटियामेट कर चुके इस्लामी गुंडों की गुलामी को आगे बढ़ने वाली उत्तर प्रदेश की सपा सरकार खुले आम चुनौती देकर दुस्साहस दिखाने वाले भीतरी आतंकियों को अपना समर्थन दे रहीं है..
क्या १३०० साल की कायरता और डर हमारे लहू में अभी तक बह रहा है ..क्या गुलामी और नपुंसकता हमारे रोम रोम का अकाट्य हिस्सा बन चूका है? ऐसा की, हम अपने दुश्मन को खुलकर सबके सामने मार भी नहीं सकते? जिस दुस्साहस से इस आतंकी ने हर भारतीय के अन्दर अपना भय स्थापित कर दिया और अपने नस्ल की दबंगई स्थापित कर दी ..जिस ‘मरदाना ढंग से’ उन आतंकियों ने, अपना दुस्साहस भरा दंभ भारतीयों पर ग़ालिब कर दिया… जिस तरह से एक दिन में हजार मील की समुद्री यात्रा कर अनबुझे रास्तो से सीधे भारत देश के दिल में हमला करके अपने मिशन के प्रति प्रतिबद्धता और हमारे भारत देश के प्रति घृणा खुलकर स्थापित कर दी.. क्या इस सरकार को इस अपराध की, जो भारत के लिए दुनिया का सबसे बड़ा अपराध होना चाहिए, एक बड़ी सजा पूरे देश के सामने और विश्व के सामने नहीं देनी चाहिए थी? अगर ये सरकारें सामने ऐसा कर रही हैं तो पीछे ये कितने आतंकी और उनके समर्थको को पोष रही होगी? क्यों ये सरकार आतंकियों के गढ़-पाकिस्तान को मासूम साबित करती है..उसके सहयोगी और यह सरकार खुद आतंकियों को हत्या करने और वो भी डंके की चोट पर, और देश से गद्दारी करने का लाइसेंस देती है? अंग्रेज भारत के दुश्मनों को उपाधि और परितोष बांटते रहे हैं..यह सरकार भी आज तक अपने चाटुकारों और देश के शत्रुओं को सम्मानित करती रही .. तो क्या वो अब आतंकवादियों को भी परमवीर सम्मान दे डालेगी ??

sed
क्या हम इस सरकार ऐसा ही करता रहते देखते रहेंगे?
क्यों नहीं उसने हमें अवसर दिया किसी दुश्मन की देह पर वो १६६ निशान बनाने की, उस के १६६ टुकड़े करने की, जो निशान उसने हमारी आत्मा पर बना दिए हैं?

क्या यह देश नाचने, गाने वाले भांड ही पैदा करेगा जो किसी जाहिल टीवी चैनल पर पाकिस्तानियों से सुर में सुर मिलाते है, जिस देश में विलासिता राष्ट्रीय सम्वेदनाओं पर भरी पड़ जाती हैं, जिस देश की राष्ट्रभक्ति गाने के मंच पर गद्दार विदेशियों के साथ मनोरंजन करने में प्रकट होती है क्या उससे यह आशा की जाये की कभी एक औसत नागरिक हमारे वीर शहीद क्रांतिकारियों के खालिस रूप में अपने देश के दुश्मनों से निपटने के लिए अपनी भुजाएं कसेगा?

क्या वीरों से बाँझ हुई यह भूमि सच्चे पूत पैदा करेगी..क्या हममे से कोई अपनी भूमि के लिए खड़ा होगा?

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