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अंश

Posted On: 26 May, 2015 Others में

saanjh aaiJust another weblog

shakuntlamishra

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144 Comments

गर तुम्हारा अंश हूँ मैं ,

मिट नहीं सकती हूँ तब मैं ।

मृत्यु तो बस तन  का रंग है ,

आती देती नूतन तन है !

तुम “अनंत “तो मैं भी “काल”हूँ

लौट धरा पर फिर आना है !!

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