blogid : 14516 postid : 796000

एक दिया ऐसा जलाएं......

Posted On: 23 Oct, 2014 Others में

saanjh aaiJust another weblog

shakuntlamishra

61 Posts

144 Comments

हम सब भारतवासी हर दीपावली पर्व पर प्रकाश की चाह में दीप जलातें हैं
,घी -तेल -सुगंघ के साथ पर अँधेरा बढ़ता ही जा रहा है ,क्या दीप कम या
अन्धकार बलवान है ? पूजा -पाठ ,विधि -विधान हमें प्रेम नहीं सीखा पा रहे हैं
क्यों की हमने अपने मन का दीपक तो जलाया ही नहीं है !
हम एक ऐसा दीप जलाएं इस दीपावली पर जो हमारे मन को प्रकाशित करे
_

मुझमे आलोक भरा
दूर होती है तमिस्रा !
मेरा नाम है -दीवा !!
मेरा मन है आज अनमना

मैं चाहूँ कर्तव्य निभाना –
प्रथम जलूं -वीरो के स्थल ,
फिर चाहूँ- सीमा पर जलना !
जहां जवान हैं -देश के प्रहरी
मैं चाहूँ हर तिमिर जलाना

छुपा अँधेरा जहाँ कही हो
कोना -कोना जगे ,प्रखर हो
ऐसे मुझे जलाना !
मुझको हैं तिमिर भगाना !!

परम्परा का दीप जलूं मैं
हर मानव की ख़ुशी बनु मैं
हर कुटिया का दिवस बनु मैं
ऐसे मुझे मानना !
मुझको हैं तिमिर भगाना !!

हर घर राजा राम समाये
पूरा देश अवध बन जाए
कोई दुःख न कही रह जाये
राम राज्य हर घर में आये

ये हैं मेरी कामना !
मुझको हैं तिमिर भगाना !!
मैं भी जलूं दीपमाला में

आपने राघव के आवन में
आलोकित हो उनके पथ में
नित्य जलूं नव आस्थान्जलि में
ऐसे मुझे चढ़ाना !

मुझको हैं तिमिर भगाना !!
सुख में ,दुःख में निर्भय विचरूँ
नयन -नयन पावन बन उतरूँ
प्रिय -जीवन मन भवन होकर

अन्धकार हैं शत्रु धरा पर
मुझसे ख़ुशी बढ़ाना !
मुझको हैं तिमिर भगाना !!

शकुंतला मिश्रा -एक दिया ऐसा जलाएं

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग