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मन विहंग

Posted On: 9 Aug, 2016 Others में

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shakuntlamishra

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मन का विहंग
नभ निस्तरंग
उड़ते प्रतिपल
भावो के दल
छलता है नित
तम शेष जाल
चेतन विहीन अपना ही मन
नित ही निज से प्रतिरोध करे
घटता क्षण -क्षण मानव जीवन
यह सत्य जान कर भी अजान ||

shakuntla mishra

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