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अपहरण का दंड नहीं

Posted On: 19 Dec, 2017 Others में

! मेरी अभिव्यक्ति !तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

शालिनी कौशिक एडवोकेट

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आमतौर पर आये दिन हम अपहरण -व्यपहरण सुनते रहते हैं .कानून में अपहरण के लिए Abduction व्  व्यपहरण के लिए Kidnapping शब्द है .हम अपहरण व् Kidnapping शब्द का ही इस्तेमाल करते हैं जबकि दोनों अलग-अलग शब्द हैं हमारे कानून भारतीय दंड संहिता में .

भारतीय दंड संहिता की धारा 359 में व्यपहरण का वर्णन है जिसे अंग्रेजी में Kidnapping कहते हैं जबकि धारा 362 में अपहरण का वर्णन है जिसे अंग्रेजी में Abduction कहते हैं .व्यपहरण व् अपहरण दोनों अलग अपराध हैं ,वैसे हम आम तौर पर जो देखते हैं वह अपहरण Abduction होता है जिसके लिए धारा 362 में कहा गया है –

”जो कोई किसी व्यक्ति को किसी स्थान से जाने के लिए बल द्वारा विवश करता है, या किन्हीं प्रवंचनापूर्ण उपायों द्वारा उत्प्रेरित करता है ,वह उस व्यक्ति का अपहरण करता है ,यह कहा जाता है .”

और कमाल इस बात का है कि इसे दंड संहिता में अपराध तो माना गया पर इसके लिए दंड निर्धारित नहीं किया गया .इसलिए यह अपराध ऐसा है जिसका भारतीय दंड संहिता में कोई दंड नहीं है ,यदि अपहरण का मकसद हत्या करना नहीं है ,यदि अपहरण का मकसद फिरौती मांगना नहीं है ,यदि व्यक्ति का गुप्त रीति से और सदोष परिरोध करने के आशय से अपहरण नहीं किया गया है ,यदि स्त्री को विवाह करने के लिए विवश करने के लिए अपहरण नहीं किया गया है

और यदि व्यक्ति का अपहरण घोर उपहति या दासत्व का लिए नहीं किया गया है .

अब आप सोचेंगे कि यदि इन सब वजह से अपहरण को संहिता में दण्डित किया गया है तो फिर कौन सी वजह रह गयी जिसे लेकर मैंने संहिता पर इस अपराध के दंड के लिए ऊँगली उठा दी ,मगर अगर आप ध्यान दें तो ये कमी आपको संहिता द्वारा इस अपराध की दी गयी परिभाषा में ही नज़र आ जाएगी जिसमे किसी व्यक्ति को कहीं से बलपूर्वक जाने को विवश करना अपहरण माना गया और किन्ही प्रवंचनापूर्ण उपायों द्वारा किसी व्यक्ति को कहीं जाने को उत्प्रेरित करना भी अपहरण माना गया और ये आप स्वयं सोचिये कि अगर किसी स्थान से किसी व्यक्ति को हटाना ही मकसद हो, जिससे उसकी अनुपस्थिति में कोई ऐसा कार्य किया जा सके जो उसकी उपस्थिति में नहीं हो सकता हो और उसे इन उपायों द्वारा वहां से हटा दिया जाये भले ही हटाकर कहीं बंद न किया जाये, कहीं सदोष परिरुद्ध न किया जाये ,कोई घोर उपहति न पहँचायी जाये इत्यादि तो क्या यह अपहरण की श्रेणी में नहीं आएगा ,मेरे अनुसार 100 % आएगा किन्तु वह अपराध दंडनीय नहीं है क्योंकि भारतीय दंड संहिता में इसके दंड का कोई उपबंध नहीं है .कृपया ये बात कानून बनाने वालों को भी ज़रूर बताएं .

शालिनी कौशिक

[कानूनी ज्ञान ]

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