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और प्रसन्नता जिसको कहते हैं सभी-contest

Posted On: 22 Feb, 2014 Others में

! मेरी अभिव्यक्ति !तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

शालिनी कौशिक एडवोकेट

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वो एक हंसी पल जब तुम्हे नज़दीक पाया था,

उमड़ आयी थी चेहरे पर हंसी,

सिमट आयी थी करीब जिंदगी मेरी;

मेरे अधरों पर हलकी सी हुई थी कम्पन;

मेरी आँखों में तेज़ी से हुई थी हलचल;

मेरा रोम-रोम घबराने लगा था;

मेरा मन भी भरमाने लगा था;

तभी किसी ने धीरे से ये कहा था ;

पहचाना मैं हूँ वह कली   ,

जो है तेरी बगिया में खिली;

और प्रसन्नता जिसको कहते  हैं  सभी

शालिनी कौशिक

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