blogid : 12172 postid : 789085

चिंता - चिता सम मानव की खातिर ,

Posted On: 25 Sep, 2014 Others में

! मेरी अभिव्यक्ति !तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

शालिनी कौशिक एडवोकेट

788 Posts

2130 Comments

मिटा देती है जीवन का
समस्त अस्तित्व चिंताएं ,
ये आ जाती हरेक मन में
बिना हम सबके बुलाये ,
सुकून का कोई भी पल
ये हम पर रहने न देती ,
तड़पने की टीस भरकर
ये हमको तोहफे हैं देती ,
नहीं बच सकते हम इनसे
नहीं कर सकते इनको दूर ,
ये तोड़ें स्वाभिमान सबका
ये सबकी खुशियां करती दूर ,
कही जाती है ये चिंता
चिता सम मानव की खातिर ,
घिरा जैसे कोई इनसे
हुआ शमशान में हाज़िर .

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग