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जिन्हें न शर्म लेश....

Posted On: 4 Apr, 2017 Others में

! मेरी अभिव्यक्ति !तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

शालिनी कौशिक एडवोकेट

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बहुत बार देखी हैं

हथेली की रेखाएं
किताबों में लिखा
जिन्हें सर्वश्रेष्ठ ,
उमर आधे से ज्यादा
है बीत गयी
खोया ही खोया
पाया बस क्लेश ,
नहीं कोई चाहत
है अब पाल रखी
नहीं लेना दुनिया से
है कुछ विशेष ,
सुकूँ से बिता लें
सम्मान से रह लें
जो चार दिन इस
जहाँ में अवशेष ,
मगर लगता लड़ना व्
भिड़ना पड़ेगा
सबक दे दें उनको
जिन्हें न शर्म लेश .

शालिनी कौशिक
(कौशल)

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