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पारिवारिक निपटान आलेख और मानस जायसवाल

Posted On: 13 Oct, 2017 Others में

! मेरी अभिव्यक्ति !तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

शालिनी कौशिक एडवोकेट

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मेरे पूर्व आलेख ‘ ‘मेमोरेंडम ऑफ़ फॅमिली सेटलमेंट-पारिवारिक निपटान के ज्ञापन का महत्व ” को लेकर पाठकों की उत्साहवर्धक टिप्पणी प्राप्त हुई लेकिन इसके साथ ही एक पाठक ”श्री मानस जायसवाल” जी के तो कई प्रश्न थे जिनके निवारण हेतु मैं एक नयी पोस्ट आप सभी से साझा कर रही हूँ .पहले श्री मानस जायसवाल जी की टिप्पणी-
बहुत ही उपयोगी लेख|
लेकिन क्या ऐसे “जुबानी खानदानी बंटवारे का यादाश्तनामा” लिखित में बनने के बाद इसको लागू कराने की कोई समयसीमा होती है ??
क्या इसे रजिस्टर्ड कराना ज़रूरी है?
क्या इसमें सभी सम्पतियों का हवाला होना ज़रूरी है?
इस नाम के अग्रीमेंट को हम “Family Settlement” कहेंगे या “Family Partition Deed”
तो आप सभी की जानकारी के लिए बता दूँ कि बहुत सी बार घर में अपनेआप हिस्से बांटकर रहना आरम्भ कर देते हैं तब बाद में ये याद रहे कि हमने क्या बाँटा है इसे एक कागज पर लिख लेते हैं ये कागज सादा भी हो तो कोई फर्क नहीं पड़ता पर इस पर घर से बाहर के कम से कम दो लोगों के हस्ताक्षर होने चाहियें और इस पर सभी हिस्सेदारों के हस्ताक्षर भी होने चाहिए साथ ही जो संपत्ति जैसे-जैसे बांटी गयी है उसका विवरण उसके कब्जेदार के नाम से होना चाहिए .
ये एक याददाश्त पत्र है और मेरे पिछले आलेख के अनुसार उच्चतम न्यायालय व् इलाहाबाद उच्चन्यायालय ने भी इसे रजिस्टर्ड कराने से मुक्ति प्रदान की है ,हाँ अगर हम पहले कागज लिखित में तैयार करते हैं और तब घर बांटते हैं तब उसका रजिस्ट्रेशन आवश्यक है .
और याददाश्त पत्र के लागू कराने की कोई समय सीमा नहीं होती क्योंकि इसके लिखने से पहले ही उन परिस्थतियों जन्म ले चुकी होती हैं और इसे पारिवारिक बंटवारा कहेंगे अर्थात ”FAMILY SETTLEMENT ”

शालिनी कौशिक
[कानूनी ज्ञान ]

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