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महबूबा यहाँ सबकी बस कुर्सी सियासत की ,

Posted On: 27 Mar, 2014 Others में

! मेरी अभिव्यक्ति !तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

शालिनी कौशिक एडवोकेट

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फुरसत में तुम्हारा ही दीदार करते हैं ,

खुद से भी ज्यादा तुमको हम प्यार करते हैं।

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अपनों से ज़ुदा होने की फ़िक्र है नहीं ,

तुम पर ही जान अपनी निसार करते हैं।

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झुकती हमारी गर्दन तेरे ही दर पे आकर ,

हम तेरे आगे सिज़दा बार -बार करते हैं।

…………………………..

ये ज़िंदगी है कितनी हमको खबर नहीं है ,

पलकें बिछाके फिर भी इंतज़ार करते हैं।

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बालों में है सफेदी ,न मुंह में दाँत कोई ,

खुद को तेरी कशिश में तैयार करते हैं।

……………………………………….

महबूबा यहाँ सबकी बस कुर्सी सियासत की ,

पाने को धक्का -मुक्की और वार करते हैं।

……………………………………….

”शालिनी ”देखती है देखे अवाम सारी ,

बहरूपिये बन -ठन कर इज़हार करते हैं।

…………………………………

शालिनी कौशिक

[कौशल ]

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