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मौके -बेमौके ''शालिनी''ने भी कोशिश ये की है .

Posted On: 24 Feb, 2015 Others में

! मेरी अभिव्यक्ति !तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

शालिनी कौशिक एडवोकेट

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बात न ये दिल्लगी की ,न खलिश की है ,
जिंदगी की हैसियत मौत की दासी की है .
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न कुछ लेकर आये हम ,न कुछ लेकर जायेंगें ,
फिर भी जमा खर्च में देह ज़ाया की है .
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पैदा किया किसी ने रहे साथ किसी के ,
रूहानी संबंधों की डोर हमसे बंधी है .
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नाते नहीं होते हैं कभी पहले बाद में ,
खोया इन्हें तो रोने में आँखें तबाह की हैं.
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मौत के मुहं में समाती रोज़ दुनिया देखते ,
सोचते इस पर फ़तेह हमने हासिल की है .
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जिंदगी गले लगा कर मौत से भागें सभी ,
मौके -बेमौके ”शालिनी”ने भी कोशिश ये की है .
…………………………………………………………………
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

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