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ये प्रेम जगा है .

Posted On: 24 May, 2014 Others में

! मेरी अभिव्यक्ति !तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

शालिनी कौशिक एडवोकेट

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ज़रुरत पड़ी तो चले आये मिलने
न फ़ुरसत थी पहले
न चाहत थी जानें
हैं किस हाल में मेरे अपने वहां पर
खिसकने लगी जब से पैरों की धरती
उडी सिर के ऊपर से सारी छतें ही
हड़पकर हकों को ये दूजे के बैठे
झपटने लगे इनसे भी अब कोई
किया जो इन्होने वो मिलने लगा है
तो अपनों की खातिर ये प्रेम जगा है .

………………………………….

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

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