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हिन्दू विधवा पुनर्विवाह बाद भी उत्ताधिकारी

Posted On: 21 Jan, 2018 Others में

! मेरी अभिव्यक्ति !तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

शालिनी कौशिक एडवोकेट

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एक सामान्य सोच है कि यदि हिन्दू विधवा ने पुनर्विवाह कर लिया है तो वह अपने पूर्व पति की संपत्ति को उत्तराधिकार में प्राप्त नहीं कर सकती है किन्तु हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम कहता है कि यदि विधवा ने पुनर्विवाह कर लिया है तब भी वह उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति से निर्निहित नहीं हो सकती है .इन द   मैटर ऑफ़ गुड्स ऑफ़ लेट घनश्याम दास सोनी ,2007  वी.एन.एस. 113  [इलाहाबाद] में कहा गया है कि विधवा हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की प्रथम अनुसूची में प्रथम श्रेणी के वारिस के रूप में अपने पति की परिसम्पत्तियों और प्रत्ययों के प्रशासन-पत्र की हक़दार है   और विधवा के इसी अधिकार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने उपरोक्त मामले में निर्णीत किया है .

मोटर वेहिकल एक्ट 1988  की धारा 166  कहती है –

केंद्र सरकार अधिनियम

मोटर वाहन अधिनियम, 1 9 88 में धारा 166

166. मुआवजे के लिए आवेदन.-

(1) धारा 165 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकृति के दुर्घटना से उत्पन्न होने वाली मुआवजे के लिए आवेदन किया जा सकता है-

(ए) उस व्यक्ति द्वारा जिसने चोट कायम रखी है; या

(बी) संपत्ति के मालिक द्वारा; या

(सी) जहां मौत दुर्घटना से हुई है, मृतक के सभी या किसी भी कानूनी प्रतिनिधि द्वारा; या

(डी) किसी भी एजेंट द्वारा, जिसे व्यक्ति घायल व्यक्ति या मृतक के सभी या किसी भी कानूनी प्रतिनिधि द्वारा अधिकृत किया गया है, जैसा भी मामला हो: बशर्ते कि जहां मृतक के सभी कानूनी प्रतिनिधि मुआवजे के लिए किसी भी ऐसे आवेदन में शामिल नहीं हुए हों, आवेदन मृतक के सभी कानूनी प्रतिनिधियों के लाभ या इसके लिए किया जाएगा और जो कानूनी प्रतिनिधि शामिल नहीं हैं, उन्हें आवेदन के उत्तरदाताओं के रूप में लागू किया जाएगा।

[(2) उप-धारा (1) के तहत प्रत्येक आवेदन दावेदार के विकल्प पर बनाया जाएगा, या तो दावे के लिए न्यायाधिकरण जो उस क्षेत्र पर अधिकार क्षेत्र का है जिसमें दुर्घटना हुई है, या स्थानीय सीमा के भीतर दावा ट्रिब्यूनल जिसका अधिकार क्षेत्र दावेदार रहता है या व्यवसाय करता है या जिसके क्षेत्राधिकार प्रतिवादी रहते हैं, की स्थानीय सीमाओं के भीतर रहता है, और इस प्रकार के रूप में होगा और ऐसे विवरण शामिल होंगे जिन्हें निर्धारित किया जा सकता है: बशर्ते कि जहां धारा 140 के तहत मुआवजे के लिए कोई दावा नहीं किया जाता है आवेदन, आवेदन में आवेदक के हस्ताक्षर से पहले तत्काल प्रभाव के लिए एक अलग बयान शामिल होगा।]

3 [****]

[(4) दावा ट्रिब्यूनल उप-धारा के तहत उसे अग्रेषित किए गए दुर्घटनाओं की किसी भी रिपोर्ट का इलाज करेगा ( 6) धारा 158 के तहत इस अधिनियम के तहत मुआवजे के लिए एक आवेदन के रूप में।]

इस प्रकार हिन्दू विधवा पुनर्विवाह के बाद भी अपने पूर्व पति की संपत्ति से निर्निहित नहीं हो सकती उसे पुनर्विवाह के बाद भी उसकी उस संपत्ति में हिस्सा मिलेगा जो उसके पति की उसके साथ विवाह के समय थी .

शालिनी कौशिक

[कानूनी ज्ञान ]


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