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मोदीः राजधर्म नहीं चुरा पा रहे?

Posted On: 6 Feb, 2014 Others में

बात पते की....भारत के संविधान भाग-3 की धारा 25 से 30 यदि भारत की असुरक्षा का कारण बन जाए तो हमें इसे पुनः परिभाषित करने की जरूरत है।- शम्भु चौधरी

Shambhu Choudhary

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मोदीः राजधर्म नहीं चुरा पा रहे?
आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी सरचढ़ कर बोलने लगी। जहाँ कांग्रेस पार्टी बिल पर बिल लाकर देश को चुनाव की तैयारी में जूटी है। अभी से बकवास विज्ञापनों के माध्यम से मीडिया व समाचार पत्रों का मुंह बंद कर, राहुल बाबा के चेहरे पर करोंड़ों का पाउडर पोतने में लगी है। वहीं ‘आप’ के देशभर में बढ़ते प्रभाव के कारण भाजपा की बैचेनी भी साफ झलकने लगी है। दिल्ली को राजनीति का दंगल बना देने वाली भाजपा पिछले 15 साल खुद दिल्ली को लूटती रही, फिर शीला दीक्षित की सरकार के साथ मिलकर 15 साल दिल्ली की जनता को जमकर लूटा। अब दोनों पार्टियाँ मिलकर ‘आप’ की सरकार गिराने में लगी है। मामला देश उन उद्योगिक घरानों से जूड़ा है जिनके बलबुते पर इनकी पार्टी का खर्चा चलता है।
वैसे तो देश में राजनीति पार्टीयों की भरमार है। सभी अपने-अपने क्षेत्र में कोई 20 सीट लाने का दावा ठोक रही है तो कोई 30 सीट, कोई 40 सीट। सबसे मजे की बात है की कांग्रेस पार्टी को ‘‘लोहे की टक्कर’’ देने वाली भाजपा (मोदी) खेमा आगामी लोकसभा चुनाव में 272 सीटें लाने का दावा ठोक रही है। जबकी भाजपा (अडवाणी) खेमा चुपचाप मजे लेने में। इस दावे की पोल खोलने के लिये अडवाणी खेमा कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेगा। बिहार में जदयू, बंगाल से ममता, महाराष्ट्र से शिवसेना और जम्मू कश्मीर के फारूक अब्दुल्ला कुछ ऐसे राज्य हैं जहां से कुल 50-60 सीटें ऐसी है जिसका झूकाव अडवाणी खेमे की तरफ है। 272 के आंकड़ें को पार करने के लिये इन सीटों की जरूरत पडेगी।
दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी की तरफ से अभी तक कोई दावा प्रस्तुत नहीं किया गया कि कांग्रेस को आगामी आम चुनाव में कितनी सीटें मिलेंगी? कांग्रेस अभी तक इस उलझन में है कि वह किसे प्रधानमंत्री पद का उम्मिदवार बनायें। जबकि कांग्रेसी चम्मचे राहुल गांधी को अभी से ही अपना प्रधानमंत्री मान रहें हैं। इन चम्मच छाप नेताओं ने देश में अपनी इतनी अच्छी छवि बना रखी है कि इनको गांधी परिवार के बहार देखना भी बेईमानी होगी।
उघर सीपीएम एवं सीपीआई हर तरफ हाथ-पांव मारने में लगी है कि किसी प्रकार उसे 20-30 सीटें मिल जाये। अपने खुद के जो राज्य थे पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा एवं केरल इन तीनों राज्यों में इनका जनाधार काफी नीचे खिसक चुका है। प्रकाश करात के अहंकार ने सीपीएम को पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा से सत्ता बेदखल ही नहीं किया संगठन को भीतर से कमजोर भी कर दिया है।
‘इंडिया फस्ट’ का नारा देने वाले भाजपा के इकलोते नेता नरेन्द्र मोदी जी कल ही चुनावी सभा करने बंगाल आये। बंगाल की 42 लोकसभा सीटों पर अपना मजबूत उम्मिदवार भी ठीक से खड़ा कर पाने में असमर्थ,  बंगाल की भाजपा कोलकाता के बिग्रेड परेड मैदान के आधे हिस्से को बड़ी मसक्कत करने के बाद भी ठंग से नहीं भर पाई,  मोदी जी ने बंगाल की जनता को आह्वान किया कि वे सभी 42 सीट उनको झौली में भर दें।
सवाल उठता है कि चुनाव मोदी जी लड़ रहे है कि भाजपा लड़ रही है? मैं और मेरा गुजरात से मोदी आज तक ऊपर नहीं उठ पाये हैं। बिहार जातें हैं तो खुद को गोबंशी कह कर वोट मांगते हैं। बंगाल आये तो ममता दीदी का परिवर्तन का नारा चुरा लिया। मोदीजी ने कहा कि ‘‘अबकि दिल्ली में परिवर्तन की बारी’’। यूपी में गये तो अजित सिंह का गन्ना चुरा लाये। कहीं से ईमान चुराया तो कहीं से गरीबों का सम्मान चुराया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि मोदी जी कांग्रेस के सरदार पटेल तक को चुरा कर भरे बाजार में बेच दिया, कांग्रेसियों की हिम्मत तक नहीं हुई की मोदी को जबाब तक दे सके।
भले ही मोदी जी ने अपनी पार्टी से सभी कद्दवार नेताओं को क्रमवद्ध अपने रास्ते से हटा दिया हो। भले ही भाजपा, मोदी के पीछे भागती भी भीड़ को देख के ललायित हो रही हो कि अबकि नैया ‘रामजी’ के भरोसे नहीं ‘मोदीजी’ के भरोसे पार लगेगी, भले ही राजनाथ सिंह को आगे-पीछे मोदी ही मोदी दिखाई देतें हों। पर इतना तो सच है कि मोदी जी अभी तक अटल जी के एक छोटे से अटल वाक्य ‘‘ राज धर्म का पालन हो’’ को नहीं चुरा पाये। जो आगामी चुनाव का गणित है। जयहिन्द!
– शम्भु चौधरी 06.02.2014

भले ही मोदी जी ने अपनी पार्टी से सभी कद्दवार नेताओं को क्रमवद्ध अपने रास्ते से हटा दिया हो। भले ही भाजपा, मोदी के पीछे भागती  भीड़ को देख के ललायित हो रही हो कि अबकि नैया ‘रामजी’ के भरोसे नहीं ‘मोदीजी’ के भरोसे पार लगेगी, भले ही राजनाथ सिंह को आगे-पीछे मोदी ही मोदी दिखाई देतें हों। पर इतना तो सच है कि मोदी जी अभी तक अटल जी के एक छोटे से अटल वाक्य ‘‘ राज धर्म का पालन हो’’ को नहीं चुरा पाये। जो आगामी चुनाव का गणित है।

आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी सरचढ़ कर बोलने लगी। जहाँ कांग्रेस पार्टी बिल पर बिल लाकर देश को चुनाव की तैयारी में जूटी है। अभी से बकवास विज्ञापनों के माध्यम से मीडिया व समाचार पत्रों का मुंह बंद कर, राहुल बाबा के चेहरे पर करोंड़ों का पाउडर पोतने में लगी है। वहीं ‘आप’ के देशभर में बढ़ते प्रभाव के कारण भाजपा की बैचेनी भी साफ झलकने लगी है। दिल्ली को राजनीति का दंगल बना देने वाली भाजपा पिछले 15 साल खुद दिल्ली को लूटती रही, फिर शीला दीक्षित की सरकार के साथ मिलकर 15 साल दिल्ली की जनता को जमकर लूटा। अब दोनों पार्टियाँ मिलकर ‘आप’ की सरकार गिराने में लगी है। मामला देश उन उद्योगिक घरानों से जूड़ा है जिनके बलबुते पर इनकी पार्टी का खर्चा चलता है।

वैसे तो देश में राजनीति पार्टीयों की भरमार है। सभी अपने-अपने क्षेत्र में कोई 20 सीट लाने का दावा ठोक रही है तो कोई 30 सीट, कोई 40 सीट। सबसे मजे की बात है की कांग्रेस पार्टी को ‘‘लोहे की टक्कर’’ देने वाली भाजपा (मोदी) खेमा आगामी लोकसभा चुनाव में 272 सीटें लाने का दावा ठोक रही है। जबकी भाजपा (अडवाणी) खेमा चुपचाप मजे लेने में। इस दावे की पोल खोलने के लिये अडवाणी खेमा कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेगा। बिहार में जदयू, बंगाल से ममता, महाराष्ट्र से शिवसेना और जम्मू कश्मीर के फारूक अब्दुल्ला कुछ ऐसे राज्य हैं जहां से कुल 50-60 सीटें ऐसी है जिसका झूकाव अडवाणी खेमे की तरफ है। 272 के आंकड़ें को पार करने के लिये इन सीटों की जरूरत पडेगी।

दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी की तरफ से अभी तक कोई दावा प्रस्तुत नहीं किया गया कि कांग्रेस को आगामी आम चुनाव में कितनी सीटें मिलेंगी? कांग्रेस अभी तक इस उलझन में है कि वह किसे प्रधानमंत्री पद का उम्मिदवार बनायें। जबकि कांग्रेसी चम्मचे राहुल गांधी को अभी से ही अपना प्रधानमंत्री मान रहें हैं। इन चम्मच छाप नेताओं ने देश में अपनी इतनी अच्छी छवि बना रखी है कि इनको गांधी परिवार के बहार देखना भी बेईमानी होगी।

उघर सीपीएम एवं सीपीआई हर तरफ हाथ-पांव मारने में लगी है कि किसी प्रकार उसे 20-30 सीटें मिल जाये। अपने खुद के जो राज्य थे पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा एवं केरल इन तीनों राज्यों में इनका जनाधार काफी नीचे खिसक चुका है। प्रकाश करात के अहंकार ने सीपीएम को पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा से सत्ता बेदखल ही नहीं किया संगठन को भीतर से कमजोर भी कर दिया है।

‘इंडिया फस्ट’ का नारा देने वाले भाजपा के इकलोते नेता नरेन्द्र मोदी जी कल ही चुनावी सभा करने बंगाल आये। बंगाल की 42 लोकसभा सीटों पर अपना मजबूत उम्मिदवार भी ठीक से खड़ा कर पाने में असमर्थ,  बंगाल की भाजपा कोलकाता के बिग्रेड परेड मैदान के आधे हिस्से को बड़ी मसक्कत करने के बाद भी ठंग से नहीं भर पाई,  मोदी जी ने बंगाल की जनता को आह्वान किया कि वे सभी 42 सीट उनको झौली में भर दें।

सवाल उठता है कि चुनाव मोदी जी लड़ रहे है कि भाजपा लड़ रही है? मैं और मेरा गुजरात से मोदी आज तक ऊपर नहीं उठ पाये हैं। बिहार जातें हैं तो खुद को गोबंशी कह कर वोट मांगते हैं। बंगाल आये तो ममता दीदी का परिवर्तन का नारा चुरा लिया। मोदीजी ने कहा कि ‘‘अबकि दिल्ली में परिवर्तन की बारी’’। यूपी में गये तो अजित सिंह का गन्ना चुरा लाये। कहीं से ईमान चुराया तो कहीं से गरीबों का सम्मान चुराया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि मोदी जी कांग्रेस के सरदार पटेल तक को चुरा कर भरे बाजार में बेच दिया, कांग्रेसियों की हिम्मत तक नहीं हुई की मोदी को जबाब तक दे सके।

भले ही मोदी जी ने अपनी पार्टी से सभी कद्दवार नेताओं को क्रमवद्ध अपने रास्ते से हटा दिया हो। भले ही भाजपा, मोदी के पीछे भागती भीड़ को देख के ललायित हो रही हो कि अबकि नैया ‘रामजी’ के भरोसे नहीं ‘मोदीजी’ के भरोसे पार लगेगी, भले ही राजनाथ सिंह को आगे-पीछे मोदी ही मोदी दिखाई देतें हों। पर इतना तो सच है कि मोदी जी अभी तक अटल जी के एक छोटे से अटल वाक्य ‘‘ राज धर्म का पालन हो’’ को नहीं चुरा पाये। जो आगामी चुनाव का गणित है।  जयहिन्द!  – शम्भु चौधरी 06.02.2014

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