wefwe
blogid : 13150 postid : 1263637

जातीय खांचे से निकल पाएगा गंगोता समाज (आंखों देखी)

Posted On: 27 Jan, 2019 Common Man Issues में

om namh shiwayDil se

shankar dayal mishra

5 Posts

7 Comments

भागलपुर लोकसभा क्षेत्र के बिहपुर विधानसभा क्षेत्र में नारायणपुर प्रखंड है। इसका एक पंचायत है बैकठपुर-दुधैला। यहां के संजय मंडल से एक क्लीनिक में मुलाकात हो जाती है। संजय के हाथ में गहरी चोट थी और मेरे पिताजी के कमर की हड्डी टूटी थी। मेरे पिताजी के अत्यंत वृद्ध अवस्था को देखकर संजय में कोई संवेदना जगी और वे मुझसे मेरे पिता के साथ हुई घटना की बात करने लगे। हालांकि जीवन में कभी किसी की सहानुभूति बटोरने की इच्छा नहीं रही, बल्कि ऐसी इच्छा रखने वालों को काफी हेय दृष्टि से देखता हूं, पर हमउम्र संजय के दर्द बांटने वाले भाव ने प्रभावित किया। (उस दिन समझा कि अगर कोई आपसे आपके कष्ट में आपका हालचाल ले आप उसके प्रति आकर्षित होंगे, यह शायद मनुष्य का स्वभाव है।)

बहरहाल मैंने भी उनके चोट के बारे में पूछा। डॉक्टर साहब के आने में समय था। बातें होने लगी। मैंने उनके प्रोफेशन बारे में पूछा और उन्होंने मेरे बारे में। वे शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उनके साथ हुई सहानुभूति भरे माहौल में बातचीत का ही असर कहें कि कार्यक्षेत्र से अलग स्थान पर जीवन में पहली बार मैंने खुद से किसी को अपने प्रोफेशन के बारे में सही बताया। और उन्होंने जैसे ही जाना कि मैं पत्रकार हूं, फिर क्या राजनीति शुरू हो गई।

वे बताने लगे- हमारे पंचायत में करीब पांच हजार वोटर हैं। सभी के सभी गंगोता जाति के हैं। चुनावों में वोट और बेटी जात को वाली फीलिंग जोर मारने लगती है। आशय यह कि यहां के वोटर विधानसभा और लोकसभा चुनावों में एकमुश्त वोट अपने स्वजातीय उम्मीदवार को देते हैं। पिछले पांच विधानसभा चुनाव में राजद से इनके स्वजातीय उम्मीदवार किसी न किसी रूप में बूलो मंडल रहे थे। चार बार वे खुद थे और पांचवीं बार यानी 2015 में उनकी पत्नी वर्षा रानी। इसके पहले तीन बार बूलो विधायक बने। इसमें एक बार विधानसभा का ही गठन नहीं हुआ। जबकि एक बार वे इंजीनियर शैलेंद्र से हारे। पर यहां से हर बार बूलो को ही एकमुश्त वोट मिला। इसी प्रकार 2014 के लोकसभा चुनाव में बूलो राजद प्रत्याशी थे। उन्हें सांसद बनाने में स्वजातीय वोटरों की गोलबंदी जगजाहिर रही। इसमें बैकठपुर-दुधैला के लोगों ने उन्हें एकमुश्त वोट दिया।

संजय पूरे रौ में थे। बहुत देर तक चुपचाप सुनने के बाद मैंने उन्हें रोका। उनसे पूछा, तो जो आप कह रहे हैं उसमें नया क्या है? आप यह बता क्यों रहे हैं? सिर पर चुनाव है फिर वही होगा न जो पहले होता आया है?
तब संजय कहते हैं कि अब स्थिति बदली है। हमारे यहां के लोग खासकर युवा शिक्षित हो रहे हैं। कब तक जातिगत खांचे में डालकर नेता वोट ले पाएंगे? बूलो जी ने क्या विकास किया है इलाके में? इसबार तो उन्हें हिसाब देना ही होगा। संजय बता रहे थे कि उनका पंचायत कटाव प्रभावित है। पिछले दिनों पूरा पंचायत कटाव से त्राहि-त्राहि कर रहा था। मध्य विद्यालय कटकर गंगा में समा गया। इसका वीडियो वायरल भी हुआ। पर बूलो जी पंचायत के लोगों का आंसू पोछने तक नहीं आए। जबकि हमसब जानते हैं कि कटाव और कटावरोधी कार्यों के प्रति उनका विशेष झुकाव रहता है। संजय के मुताबिक हमें अपने प्रखंड मुख्यालय यानी नारायणपुर पहुंचने के लिए अभी भी 15 किमी पैदल चलना पड़ता है।

तभी मुझे सहसा बिहपुर का ही शहजादपुर ध्यान आया। मैंने उन्हें टोका। जरा शहजादपुर पंचायत के लोगों बारे में सोचिए। वे कितने समर्पित हैं वोट-बेटी वाले भाव पर। अधिकतर गंगोता जाति के ही हैं। इनका प्रखंड मुख्यालय नाथनगर है। इन्हें तो तीन विधानसभा बिहपुर, गोपालपुर और भागलपुर का 75 किमी लांघकर करके अपने प्रखंड मुख्यालय पहुंचना पड़ता है। पर वे भी बूलो जी को ही वोट देते हैं।
वैसे मुझे ध्यान आता है कि इस मुद्दे को विधायक के तौर पर इंजीनियर शैलेंद्र ने विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाया था। वे इस समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयासरत दिख रहे थे। पर अगली चुनाव में वे हार गए। जातिगत खांचे में बंटे बैकठपुर-कठैला और शहजादपुर के वोटरों ने भी उन्‍हें वोट नहीं दिया था।

मेरे यह बताने पर संजय कहते दुबारा कहते हैं कि हमारी जाति के युवा भी अब शिक्षित हो रहे हैं। हम समझ रहे हैं कि जाति और विकास दो अलग-अलग चीजें हैं। जाति के नाम पर सिर्फ बूलो जी ने अपना विकास किया है। जाति के लोग जहां थे अधिकतर वहीं हैं।
संजय की बातें सुनने में अच्छी लग सकती है। पर इतिहास और राजनीतिक सच जातिगत खांचों में उलझा समाज ही है। चुनाव अभी कुछ दूर है। ऐसा कहकर संजय अपने नेता बूलो मंडल पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं या फिर गंगोता समाज के युवा अपने विकास के लिए जातिगत खांचे से बाहर निकलकर विकास को तरजीह देगी, यह तो चुनाव में ही पता चलेगा।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग