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जूते चप्पलों का तिलिस्म

Posted On: 29 Apr, 2011 Others में

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जूते चप्पलों का तिलिस्म
मेरे जानने में न जाने कितनी राजनैतिक हस्तियों को चप्पल जूतों का स्वाद चखने को मिला है| पर मैंने सबसे पहले जूता खाते हुए जोर्ज बुश को देखा था,पर बुश जी इस जूते का शिकार होते होते बाल-बाल बचे थे| पर महाशक्ति अमेरिका के रास्ट्रपति के ऊपर कोई जूता फेंके यही काफी था| ये जूता एक पत्रकार ने फेंका था, जो शायद बुश महाशय के व्यवहार से संतुष्ट नहीं था| ये बात जूता बुश तक ही सीमित नहीं था, हर सभ्यता की तरह जूता फेंकना भी भारत में पश्चिम देश से आ गया| अब इसके बाद पी.चिदंबरम, सुरेश कलमाड़ी और इसके अलावा कई प्रसिद्द नेताओं को भी जूते चप्पल का सामना करना पड़ा है| खुद को युवा कहने वाले जम्मू-कश्मीर के मुक्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के ऊपर भी जूता फेंका गया था| इसके बाद ये सिलसिला चलता ही रहा|
पर इन सब घटनाओं में एक चीज़ समान थी, इनमे किसी को जूते से चोट नहीं लगी और न ही फेंके गए चप्पलों से इनके गाल लाल हुए| ध्यान देने की बात है की जो व्यक्ति किसी व्यक्ति पर चप्पल-जूते फेंक सकता है तो वह जूते-चप्पलों के जगह पर बम और पत्थर भी फेंक सकता है, पर ऐसा कभी नहीं हुआ| पर ऐसा क्यों नहीं हुआ ये विचारणीय है, मैंने इसपर कई लोगो से बात की तो मैंने पाया की जूते फेंकने वाले लोगों का उद्देश्य बस अपने को मशहूर करना होता है| अगर हम कुछ साल पीछे जाए उस समय और स्थान पर बुश जूते का शिकार हुए, उस पत्रकार द्वारा जूते मारने के बाद वो पत्रकार तो रातों-रात एक मशहूर हस्ती बन गया| अगर ऐसा करने वाले लोगों के नाम और पता गुप्त रख कर उन पर सख्त कार्यवाही की जाए तो मुझे ये विश्वास है की इस तरह की बचकानी हरकत का सिलसिला अवश्य ही थम जाएगा| जिस वक़्त पर बुश को जूता पड़ा था अगर प्रशासन उस पत्रकार का नाम और पता गुप्त रखकर उस पर कार्यवाही करता तो शायद पी. चिदंबरम, डॉ. मनमोहन सिंह, सुरेश कलमाड़ी जैसे लोग इसके शिकार न होते| पर मीडिया इस बात को नहीं समझती, अगर मीडिया भी ऐसी हरकत करने वालों के नाम टी.वी. चेन्नलों पर इतना न उछाले तो आगे से ऐसा कभी नहीं होगा| और अंत में मुझे ये कहने भी कोई अतिश्योक्ति नहीं है की अगर इस “जूताबाजों” का के नामों प्रचार अगर आगे भी होता रहेगा तो ऐसी बचकानी हरकतों को आगे भी होने से कोई नहीं रोक पायेगा| उम्मीद है की मेरी इस बात को लग समझे और इस जूता चप्पल फेंकने वालों के नाम का ज्यादा प्रचार न करे, क्योकि “जूतेबाज़” ऐसा सिर्फ अपने “पब्लिसिटी” (प्रचार) के लिए करते है| और वो ऐसा इसलिए करते है क्योकि कम समय में चर्चित होने का नया फैशन जो है|
————-शरद शुक्ला, फैज़ाबाद

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