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रूठा अगर मैं तुझसे तो इस कदर रुठूंगा.....

Posted On: 23 Nov, 2013 Others में

तीखी बातसच्चाई का आईना, आवाज वक्त की

shashank gaur

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रूठा अगर मैं तुझसे तो इस कदर रुठूंगा
कि तेरे शहर की मिट्टी मेरे वजूद को तरसेगी
मैं चाहकर भी तेरा अब हो न पाउंगा
मेरी रूह भी अगर अब तेरे प्यार को तरसेगी
मैं वो नाव का किनारा हूं जिसे जरूरत तो है तेरी
मैं उस किनारे पर नहीं जाउंगा जहां वजूद तेरा होगा
इसे समझना न गुरूर मेरा न समझना इसे बेदर्दी
मैं कहूंगा इसे इतना कि मेरे प्यार की है गल्ती
एतबार किया मैंने मगर थक कर तूम मुझे भुलादोगे
मैं मुश्किल से भुला पाउंगा ये मेरे प्यार की है गल्ती
कहना तो मैं चाहता था पर कुछ सोचकर रुक गया
क्योंकि धड़कते दिल की भी कोई जुबां नहीं होती
चाहता था तू मेरी होगी और मैं तेरा बनके दिखाउंगा
ऐसा हो न पाया ये किस्मत मैं समझ लूंगा
रूठा अगर मैं तुझसे तो इस कदर रुठूंगा
कि तेरे शहर की मिट्टी मेरे वजूद को तरसेगी
Written by – shashank gaur
Shashank.gaur88@gmail.com

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