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वाह रे भाजपा !!

Posted On: 8 Feb, 2013 Others में

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shashibhushan1959

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वाह रे भाजपा और वाह रे भाजपाई नेताओं का दृष्टिकोण ! अयोध्या का विवादास्पद राम मंदिर ही इनको चुनावी मुद्दा मिला है, जिसका मामला अभी न्यायालय में लंबित पड़ा है ! इन नेताओं के विवेक और अदूरदर्शिता पर तरस आता है ! देश अनेक ज्वलंत समस्याओं से जूझ रहा है ! भ्रष्टाचार – महंगाई – पानी – बिजली – सुरक्षा आदि पर किसी सार्थक पहल की बात नहीं हो रही है बल्कि मंदिर की बात हो रही है ! गोया एक मंदिर बन जाने से ये तमाम परेशानियां स्वतः दूर हो जायेंगी ! हँसी आ रही है ऐसी सोच रखने वाले भाजपा नेताओं पर ! भाजपा अभी और कितने अवसर खोयेगी ? कब वह वास्तविक और सार्थक बात करेगी ? या फिर वह अपने को नागनाथ या साँप नाथ ही बनाकर रखना चाहती है ?
दिल्ली कालेज में हुए श्री नरेन्द्र मोदी के भाषण के बाद भी उसे अपना पथ निर्धारित करने में परेशानी हो रही है ? सदियों बाद किसी राजनैतिक नेता द्वारा इतना प्रखर भाषण दिया गया ! जिसमें जाति-धर्म और वोटों का जिक्र नहीं था ! अगड़ों-पिछड़ों का जिक्र नहीं था ! संकीर्णता नहीं थी ! उलझाव नहीं था ! एक स्पष्ट दृष्टिकोण था ! एक अलग सोच थी ! जिसमें जनता सिर्फ मतदाता नहीं थी, युवा वर्ग नए मतदाताओं की खेप नहीं था, बल्कि ऊर्जा का स्रोत था ! मोदी जी का वह भाषण विकास की बातें कर रहा था !
परन्तु आश्चर्य और दुःख होता है, जब भाजपा के अन्य सभी नेता वास्तविक और सार्थक बातें न कर पुनः उलझन और भटकाववादी बातें कर येन-केन-प्रकारेण सत्ता में आना चाहते हैं ! अन्ना जी के आन्दोलन के समय, जब जन लोकपाल की मांग के लिए समग्र देश एकजुट होकर सड़क पर उतर रहा था, उस समय भाजपा के नेता “वेट एंड वाच” की नीति पर कार्य कर रहे थे ! दुबारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध जब जनता सड़क पर उतरी, उस समय भी भाजपा सक्रिय नहीं हुई और “वेट एंड वाच” करती रही ! दिल्ली में दामिनी के साथ हुई घटना पर जब सम्पूर्ण देश आंदोलित हो गया, जनता सड़क पर उतर आई, तब भी भाजपा “वेट एंड वाच” करती रही ! भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई के लिए भाजपा स्वयं को “प्रतिबद्ध” बताती रही और अध्यक्ष सहित अनेक नेता भ्रष्टाचार में लिप्त रहे ! रथ निकलता रहा, रैलियाँ होती रही, और नेपथ्य में भ्रष्टाचार भी फलता-फूलता रहा !
क्या भाजपा के अन्य नेताओं और श्री मोदी के दृष्टिकोण अलग-अलग हैं ? क्या सम्पूर्ण भाजपा सिर्फ बातों से ही भ्रष्टाचार दूर कर देगी ? व्यर्थ की रैलियों से ही देश की समस्याओं का समाधान हो जाएगा ? भाजपा कब वास्तविकता के धरातल पर उतर कर सार्थक और स्पष्ट बातें करेगी ?

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