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''भई तुम तो हद करती हो !''

Posted On: 21 Mar, 2014 Others में

! अब लिखो बिना डरे !शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

DR. SHIKHA KAUSHIK

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शौहर से बहस करती हो भई तुम तो हद करती हो !
शौहर से न डरती हो भई तुम तो हद करती हो !
………………………………………………….
मैं आँखें दिखाता हूँ फिर हाथ उठाता हूँ ,
दबाने से न दबती हो भई तुम तो हद करती हो !
…………………………………………..
मैं इल्ज़ाम लगाता हूँ फिर करता हूँ ज़लील ,
तुम मुझ पे ही हंसती हो भई तुम तो हद करती हो !
…………………………………………………….
मैंने तो काट डाले ख्वाबों के तेरे पंख ,
बिना पंख ही उड़ती हो भई तुम तो हद करती हो !
…………………………………………………………
‘नूतन’जो क़त्ल करने को तलवार उठाई ,
तुम धार पर चलती हो भई तुम तो हद करती हो !

शिखा कौशिक ‘नूतन’

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