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मधुर मेनका -अधरों पर आती ऋषि को भरमाने !

Posted On: 28 Feb, 2014 Others में

! अब लिखो बिना डरे !शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

DR. SHIKHA KAUSHIK

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Mayhem

आंसू-आंसू में अंतर है भिन्न-भिन्न मुस्कानें ,
जीवन धारण करने वाला जन-जन ये पहचाने !
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एक आंसू में पीड़ा घुलकर भिगो रही है पलकें ,
हर्ष के कारण कभी कभी आँखों में आंसू छलकें ,
कौन है खरा कौन है मीठा पीने वाला जाने !
आंसू आंसू में अंतर है भिन्न-भिन्न मुस्कानें !
……………………………………………………..
धनवानों की आँख का आंसू मोती है कहलाता ,
किन्तु निर्धन का आंसू तो मिटटी में मिल जाता ,
कौन इकठ्ठा कर दोनों को जायेगा तुलवाने !
आंसू आंसू में अंतर है भिन्न-भिन्न मुस्कानें !
……………………………………………………………
आंसू की भांति ही होता मुस्कानों में अंतर ,
अधरों पर आकर क्षण में कर देती दुःख छू मंतर ,
मनोभाव के दर्शन होते मुस्कानों के बहाने !
आंसू आंसू में अंतर है भिन्न-भिन्न मुस्कानें !
………………………………………………………
शिशु-अधरों पर आती है ये स्वच्छ सलिल सी निश्छल ,
कुटिल बनी कैकेयी -अधरों पर सजती हाय निर्मम ,
मधुर मेनका -अधरों पर आती ऋषि को भरमाने !
आंसू आंसू में अंतर है भिन्न-भिन्न मुस्कानें !

शिखा कौशिक ‘नूतन’
.

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