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''मर्द का गुरूर !''

Posted On: 3 Feb, 2014 Others में

! अब लिखो बिना डरे !शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

DR. SHIKHA KAUSHIK

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close up hand of a muslimah bride signing on the form of registration for muslim wedding. focusing on the hand with shallow depth of field - stock photo

सदियों से है बढ़ता ही गया मर्द का गुरूर !
सीढ़ियां चढ़ता ही गया मर्द का गुरूर !!
………………………………………………
जो कुछ गलत दुनिया में हुआ उसका सब कुसूर ,
औरत के सिर मढ़ता ही गया मर्द का गुरूर !
……………………………………………………..
औरत को रखा बंद एक जानवर बना ,
पट्टा गले कसता ही गया मर्द का गुरूर !
………………………………………………….
न देख कुछ न बोल बस हाँ में हाँ मिला ,
औरत को यूँ डसता ही गया मर्द का गुरूर !
………………………………………..
आग में जला या फांसी पर चढ़ा ,
‘नूतन’ को है छलता ही गया मर्द का गुरूर !

शिखा कौशिक ‘नूतन’

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